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अग्नि पाती

अधिदिवस (लोंद के दिन)

अनासक्ति

अहमद की पाती

आध्यात्मिक गुण

आध्यात्मिक सभा

आरोग्य

आरोग्य के लिये लम्बी प्रार्थना

उपवास

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कार्मल की पाती

कोष

क्षमा याचना

गर्भवती माताओं के लिये

घर से निकलते समय

तीर्थयात्रा की प्रार्थना

दिवंगतों के लिए

दिवंगतों के लिये

दिव्य योजना की पाती से

दृढ़ता

पति के लिये

परीक्षा और सहायता

परीक्षाएँ और कठिनाइयाँ

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प्रभुधर्म की विजय

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रिज़वान की पाती

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लम्बी अनिवार्य प्रार्थना

विवाह

शयनकाल

शिक्षण

संरक्षण

संविदा में अडिगता

सभाएँ

सहायता

स्तुति और कृतज्ञता

अग्नि पाती

अग्नि पाती

परम प्राचीन परम महान ईश्वर के नाम पर !

वस्तुत:, निष्ठावनों के ह्रदय वियोग की अग्नि में दग्ध है: कहाँ है तेरे मुखमण्डल की आभा, हे सर्वलोकों के प्रियतम ?

जो तेरे निकट हैं, छोड़ दिये गये हैं वे निर्जन के अंधकार में: कहाँ है तेरे पुनर्मिलन के प्रभात की जगमगाहट, हे सर्वलोकों की कामना ?

तेरे प्रियजनों के शरीर तड़प रहे हैं सुदूर रेत पर: कहाँ है तेरी उपस्थिति का महासागर, हे सर्वलोकों के मोहन ?

ललकते हाथ तेरी कृपा और उदारता के स्वर्ग की ओर उठे हैं: कहाँ है तेरी अनुकम्पा की वर्षा हे सर्वलोकों के उत्तरदाता ?

हर ओर अत्याचार कर रहें हैं विश्वासघाती: कहाँ है तेरी विधि-लेखनी की बाध्यकारी शक्ति हे सर्वलोकों के विजेता ?

हर दिशा में तेज हो उठी है श्वानों की भौंक: कहाँ है तेरे सामर्थ्य के महावन का मृगराज, हे सर्वलोकों के निर्णायक ?

समस्त मानवता को जकड़ लिया है जड़ता ने: कहाँ है तेरे प्रेम की ऊष्मा, हे सर्वलोकों के सूर्य ?

संकट अब अपने चरम पर आ पहुँचा है: कहाँ हैं तेरी सहायता के चिन्ह, हे सर्वलोकों के मुक्तिदाता ?

बहुसंख्य जनों को घेर लिया है अंधकार ने: कहाँ है तेरी आभा की प्रखरता, हे सर्वलोकों के आलोक ?

लोगों की गर्दनें दुष्ट्ता से तनी हैं: कहाँ है तेरे प्रतिशोध की तलवार, हे सर्वलोकों के प्रलयंकर ?

अधमता पतन के रसताल तक जा पहुँची है: कहाँ है तेरी गरिमा के संकेत, हे सर्वलोक के गौरव ?

तुझ सर्वकृपालु के नाम को प्रकट करने वाले दु;खों से पीड़ित हैं; कहाँ है तेरे प्राकट्य के अरुणोदय का आहलाद, हे सर्वलोकों के आनन्द ?

पृथ्वी के जन-जन पर टूट पड़ी है घोर विपदा: कहाँ हैं तेरे आनन्द की ध्वजाएँ, हे सर्वलोकों के उल्लास ?

देखता है तू कि तेरे ‘संकेतो का उदयस्थल’ कुचक्रों के आवरण से ढक दिया गया है : कहाँ है तेरी सामर्थ्य की उंगलियाँ, हे सर्वलोकों की शक्ति ?

भीषण प्यास से सब हैं संत्रस्त: कहाँ हैं तेरी कृपा की सरिता, हे सर्वलोकों की करुणा ?

मैं प्रवंचित निष्कासित हूँ निर्जन वीराने में: कहाँ हैं तेरे आदेश के स्वर्ग के अनुचर, हे सर्वलोकों के सम्राट ?

मैं हूँ परित्यक्त एक अनजाने देश में: कहाँ है तेरी निष्ठा के प्रतीक, हे सर्वलोकों के विश्वास ?

मृत्यु की वेदना ने ग्रास बना लिया सबको: कहाँ हैं तेरे अनन्त जीवन के सागर के ज्वार, हे सर्वलोकों के जीवन ?

फूंक गया है शैतान मंत्र अपना हर कान में : कहाँ है तेरी ज्वाला का धूमकेतु, हे सर्वलोकों के आलोक ?

बहुसंख्य मानवों को पथभ्रष्ट कर गया है वासनाओं का सुरापान: कहाँ हैं तेरी विशुद्धता के निर्झर, हे सर्वलोकों की अभिलाषा ?

देखता है तू इस प्रवंचित को सीरियाई लोगों के बीच उत्पीड़न से आक्रांत: कहाँ है तेरी प्रभात-रश्मियों की दमक, हे सर्वलोकों की ज्योति ?

देखता है तू कि प्रतिबन्धित है मेरा बोलना भी: कहाँ से मुखरित होगी तेरी मधुरता, हे सर्वलोकों के कोकिल ?

बहुसंख्य लोग कपोल कल्पनाओं के जाल में उलझे हैं: कहाँ हैं तेरी आस्था के शब्द-शिल्पी हे सर्वलोकों के आश्वासन ?

डूब रहा है बहा विपदा के सागर में: कहाँ है तेरी मुक्ति की नौका, हे सर्वलाकों के उद्धारक ?

सत्य और पावनता के, निष्ठा और सम्मान के दीप बुझा दिये गये है: तेरे प्रतिहिंसक क्रोध के प्रतीक, हे सर्वलोकों के संचालक ?

क्या तुम नहीं देख सकते उन्हें जो तेरे ही लिये युद्धरत हैं या जो विचारमग्न हैं उन संकटों पर, जो तेरे प्रेम- पथ पर, उन पर आन पड़े हैं ? ठहर गई है अब मेरी लेखनी, हे सर्वलोकों के प्रियतम !

दिव्य कल्पतरूवर के शाख-शाख टूटे हैं नियति के प्रचंड वेग, झंझा की झोंक से : कहाँ हैं तेरे अभय दान की ध्वजायें, हे सर्वलोकों के विजेता ?

यह मुखड़ा कलंक की धूल से ढका है: कहाँ हैं तेरी अनुकम्पा के मधुर समीर, हे सर्वलोकों की करुणा ?

प्रवंचकों ने कलुषित क्र दिया वस्त्र पावनता का: कहाँ है तेरी पावनता का परिधान, हे सर्वलोकों के श्रृंगारकर्ता ?

मनुष्य ने अपने ही हाथों से जो कर डाला है, स्तब्ध रह गया है उससे सागर दया का: कहाँ हैं तेरी उदारता की लहरें, हे सर्वलोकों की अभिलाषा ?

तेरे शत्रुओं के आंतक से बंद पड़े हैं द्वार तेरे दिव्य दरबार तक पहुँचने के: कहाँ हैं कुंजी तेरे आशीष की, हे सर्वलोकों के समाधानकर्ता ?

द्रोह की विषमय हवाओं से पात-पात मुरझाए हैं: कहाँ है तेरी कृपा की मेघ-धारा हे सर्वलोकों के दाता ?

विश्व हो गया है अंधकारमय पापों की धूल से: कहाँ हैं तेरी क्षमा के पवन-झकोरे हे सर्वलोकों के क्षमाकर्ता ?

एकाकी है यह युवक इस निर्जन भू पर : कहाँ है तेरी स्वर्गिक करुणा की वर्षा, हे सर्वलोकों के वरदाता ?

हे परम महान लेखनी ! तेरी अतिशय मधुर पुकार सुन ली है हमने शाश्वत साम्राज्य में : ध्यान से सुन जो कह रही भव्यता की वाणी, हे तू सर्वलोकों के ‘प्रवंचित ‘!

होता न यदि शीत, विजयी होती कैसे ऊष्मा तेरे शब्दों की, हे सर्वलोकों के व्याख्याता ?

संकट यदि नहीं होते, कैसे चमक दिखाता सूर्य तेरे धैर्य का, हे सर्वलोकों के आलोक ?

शोक न कर तू, दुष्ट जनों के कारण, रचा गया था तुझे सब कुछ झेलने को, हे सर्वलोकों के धैर्य !

विद्रोह के लिये भड़काने वालों के बीच, संविदा के क्षितिज पर तेरा उदित होना, और ललकना तेरा उस प्रभु के लिये, आह ! कितना मधुर था, हे सर्वलोकों के प्रेम !

तूने ही उच्चतम् शिखरों पर फहराया था मुक्ति-ध्वजा, और जगाया था सागर उदारता भरी कृपा का | हे सर्वलोकों के भावोल्लास !

तेरे एकाकीपन से ही चमका था सूर्य एकमेवता का, और तेरे निष्कासन से ही अंलकृत हुई थी भूमि एकता की | धैर्य रख, हे सर्वलोकों के निर्वासित !

अनादर को हमने बनाया है परिधान गौरव का, और दुखों को तेरे मन्दिर का आभूषण, हे सर्वलोकों के गौरव !

देखता है तू घृणा भरे ह्रदयों को, इसकी उपेक्षा करना है तेरी महानता, हे सर्वलोकों के पाप को छिपाने वाले ! आगे बढ़ चमके जब तलवारें, बढ़ता जा, ‘गर तीर भी बरसते हों, हे सर्वलोकों के बलिदान !

तू बिलखे या मैं रोऊँ, कि तेरे अनुयायी हैं इतने थोड़े, जो कारण है अखिल लोकों के रुदन का !

मैने सुनी है, सत्य ही, तेरी पुकार हे सर्वगौरवमय प्रियतम !

दीप्त है अब बहा का मुखमण्डल, दु;खों के ताप से,

तेरे ज्योतिमर्य शब्दों कि ज्वाला से, और अब वह निष्ठापूर्वक उठ खड़ा हुआ है

तेरी सुप्रसन्नता पर दृष्टी केन्द्रित किए हुए,

हे अखिल लोकों के विधाता !

हे अली अकबर ! धन्यवाद कर अपने प्रभु का इस पाती के लिए कि जब मेरी विनम्रता की सुरभि तू ग्रहण न कर सकेगा तब तू जान पाएगा कि सब के आराध्य ईश्वर के पथ पर कैसे कष्टों ने हमें घेरा था |

(यदि प्रभु के सेवक पूरी निष्ठा से इसका पाठ करेंगे तो जग उठेंगी ऐसी ज्वालाएँ उनकी नसों में जो सर्वलोकों में अग्नि धधका देंगी |)

– Bahá’u’lláh

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परम प्राचीन परम महान ईश्वर के नाम पर !

वस्तुतः, निष्ठावानों के हृदय वियोग की अग्नि में दग्ध हैं : कहाँ है तेरे मुखमण्डल की आभा, हे सर्वलोकों के प्रियतम ?

जो तेरे निकट हैं, छोड़ दिये गये हैं वे निर्जन के

अंधकार में: कहाँ है तेरे पुनर्मिलन के प्रभात की

जगमगाहट, हे सर्वलोकों की कामना ?

तेरे प्रियजनों के शरीर तड़प रहे हैं पड़े सुदूररेत

पर: कहाँ है तेरी उपस्थिति का महासागर, हे

सर्वलोकों के मोहन ?

ललकते हाथ तेरी कृपा और उदारता के स्वर्ग की ओर उठे हैं: कहाँ है तेरी अनुकम्पा की वर्षा, हे

सर्वलोकों के उत्तरदाता ?

हर ओर अत्याचार कर रहे हैं विश्वासघाती: कहाँ

है तेरीविधि-लेखनी की बाध्यकारी शक्ति, हे

सर्वलोकों के विजेता ?

हर दिशा में तेज हो उठी है श्वानों की भौंक: कहाँ है तेरे सामर्थ्य के महावन का मृगराज, हे सर्वलोकों के निर्णायक ?

समस्त मानवता को जकड़ लिया है जड़ता ने: कहाँ है तेरे प्रेम की ऊष्मा, हे सर्वलोकों के सूर्य ?

संकट अब अपने चरम पर आ पहुँचा है: कहाँ है तेरी सहायता के चिन्ह, हे सर्वलोकों के मुक्तिदाता ?

बहुसंख्य जनों को घेर लिया है अंधकार ने: कहाँ है तेरी आभा की प्रखरता, हे सर्वलोकों के आलोक ?

लोगों की गर्दनें दुष्टता से तनी हैं: कहाँ है तेरे प्रतिशोध की तलवार, हे सर्वलोकों के प्रलयंकर ?

अधमता पतन के रसातल तक जा पहुँची है: कहाँ है तेरी गरिमा के संकेत, हे सर्वलोकों के गौरव ?

तुझ सर्वकृपालु के नाम को प्रकट करने वाले दुःखों से पीड़ित हैं: कहाँ है तेरे प्राकट्य के अरुणोदय का आह्लाद, हे सर्वलोकों के आनन्द ?

पृथ्वी के जन-जन पर टूट पड़ी है घोर विपदा: कहाँ हैं तेरे आनन्द की ध्वजाएँ, हे सर्वलोकों के उल्लास ?

देखता है तू कि तेरे ’संकेतो का उदयस्थल‘ कुचक्रों के आवरण से ढक दिया गया है: कहाँ है तेरी सामथ्र्य की उंगलियाँ, हे सर्वलोकों की शक्ति ?

भीषण प्यास से सब हैं संत्रस्त: कहाँ है तेरी कृपा की सरिता, हे सर्वलोकों की करूणा ?

लोभ ने जन-जन को बंदी बना लिया है: कहाँ है अनासक्ति के साकार रूप, हे सर्वलोकों के स्वामी?

मैं प्रवंचित निष्कासित हूँ निर्जन वीराने में: कहाँ है तेरे आदेश के स्वर्ग के अनुचर, हे सर्वलोकों के सम्राट ?

मैं हूँ परित्यक्त एक अनजाने देश में: कहाँ हैं तेरी निष्ठा के प्रतीक, हे सर्वलोकों के विश्वास ?

मृत्यु की वेदना ने ग्रास बना लिया है सबको: कहाँ है तेरे अनन्त जीवन के सागर के ज्वार, हे सर्वलोकों के जीवन ?

फूंक गया है शैतान मंत्र अपना हर कान में: कहाँ है तेरी ज्वाला का धूमकेतु, हे सर्वलोकों के आलोक ?

बहुसंख्य मानवों को पथभ्रष्ट कर गया है वासनाओं का सुरापान: कहाँ है तेरी विशुद्धता के निर्झर, हे सर्वलोकों की अभिलाषा ?

देखता है तू इस प्रवंचित को सीरियाई लोगों के बीच उत्पीड़न से आक्रांत: कहाँ है तेरी प्रभात-रश्मियों की दमक, हे सर्वलोकों की ज्योति ?

देखता है तू कि प्रतिबन्धित है मेरा बोलना भी: कहाँ से मुखरित होगी तेरी मधुरता, हे सर्वलोकों के कोकिल ?

बहुसंख्य लोग कपोल कल्पनाओं के जाल में उलझे हैं: कहाँ हैं तेरी आस्था के शब्द-शिल्पी, हे सर्वलोकों के आश्वासन ?

डूब रहा है बहा विपदा के सागर में: कहाँ है तेरी मुक्ति की नौका, हे सर्वलाकों के उद्धारक ?

देखता है तू अपनी वाणी के अरुणोदय को सृष्टि के अंधकार में: कहाँ है तेरी अनुकम्पा के आसमान का सूर्य, हे सर्वलोकों के प्रकाशदाता ?

सत्य और पावनता के, निष्ठा और सम्मान के दीप बुझा दिये गये हैं: कहाँ हैं तेरे प्रतिहिंसक क्रोध के प्रतीक, हे सर्वलोकों के संचालक ?

क्या तुम नहीं देख सकते उन्हें जो तेरे ही लिये युद्धरत हैं या जो विचारमग्न हैं उन संकटों पर, जो तेरे प्रेम-पथ पर, उन पर आन पड़े हैं ? ठहर गई है अब मेरी लेखनी, हे सर्वलोकों के प्रियतम !

अग्नि पाती दिव्य कल्पतरूवर के शाख-शाख टूटे हैं नियति के प्रचंड वेग, झंझा की झोंक से: कहाँ हैं तेरे अभय दान की ध्वजायें, हे सर्वलोकों के विजेता ?

यह मुखड़ा कलंक की धूल से ढका है: कहाँ हैं तेरी अनुकम्पा के मधुर समीर, हे सर्वलोकों की करूणा ?

प्रवंचकों ने कलुषित कर दिया वस्त्र पावनता का: कहाँ है तेरी पावनता का परिधान, हे सर्वलोकों के श्रृंगारकर्ता ?

मनुष्य ने अपने ही हाथों से जो कर डाला है, स्तब्ध रह गया है उससे सागर दया का: कहाँ है तेरी उदारता की लहरें, हे सर्वलोकों की अभिलाषा ?

तेरे शत्रुओं के आतंक से बंद पड़े हैं द्वार तेरे दिव्य दरबार तक पहुँचने के: कहाँ हैं कुंजी तेरे आशीष की, हे सर्वलोकों के समाधानकर्ता ?

द्रोह की विषमय हवाओं से पात-पात मुरझाए हैं: कहाँ है तेरी कृपा की मेघ-धारा, हे सर्वलोकों के दाता ?

विश्व हो गया है अंधकारमय पापों की धूल से: कहाँ हैं तेरी क्षमा के पवन-झकोरे, हे सर्वलोकों के क्षमाकर्ता ?

एकाकी है यह युवक इस निर्जन भू पर: कहाँ है तेरी स्वर्गिक करूणा की वर्षा, हे सर्वलोकों के वरदाता ?

हे परम महान लेखनी! तेरी अतिशय मधुर पुकार सुन ली है हमने शाश्वत साम्राज्य में: ध्यान से सुन जो कह रही है भव्यता की वाणी, हे तू सर्वलोकों के ’प्रवंचित‘!

होता न यदि शीत, विजयी होती कैसे ऊष्मा तेरे शब्दों की, हे सर्वलोकों के व्याख्याता ?

संकट यदि नहीं होते, कैसे चमक दिखाता सूर्य तेरे धैर्य का, हे सर्वलाकों के आलोक ?

शोक न कर तू, दुष्ट जनों के कारण, रचा गया था तुझे सब कुछ झेलने को, हे सर्वलोकों के धैर्य !

विद्रोह के लिये भड़काने वालों के बीच, संविदा के क्षितिज पर तेरा उदित होना और ललकना तेरा उस प्रभु के लिये, आह! कितना मधुर था, हे सर्वलोकों के प्रेम !

तूने ही उच्चतम् शिखरों पर फहराया था मुक्ति-ध्वज, और जगाया था सागर उदारता भरी कृपा का। हे सर्वलोकों के भावोल्लास !

तेरे एकाकीपन से ही चमका था सूर्य एकमेवता का, और तेरे निष्कासन से ही अलंकृत हुई थी भूमि एकता की। धैर्य रख, हे सर्वलोकों के निर्वासित !

अग्नि पाती अनादर को हमने बनाया है परिधान गौरव का और दुःखों को तेरे मन्दिर का आभूषण, हे सर्वलोकों के गौरव !

देखता है तू घृणा भरे हृदयों को, इसकी उपेक्षा करना है तेरी महानता, हे सर्वलोकों के पाप को छिपाने वाले! आगे बढ़ चमकें जब तलवारें, बढ़ता जा, ,गर तीर भी बरसते हों, हे सर्वलोकों के बलिदान !

तू बिलखे या मैं रोऊँ, कि तेरे अनुयायी हैं इतने थोड़े, जो कारण है अखिल लोकों के रुदन का ! मैने सुनी है, सत्य ही, तेरी पुकार, हे सर्वगौरवमय प्रियतम !

दीप्त है अब बहा का मुखमण्डल, दुःखों के ताप से, तेरे ज्योतिर्मय शब्दों की ज्वाला से और अब वह निष्ठापूर्वक उठ खड़ा हुआ है तेरी सुप्रसन्नता पर दृष्टि केन्द्रित किए हुए, हे अखिल लोकों के विधाता !

हे अली अकबर! धन्यवाद कर अपने प्रभु का इस पाती के लिए, कि जब मेरी विनम्रता की सुरभि तू ग्रहण न कर सकेगा तब तू जान पाएगा कि सब के आराध्य ईश्वर के पथ पर कैसे कष्टों ने हमें घेरा था।

(यदि प्रभु के सेवक पूरी निष्ठा से इसका पाठ करेंगे तो जग उठेंगी ऐसी ज्वालाएँ उनकी नसों में जो सर्वलोकों में अग्नि धधका देंगी।)

– Bahá’u’lláh

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अधिदिवस (लोंद के दिन)

(अधिदिवस उपवास माह के पहले आते हैं और उपवास की तैयारी के दिन होते हैं, ये अतिथि-सत्कार, दान और उपहार देने के दिन होते हैं।)

मेरे ईश्वर, मेरी महाज्वाला और मेरी महाज्योति! वे दिन प्रारम्भ हो गये हैं जिन्हें तूने अपने ग्रंथ में ”अय्याम-ए-हा“ के दिन कहा है। हे तू, जो नामों का अधिपति है, वह उपवास निकट आ रहा है, जिसे करने का आदेश तेरी परमोच्च लेखनी ने उन सभी को दिया है जो तेरी सृष्टि के साम्राज्य में निवास करते हैं। इन दिनों के नाम पर और उन सबके नाम पर जो इस दौरान तेरे आदेशों की डोर को दृढ़ता से थामे रहे हैं और जो तेरी शिक्षाओं से अभिभूत हैं, मैं विनती करता हूँ तुझसे, हे मेरे नाथ, कि प्रत्येक आत्मा के लिये अपने दरबार में एक स्थान नियत कर और तेरे मुखारबिंद की ज्योति की भव्यता के प्रकटीकरण में प्रत्येक को एक आसन दे।

हे नाथ! तुमने अपनी परम पावन पुस्तक में जो भी विहित किया है उनसे विमुख नहीं कर पाई है उन्हें कोई भी भ्रष्ट प्रवृत्ति। ये तेरे धर्म के सम्मुख नत हुए हैं और तेरे परम पावन ग्रन्थ का इन्होंने ऐसे दृढ़ संकल्प से स्वागत किया है जो संकल्प स्वयं तुझसे जन्म लेता है। तूने उनके लिये जो भी आदेश दिया है उसका इन्होंने पालन किया है और जो कुछ तेरे द्वारा भेजा गया है उसके अनुसरण को चुना है।

देखता है तू, हे मेरे नाथ, कैसे उन्होंने तेरे द्वारा तेरे पावन ग्रंथों में प्रकटित सब कुछ को पहचाना और स्वीकार किया है। उन्हें, हे मेरे नाथ, अपनी कृपालुता के हाथों से अपनी चिरंतनता की जलधाराएँ पीने दे और तब उनके लिये वह पुरस्कार लिख दे जो तेरे सान्निध्य के महासिंधु में निमग्न होने वालों के लिये और तुझसे मिलन की श्रेष्ठ सुरा को प्राप्त करने वालों के लिये नियत किया गया है। मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे राजाधिराज! कि उनके लिये इस लोक और उस लोक का मंगल विधान कर और उनके लिये वह अंकित कर जो तेरा कोई भी प्राणी नहीं खोज पाया है और उनकी गिनती ऐसे लोगों के साथ कर जिन्होंने तेरे चारों ओर परिक्रमा की है और जो तेरे लोकों में से प्रत्येक लोक में, तेरे सिहांसन के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। तू सत्य ही, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञाता, सर्वसूचित है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8751 (bpn8751)

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अनासक्ति

महिमावंत है तू, हे मेरे ईश्वर! धन्यवाद देता हूँ मैं तुझे कि तू ने मुझे उसका ज्ञान कराया, जो तुम्हारी दया का आदिस्त्रोत है, जो तुम्हारी अनुकम्पा का आदिस्थल है और जो है तुम्हारे धर्म का कोषागार। जिस नाम के स्मरण मात्र से उनके चेहरे दीप्तिमान हो उठते हैं, जो तुम्हारे समीप हैं और उनके हृदय-पखेरू तुम तक पहुँचने के लिये आकुल-व्याकुल हो उठते हैं, जो तुम्हारे भक्त हैं।

मैं तुम्हारे उस नाम के सहारे याचना करता हूँ कि यह वर दे कि हर पल, हर परिस्थिति में तुम्हारी डोर थामे रहूँ और तुम्हें छोड़कर अन्य सबकी आसक्ति से मुक्त हो जाऊँ और तुम्हारे प्रकटीकरण की ओर एकटक देखता रहूँ और तुमने अपनी पातियों में जो विहित किया है उनका अनुपालन कर सकूँ। हे मेरे ईश्वर! मेरे बाह्य और अन्तर्मन को अपनी अनुकम्पा और प्रेममय दया के परिधान से आभूषित कर। मुझे सुरक्षित रख और तुम्हें जो कुछ भी अप्रिय है उनसे दूर रख और अपनी आज्ञाओं के अनुपालन में कृपापूर्वक मेरी और मेरे प्रियजनों की सहायता कर और मेरे अंदर जो भी विषय-प्रवृत्ति और दुष्काम भाव हैं उन पर विजय पाने में मेरी सहायता कर।

तू सत्य ही, समस्त मानवजाति का स्वामी है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, तू ही है सर्वज्ञ, सर्वप्रज्ञ।

– Bahá’u’lláh

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हे ईश्वर! मेरे ईश्वर मुझे अपने निकट बुला, अपने दरबार की पवित्र परिधि में रहने दे, तुझसे दूर रहकर मैं निष्प्राण हो गया हूँ; अपने अनुग्रह के पंखों की छाया तले विश्राम करने दे, तुझसे वियोग की ज्वाला ने मेरे हृदय को विह्वल कर दिया है। बुला ले मुझे, उस सरिता के निकट जो सत्य ही जीवन है। निरंतर तेरी खोज में मेरी आत्मा प्यास से दग्ध हो गई है। हे मेरे ईश्वर! मेरी आहें, मेरी वेदना की तीक्ष्णता और मेरे आँसू तेरे प्रति मेरे प्रेम के प्रतीक हैं। उस गुणगान के माध्यम से जिसका बखान तू ने किया, मैं याचना करता हूँ, ऐसी अनुकम्पा कर कि मैं उन लोगों में गिना जाऊँ जिन्होंने तेरे दिवस में तुझे पहचाना है और तेरी सम्प्रभुता स्वीकार की है। हे मेरे ईश्वर! अपनी प्रेममय दयालुता के जीवंत जल का अपनी दया के करों से पान करने में सहायता कर, ताकि मैं तुझे छोड़, पूरी तरह बिसरा दूँ सब कुछ और पूरी तरह तुझमें ही रम जाऊँ। तू जो चाहे करने में समर्थ है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, संकट में सहायक, स्वयंभू। तू है सर्वशक्तिमान; हे तू, जो सभी सम्राटों का सम्राट है, तेरी महिमा का गुणगान हो।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8219 (bpn8219)

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जयघोष हो तुम्हारे नाम का, हे मेरे ईश्वर! तुम्हारी आज्ञा से और तुम्हारी इच्छा के अनुकूल सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त, तुम्हारी अनुकम्पा के परिधान की सुरभि के सहारे और तुम्हारी दिव्य इच्छा के सूर्य के सहारे, जो तुम्हारी दया के क्षितिज पर तुम्हारी शक्ति और सम्प्रभुता के साथ प्रखर प्रकाशमान हुआ है, मैं याचना करता हूँ कि मेरे हृदय से कपोल कल्पनाओं और व्यर्थ धारणाओं को धो डाल, ताकि तन-मन से मैं तेरी ओर उन्मुख हो सकूँ। हे तू, जो समस्त मानवजाति का स्वामी है! मैं तेरा सेवक हूँ और हूँ तेरे सेवक का पुत्र! हे मेरे ईश्वर! मैंने तुम्हारी अनुकम्पा की बांह पकड़ ली है और तुम्हारी स्नेहिल कृपा की डोर थाम ली है। मेरे लिये उन शुभ पदार्थों का विधान कर जो तुम्हारे हैं और अपने आशीष के स्वर्ग से, अपने अनुग्रह के आकाश से भेजे गये सहभोज में सम्मिलित होने दे। तू सत्य ही, सभी लोकों का स्वामी है और ईश्वर है उन सबका, जो स्वर्ग में और धरा पर हैं।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8220 (bpn8220)

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हे ईश्वर! तेरे धर्म की ऊष्मा ने कई अचेत हृदयों को किया है प्रदीप्त और तेरी वाणी के माधुर्य ने जगाया है अनेक सोये हुए लोगों को। न जाने कितने ऐसे अनजाने लोग हैं, जिन्होंने तेरी एकता के तरुवर की छाया में आश्रय चाहा है और न जाने कितने ऐसे प्यासे लोग हैं जो तेरे इस दिवस में तेरी जीवंत जलधारा की ओर आकुल हो दौड़ पड़े हैं।

धन्य है वह जो उन्मुख हुआ है तेरी ओर, हुआ है तत्पर तेरी मुख-ज्योति का अरुणोदय पाने को! धन्य है वह जो उन्मुख हुआ है पूर्ण स्नेह से तेरे प्राकट्य के उदय बिन्दु, तेरी प्रेरणा के निर्झर स्रोत की ओर। धन्य है वह जिसने तेरी उदारता और कृपा से प्राप्त अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया है तेरे ही पथ में। धन्य है वह जिसने तुझे पाने की उत्कट चाह में तेरे सिवा अपना सर्वस्व त्याग दिया है। धन्य है वह जिसने तेरी अंतरंग प्रार्थना का सुख पाया है और विरक्त हो गया है जो सब कुछ से, सिवाय तेरे।

मैं याचना करता हूँ, हे मेरे नाथ ! उसके माध्यम से जो ’नाम‘ है तेरा, तेरी ही शक्ति सम्प्रभुता से जो उदित हुआ है कारागार के क्षितिज पर, कि सबको तू वह प्रदान कर जो तू समझता है उचित और जो है तेरे परम पद के अनुरूप। वस्तुतः, तेरी शक्ति है सर्वोपरि।

– Bahá’u’lláh

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मैं नहीं जानता, हे मेरे ईश्वर, कि वह कौन सी अग्नि है जो तूने अपनी भूमि पर प्रज्ज्वलित की है। धरती कभी भी इसके तेज को आच्छादित नहीं कर सकती और न जल ही इसकी ज्वाला को बुझा सकता है। संसार के समस्त निवासी इसके वेग को अवरुद्ध करने में असमर्थ हैं। वह जो इसके निकट खिंच आया है और इसकी गम्भीर गर्जना को जिसने सुना है उसे प्राप्त आशीर्वाद महान हैं।

कुछ को, हे मेरे ईश्वर, तूने अपनी शक्तिदायिनी कृपा के द्वारा इसकी ओर आने के योग्य बनाया है, जबकि दूसरों को उनके कर्मों के कारण पीछे रखा है। जिसने भी शीघ्रता से इसकी ओर पग बढ़ाये हैं और तेरे सौन्दर्य को निहारने की उत्कंठा में तुझ तक जो भी पहुँचा है, उसने तेरे पथ में अपना जीवन न्यौछावर कर दिया है और तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से पूर्णतया अनासक्त होकर तुझ तक पहुँच गया है।

मैं याचना करता हूँ कि उस अग्नि से जो तेरी सृष्टि में प्रज्ज्वलित हुई है, उन पदों को विदीर्ण कर दे, जिन्होंने मुझे तेरी भव्यता के सिंहासन के सम्मुख उपस्थित होने और तेरे प्रवेश-द्वार पर खड़ा होने से रोक रखा है। हे मेरे प्रभु! मेरे लिये अपने ग्रंथ में विहित हर वस्तु का विधान कर और मुझे अपनी दया की शरण से बहुत दूर हटाये जाने का दुःख न दे। तू जैसा चाहे करने में सशक्त है; तू निश्चय ही, सर्वशक्तिशाली, परम उदार है।

– Bahá’u’lláh

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स्तुति हो तेरी हे मेरे परमेश्वर! मैं तेरे उन सेवकों में से एक हूँ जिन्होंने तुझ पर और तेरे चिन्हों पर विश्वास किया है। देखता है तू कि कैसे तेरी दया के द्वार की ओर मैं ध्यान लगाये हुए हूँ और तेरी स्नेहमयी कृपा की ओर उन्मुख हो गया हूँ। मैं याचना करता हूँ तुझसे, तेरी परम श्रेष्ठ उपाधियों और परम उदात्त गुणों के नाम पर, कि मेरे सम्मुख अपने वरदानों के द्वार खोल दे और तब जो शुभ हो वह करने में मेरी सहायता कर। हे तू, जो सभी नामों और गुणों का अधिष्ठाता है!

मैं दरिद्र हूँ, हे मेरे प्रभु! तू है सर्वसम्पन्न! मैं तेरी ओर उन्मुख हूँ और स्वयं को तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से मुक्त कर लिया है। मैं विनती करता हूँ तुझसे कि मुझे अपनी मृदुल दया के पवन झकोरों से वंचित मत कर और जो कुछ तूने अपने प्रिय सेवकों के लिये निश्चित किया है, उसे मुझ तक आने से न रोक।

मेरे नेत्रों से पर्दा हटा दे, हे मेरे प्रभु, जिससे जो भी तूने अपने प्राणियों के लिये चाहा है, मैं उसे पहचान पाऊँ और तेरी रचना के सभी मूर्त्त रूपों में तेरी सर्वसामर्थ्यमय शक्ति के प्रकटीकरणों को खोज पाऊँ। हे मेरे प्रभु, मेरी आत्मा को अपने परम सामर्थ्यमय चिन्हों से उल्लसित कर दे और मुझे मेरी भ्रष्ट और अधम इच्छाओं के घेरे से बाहर निकाल। तब मेरे लिये इस लोक और परलोक के समस्त शुभ मंगल का विधान कर। जो तू चाहे वह करने की सामर्थ्य है तुझमें। तुझ सर्वमहिमावान के अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, जिसकी सहायता की कामना सभी मानव करते हैं।

मैं धन्यवाद देता हूँ तुझे, हे मेरे प्रभु! कि तूने मुझे मेरी निद्रा से जगाया और मुझे गतिमान कर दिया है और मेरे अंदर वह देख पाने की कामना जगाई है जिसे समझने में तेरे अधिकतर सेवक विफल रहे हैं। इसलिये, हे मेरे नाथ, अपने प्रेम और प्रसन्नता के लिये तेरी जो भी कामना है, वह देखने योग्य मुझे बना। तू वह है जिसकी सामर्थ्य और प्रभुसत्ता की शक्ति की समस्त वस्तुएँ साक्षी हैं।

तू सर्वशक्तिमान, कल्याणकारी है; तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है !

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8231 (bpn8231)

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उस स्वामी के नाम पर! उस सृष्टिकर्ता, सम्प्रभु, परिपूरक, परम उदात्त के नाम पर, जिसकी सहायता की याचना सभी मनुष्य करते हैं, कहोः ”हे मेरे ईश्वर! तू, जो सभी स्वर्गों और धरती का रचयिता है, हे दिव्य साम्राज्य के स्वामिन्! तू अच्छी तरह मेरे हृदय के रहस्यों को जानता है, जबकि तेरा अस्तित्व तेरे अतिरिक्त अन्य सभी के ज्ञान से परे है। जो भी है मेरा, वह सब तू देखता है, जबकि तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ऐसा कर नहीं सकता है। अपने अनुग्रह के द्वारा मेरे लिये वह प्रदान कर जो मुझे तेरे सिवा अन्य सबसे स्वाधीन होने के योग्य बना दे। वर दे कि मैं इहलोक और परलोक में अपने जीवन के सुफल प्राप्त करूँ। मेरे सम्मुख अपने अनुग्रह के द्वार खोल दे और कृपापूर्वक मुझे अपनी स्नेहिल दया और वरदानों से विभूषित कर।

हे तू, जो असीम अनुकम्पाओं का स्वामी है। जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपनी स्वर्गिक सहायता से आवृत कर और हमें अपने उपहारों और अक्षय सम्पदाओं का दान दे। तू हमारे लिये परिपूरक बन। हमारे पापों को क्षमा कर दे और हम पर दया कर।

तू ही हमारा स्वामी और सभी सृजित वस्तुओं का स्वामी है। हम तेरे अतिरिक्त अन्य किसी की आराधना नहीं करते और तेरे अतिरिक्त अन्य किसी के अनुग्रहों की कामना नहीं करते। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सर्वसम्पन्न, सर्वोच्च!

हे मेरे स्वामी, अपने दिव्य संदेशवाहकों पर, उन पावन और सदाचारी जनों पर अपने आशीषों की वर्षा कर। सत्य ही तू परमेश्वर है, अद्वितीय, सर्ववशकारी।

– Báb

Prayer bpn8224 (bpn8224)

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हे परमेश्वर! मैं तेरी शरण में आना चाहता हूँ, मैं तेरे सभी चिन्हों की ओर अपना हृदय केन्द्रित करता हूँ, हे नाथ! चाहे मैं यात्रा पर रहूँ या घर पर, रहूँ अपने व्यवसाय अथवा अपने काम पर; मैं अपना पूरा भरोसा तुझमें ही रखता हूँ। अतः, हे अपरिमेय करुणा के स्वामी! मुझे भरपूर सहायता प्रदान कर, जिससे मैं सबसे स्वतंत्र हो जाऊँ। हे तू, जो असीम कृपा का स्वामी है!

हे नाथ ! अपनी प्रसन्नता के अनुसार मुझको मेरा अंश प्रदान कर और ऐसा कर दे कि जो भी तू मेरे लिये नियत करे मैं उसमें ही संतुष्ट रहूँ।

आदेश देने का पूरा अधिकार तेरा ही है।

– Báb

Prayer bpn8225 (bpn8225)

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हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! सभी वस्तुओं से अनासक्ति के मेरे प्याले को भर दे और अपनी भव्यता और दानशीलता के कारण प्रेम की मदिरा से मुझे उल्लसित कर दे, मुझे वासनाओं और कामनाओं के आघातों से मुक्त कर, मेरी इन सांसारिक बेड़ियों को तोड़ डाल, परम आनन्द के साथ मुझे अपने अलौकिक लोक में ले चल और अपनी सेविकाओं के बीच मुझे अपनी पावनता की सांसों से नवस्फूर्ति दे।

अपने आशीषों के प्रकाश से मेरे मुखड़े को दीप्तिमान कर, अपनी सर्वसमर्थ शक्ति के दर्शन से मेरे नेत्रों को नवज्योति प्रदान कर और अपने उस ज्ञान के द्वारा, जो सर्वसम्पूर्ण है, मुझे आह्लादित कर दे। हे तू, इस लोक और परलोक के साम्राज्य के राजाधिराज! हे तू प्रभुसत्ता और शक्ति के स्वामी! मेरी आत्मा को नवस्फूर्ति प्रदान करने वाले महान आनन्द के शुभ समाचारों से मुझे आनन्द विभोर कर दे, ताकि मैं तेरे प्रतीकों और तेरी शिक्षाओं का प्रसार दूर-दूर तक कर सकूँ, तेरे विधानों का पालन कर सकूँ और तेरी वाणी को यशस्वी बना सकूँ।

तू निश्चय ही शक्तिशाली, सदा देने वाला, सुयोग्य, सर्वशक्तिमान है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8228 (bpn8228)

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हे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! तू मेरी आशा और मेरा प्रियतम, मेरा सर्वोच्च लक्ष्य और मेरी कामना है! अत्यन्त विनीत भाव से और सम्पूर्ण समर्पण के साथ मैं तूझसे याचना करता हूँ, मुझे अपनी धरती पर अपने प्रेम की एक मीनार बना, अपने प्राणियों के बीच अपने ज्ञान का एक दीप बना और अपने साम्राज्य में अपनी दिव्य कृपा की ध्वजा बना दे। मुझे ऐसे सेवकों में गिन जिन्होंने स्वयं को तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे अनासक्त कर लिया है, स्वयं को तेरे इस संसार की क्षणभंगुर वस्तुओं से पवित्र कर लिया है और अपने आपको निरर्थक, कपोल कल्पनाओं की दुहाई देने वालों के इशारों से मुक्त कर लिया है। अपने लोक की चेतना की सम्पुष्टि के द्वारा मेरे हृदय को आनन्दविभोर हो जाने दे और अपनी सर्वशक्तिमय महिमा के साम्राज्य से मुझ पर निरन्तर बरसने वाली दिव्य सहायता के समूहों के दर्शन से मेरे नेत्रों को दीप्तिमान कर दे।

तू सत्य ही, सर्वसामर्थ्यशाली, सर्वमहिमामय, सर्वशक्तिमंत है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8229 (bpn8229)

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अहमद की पाती

अहमद की पाती

वह दिव्य सम्राट है, सर्वज्ञाता, सर्वबुद्धिमान ! देखो, बैकुंठ -कोकिला अनन्त तरुवर की टहनियों पर पावन और मधुर स्वर में गा रही है, परमेश्वर की निकटता का शुभ संदेश भक्तजनों को सुना रही है, दिव्य एकता के नाम पर प्रभुभक्तों को परम कृपालु परमेश्वर के सान्धिय में बुला रही है, दु;खी हताश जनों को उस परम महिमाशाली, अद्वितीय सम्राट का संदेश सुना रही है, प्रभु-प्रेमियों को पवित्रता के आसन और इस देदीप्यमान सौन्दर्य की राह दिखला रही है |

वस्तुत; यह वह परम महान सौन्दर्य है जिसकी भविष्यवाणियाँ अवतारों के ग्रंथों में की गई हैं और जिसके द्वारा सत्य और असत्य का अन्तर स्पष्ट होगा और प्रत्येक आदेश की बुद्धिमता प्रमाणित की जायगी | वस्तुत; यह वह दिव्य जीवन-वृक्ष है जो सर्वोच्च, सर्वशक्तिमान, सर्वोपरि परमेश्वर के फल देता है |

हे अहमद, तू इसका साक्षी बन कि वही ईश्वर है और उसके अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, सम्राट, रक्षक, अतुलनीय, सर्वसमर्थ ! और प्रभु ने जिसे अली (बाब) के नाम से अवतरित किया, सत्यमेव वह परमेश्वर की ओर से ही आये थे, जिनके आदेशों का हम सभी पालन कर रहे हैं |

कहो, हे लोगों ! प्रभु के उन विधानों के प्रति आज्ञाकारी बनो, जो ‘बयान’ में उस प्रतापशाली सर्वबुद्धिमान द्वारा आदेशित हैं | सत्य ही, वह अवतारों का सम्राट है ओर उसका पवित्र ग्रंथ मातृग्रंथ है | काश ! तुम यह जान पाते |

इस कारावास से दिव्य कोकिला प्रभु का यही आह्वान तुम्हें सुना रहीहैं | उसे तो बस यह स्पष्ट सन्देश देना है- जो भी चाहे उसे इस सन्देश से विमुख होने दो और जो चाहे उसे अपनाने दो प्रभु का पथ | हे लोगों ! यदि तुम इन श्लोकों को अस्वीकार करते हो तो किस प्रमाण के द्वारा तुमने परमेश्वर में अपनी आस्था दिखलाई है, इसे बतलाओ, हे मिथ्याचारियों के समूह !

नहीं, जिसके हाथों में मेरी आत्मा है उस परमात्मा की सौगंध ! वे सब मिलकर भी यदि एक दूसरे की सहायता करने लगें तब भी वे ऐसा करने में समर्थ नहीं हो पायेंगे |

हे अहमद ! मेरी अनुपस्थिति में मेरी अनुकम्पाओं को न भूल और अपने जीवन में दूरस्थ कारावास के इन दु:ख भरे दिनों और निष्कासन को याद रख | तू मेरे प्रेम में इतना अटल बन कि यदि तुझ पर शत्रुओं कि तलवारों के प्रहार भी बरसने लगें और समस्त पृथ्वी स्वर्ग की सभी शक्तियाँ भी तेरे विरुद्ध उठ खड़ी हो जायें, तब भी तेरा ह्रदय शंका से विचलित न हो | मेरे शत्रुओं के लिये तू अग्नि की ज्वाला बन और मेरे प्रियजनों के लिये अनन्त जीवन की सरिता बन जा और उनमें से न बन जो संदेह करते हैं | और यदि मेरी राह में तुझको घेर ले संकट या मेरे कारण तुझे सहन करना पड़े अनादर तो उनसे मत घबरा |

प्रभु, अपने पूर्वजों के प्रभु में विश्वास रख | लोग मिथ्या संदेह की राह में भटक रहे हैं, विवेक से हीन वे अपनी आँखें से ईश्वर के दर्शन कर पाने में असमर्थ हैं अथवा अपने कानों से उसकी दिव्य वाणी को नहीं सुन पाते | हमने उन्हें ऐसा ही पाया है, जिसका तू साक्षी है | इस प्रकार उनके अंधविश्वास उनके तथा उनके स्वयं के अंत;करण के बीच आवरण बन गये हैं, जिससे वे सर्वोच्च सर्वोपरि ईश्वर के मार्ग से दूर हो गये हैं |

तू इसे सत्य मान कि जो भी इस सौन्दर्य से विमुख होता है, वह अतीत के अवतारों से भी विमुख हो जाता है और अनन्तकाल तक परमेश्वर के प्रति अंहकार दिखाता है |

हे अहमद, इस पाती को कंठस्थ कर ले | अपने दिनों में तू इसे मधुर स्वर से गा और अपने आपको इससे विमुख न कर | इसका पाठ करने वालों के लिये परमात्मा ने प्रभुधर्म में अपने प्राणों का बलिदान करने वाले सौ शहीदों का कर्मफल तथा इहलोक और परलोक में सेवा का पुरस्कार निर्धारित किया है | ये अनुकम्पाएं हमने अपनी दयालुता तथा कृपालुता के परिणामस्वरूप प्रदान की हैं ताकि तू उनमें से बन सके जो हमारे प्रति कृतज्ञ हैं |

प्रभु की सौगध ! यदि कोई दु;खी व्यक्ति इस पाती का पूर्व निष्ठा से पाठ करे तो निश्चय ही प्रभु उसके दु;ख दूर करेगा, उसकी समस्याओं का समाधान करेगा और उसके कष्टों को हर लेगा |

वस्तुत; वह दयालु, कृपालु है, सर्वलोकों के उस स्वामी की जय हो !

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn6861 (bpn6861)

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वह दिव्य सम्राट है, सर्वज्ञाता, सर्वबुद्धिमान! देखो, बैकुंठ-कोकिला अनन्त तरुवर की टहनियों पर पावन और मधुर स्वर में गा रही है, परमेश्वर की निकटता का शुभ संदेश भक्तजनों को सुना रही है, दिव्य एकता के नाम पर प्रभुभक्तों को परम कृपालु परमेश्वर के सान्निध्य में बुला रही है, दुःखी हताश जनों को उस परम महिमाशाली, अद्वितीय सम्राट का संदेश सुना रही है, प्रभु-प्रेमियों को पवित्रता के आसन और इस देदीप्यमान सौन्दर्य की राह दिखला रही है।

वस्तुतः, यह वह परम महान् सौन्दर्य है जिसकी भविष्यवाणियाँ अवतारों के ग्रंथों में की गई हैं और जिसके द्वारा सत्य और असत्य का अन्तर स्पष्ट होगा और प्रत्येक आदेश की बुद्धिमता प्रमाणित की जायगी। वस्तुतः यह वह दिव्य जीवन-वृक्ष है जो सर्वोच्च, सर्वशक्तिमान, सर्वोपरि परमेश्वर के फल देता है।

हे अहमद, तू इसका साक्षी बन कि वही ईश्वर है और उसके अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, सम्राट, रक्षक, अतुलनीय, सर्वसमर्थ! और प्रभु ने जिसे अली (बाब) के नाम से अवतरित किया, सत्यमेव वह परमेश्वर की ओर से ही आये थे, जिनके आदेशों का हम सभी पालन कर रहे हैं।

कहो, हे लोगों! प्रभु के उन विधानों के प्रति आज्ञाकारी बनो, जो ’बयान‘ में उस प्रतापशाली सर्वबुद्धिमान द्वारा आदेशित हैं। सत्य ही, वह अवतारों का सम्राट है और उसका पवित्र ग्रंथ मातृग्रंथ है। काश! तुम यह जान पाते।

इस कारावास से दिव्य कोकिला प्रभु का यही आह्वान तुम्हें सुना रही है। उसे तो बस यह स्पष्ट संदेश देना है - जो भी चाहे उसे इस संदेश से विमुख होने दो और जो चाहे उसे अपनाने दो प्रभु का पथ। हे लोगों! यदि तुम इन श्लोकों को अस्वीकार करते हो तो किस प्रमाण के द्वारा तुमने परमेश्वर में अपनी आस्था दिखलाई है, इसे बतलाओ, हे मिथ्याचारियों के समूह!

नहीं, जिसके हाथों में मेरी आत्मा है उस परमात्मा की सौगंध! वे सब मिलकर भी यदि एक दूसरे की सहायता करने लगे तब भी वे ऐसा करने में समर्थ नहीं हो पायेंगे।

अहमद की पाती हे अहमद! मेरी अनुपस्थिति में मेरी अनुकम्पाओं को न भूल और अपने जीवन में मेरे दूरस्थ कारावास के इन दुःख भरे दिनों और निष्कासन को याद रख। तू मेरे प्रेम में इतना अटल बन कि यदि तुझ पर शत्रुओं की तलवारों के प्रहार भी बरसने लगें और समस्त पृथ्वी तथा स्वर्ग की सभी शक्तियाँ भी तेरे विरूद्ध उठ खड़ी हो जायें, तब भी तेरा हृदय शंका से विचलित न हो। मेरे शत्रुओं के लिये तू अग्नि की ज्वाला बन और मेरे प्रियजनों के लिये अनन्त जीवन की सरिता बन जा और उनमें से न बन जो संदेह करते हैं। और यदि मेरी राह में तुझको घेर ले संकट या मेरे कारण तुझे सहन करना पड़े अनादर तो उनसे मत घबरा।

प्रभु, अपने पूर्वजों के प्रभु में विश्वास रख। लोग मिथ्या संदेह की राह में भटक रहे हैं, विवेक से हीन वे अपनी आँखों से ईश्वर के दर्शन कर पाने में असमर्थ हैं अथवा अपने कानों से उसकी दिव्य वाणी को नहीं सुन पाते। हमने उन्हें ऐसा ही पाया है, जिसका तू साक्षी है। इस प्रकार उनके अंधविश्वास उनके तथा उनके स्वयं के अंतःकरण के बीच आवरण बन गये हैं, जिससे वे सर्वोच्च सर्वोपरि ईश्वर के मार्ग से दूर हो गये हैं।

तू इसे सत्य मान कि जो भी इस सौन्दर्य से विमुख होता है, वह अतीत के अवतारों से भी विमुख हो जाता है और अनन्तकाल से अनन्तकाल तक परमेश्वर के प्रति अहंकार दिखाता है।

हे अहमद, इस पाती को कंठस्थ कर ले। अपने दिनों में तू इसे मधुर स्वर से गा और अपने आपको इससे विमुख न कर। इसका पाठ करने वालों के लिये परमात्मा ने प्रभुधर्म में अपने प्राणों का बलिदान करने वाले सौ शहीदों का कर्मफल तथा इहलोक और परलोक में सेवा का पुरस्कार निर्धारित किया है। ये अनुकम्पाएँ हमने अपनी दयालुता तथा कृपालुता के परिणामस्वरूप प्रदान की हैं ताकि तू उनमें से बन सके जो हमारे प्रति कृतज्ञ हैं।

प्रभु की सौंगध! यदि कोई दुःखी व्यक्ति इस पाती का पूर्ण निष्ठा से पाठ करे तो निश्चय ही प्रभु उसके दुःख दूर करेगा, उसकी समस्याओं का समाधान करेगा और उसके कष्टों को हर लेगा।

वस्तुतः वह दयालु, कृपालु है, सर्वलोकों के उस स्वामी की जय हो!

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8745 (bpn8745)

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आध्यात्मिक गुण

अपनी अनन्तता की सुवासित जलधाराओं में से मुझे पान करने दे, हे मेरे परमेश्वर! और अपने अस्तित्व के वृक्ष के फलों का आस्वाद लेने योग्य मुझे बना, हे मेरी आशा! अपने प्रेम के स्फटिक निर्मल झरनों से घूंट भरने के अवसर दे मुझे, हे मेरी महिमा! और अपने अनन्त मंगल विधान की छत्रछाया में मुझे विश्राम करने दे, हे मेरी ज्योति! अपनी निकटता के उपवन में, अपने सान्निध्य में, मुझे विश्राम करने योग्य बना, हे मेरे प्रियतम! और अपने सिंहासन की दाहिनी भुजा पर मुझे बैठा, हे मेरी कामना अपने उल्लास के सुवासित झकोरों का एक झोंका मुझ पर से बह जाने दे, हे मेरे लक्ष्य! अपने सत्य के स्वर्ग की ऊँचाइयों में मुझे प्रवेश पाने दे, हे मेरे आराध्य! अपनी एकता की दिव्य कोकिला की मधुर रागिनी को सुन पाने का अवसर दे मुझे, हे देदीप्यमान प्रभु! अपनी शक्ति और सामर्थ्य की चेतना से मुझे अनुप्राणित कर दे, हे मेरे विश्वम्भर! अपने प्रेम में मुझे अटल बना, हे मेरे सहायक! और अपनी सुप्रसन्नता के पथ में मेरे पगों को अडिग रख, हे मेरे स्रष्टा! अपनी अमरता के उपवन में, अपने मुखारविन्द के सम्मुख सदा निवास करने दे मुझे, हे तू जो सदासर्वदा मुझ पर दयालु है! और अपनी महिमा के आसन पर मुझे प्रतिष्ठित कर, हे तू, जो मेरा स्वामी है! अपनी प्रेममयी कृपा के स्वर्ग तक मुझे उड़ान भरने दे, हे मेरे जीवनाधार! और अपने मार्गदर्शन के सूर्य से मेरा पथ आलोकित कर, हे मनमोहन! अपनी अदृश्य चेतना से मेरा साक्षात्कार करा, हे तू जो मेरा उद्गम है और है मेरी सर्वोपरि इच्छा; और अपने सौन्दर्य की सुरभि के सार तक मुझे लौटने दे, हे तू जो मेरा ईश्वर है!

तुझे जो प्रिय है, वह करने में तू समर्थ है। तू, सत्य ही, परम उदात्त, सर्वमहिमामय, सर्वोच्च है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8275 (bpn8275)

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मुझे एक निर्मल हृदय प्रदान कर, हे मेरे ईश्वर, और मुझमें एक प्रशांत अंतश्चेतना को नवरूप दे, हे मेरी आशा! अपनी शक्ति के सहारे मुझे अपने धर्म में दृढ़ कर, हे मेरे परम प्रियतम, और अपनी महिमा के प्रकाश से मेरे समक्ष अपना पथ आलोकित कर, हे तू, जो मेरी आकांक्षा का लक्ष्य है! अपनी सर्वातीत शक्ति के सहारे अपनी पावनता के स्वर्ग तक उड़ान भरने दे, हे मेरे अस्तित्व के आधार और अपनी चिरंतनता के पवन-झकोरों से मुझे आनन्दित कर दे, हे तू, जो मेरा परमेश्वर है! अपने सदाबहार संगीत से मेरे मन-प्राण को मुग्ध हो जाने दे, हे मेरे सखा, अपने सनातन रूप के दर्शन करा कि मै तेरे सिवा सब कुछ भूल जाऊँ, हे मेरे स्वामी! और अपनी पावन दिव्य सुरभि के संचरित होने के सुसमाचार से मुझे आनन्दित कर दे, हे तू जो प्रकट में सर्वाधिक प्रकट और गुह्य में सर्वाधिक गुह्य है !

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8276 (bpn8276)

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वह अनुकम्पामय है, है सब कुछ देने वाला! हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तेरी पुकार ने मुझे अपनी ओर बुलाया है और तेरी महिमा की महालेखनी ने मुझे जगाया है। तेरे पावन वचन के निर्झर ने मुझे आनन्दविभोर कर दिया है और तेरी प्रेरणा की मदिरा ने मुझे भावशून्य कर दिया है। हे प्रभु! तू देखता है मुझे, तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे विरक्त, तेरे आशीषों की डोर से बंधा और तेरी अनुकम्पा के चमत्कारों के लिये आकुल मन-प्राण लिये, तेरी स्नेहसिक्त कृपा के उमड़ते सागर और तेरे संरक्षण के दमकते प्रकाश के नाम पर मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तू ऐसा वर दे जो मुझे तेरे समीप ले जाये और तेरे नाम-रत्न का धनी बना दे। मेरी जिह्वा, मेरी लेखनी, मेरा तन-मन तुम्हारी शक्ति, तुम्हारी सामर्थ्य, तुम्हारी अनुकम्पा और तुम्हारी कृपा का प्रमाण दे रहे हैं कि तू ही है ईश्वर और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, शक्तिसम्पन्न, सामर्थ्यवान।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8277 (bpn8277)

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हे मेरे प्रभु, मैं इस क्षण साक्षी देता हूँ अपनी निरीहता और तेरी सर्वोपरि सत्ता, अपनी दुर्बलता और तेरी शक्तिमयता की। मैं नहीं जानता कि मेरे लिये क्या है लाभकारी और क्या है हानिकर। तू, सत्य ही, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है। हे मेरे परमेश्वर, मेरे नाथ, तू मेरे लिये उसका विधान कर जो मुझे तेरे चिरंतन आदेश में संतुष्टि की अनुभूति कराये और मुझे तेरे हर लोक में समृद्धि दिलाये। तू, सत्य ही, दयालु है, और है दानशील।

हे नाथ! मुझे अपनी सम्पदा और अपनी कृपा के महासागर से दूर मत हटा और मेरे लिये इस लोक और परलोक के शुभ-मंगल का विधान कर। वस्तुतः, तू दया के परमोच्च सिंहासन का स्वामी है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ!

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8278 (bpn8278)

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हे मेरे नाथ! अपने सौंदर्य को मेरा आहार, अपनी समीपता को मेरा जीवन-जल, अपनी सुप्रसन्नता को मेरी आशा, अपनी स्तुति को मेरा दैनिक कर्म, अपने स्मरण को मेरा संगी, अपनी सम्प्रभुता की शक्ति को मेरा सहायक, अपने निवास को मेरा नीड़ और अपने उस स्थान को मेरा निवास बना जहाँ वैसे लोगां का प्रवेश वर्जित है जो एक पर्दे के कारण तुमसे दूर हैं।

तू सत्य ही, परम सामर्थ्यमय, सर्वमहिमामय, परम शक्तिशाली है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8279 (bpn8279)

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जयघोष हो तेरे नाम का, हे प्रभु, मेरे ईश्वर! मैं तेरा वह सेवक हूँ जिसने तेरी करुणामयी दया की डोर को थामा है और जो तेरी असीम दानशीलता के आंचल से लिपटा हुआ है। तेरे उस नाम पर जिसके द्वारा तूने सृष्टि की सभी दृश्य और अदृश्य वस्तुओं को अपने अधीन किया है और जिसके द्वारा यह सांस, जो वस्तुतः जीवन ही है, समस्त सृष्टि में प्रवाहित की गई है, मैं याचना करता हूँ कि तू स्वर्गों और धरा को आवृत करने वाली अपनी शक्ति से मुझे सबल बना और सभी रोगों और विपदाओं से मेरी रक्षा कर। मैं साक्षी देता हूँ कि तू ही सभी नामों का स्वामी है और जो तुझे पसंद हो वैसी आज्ञा देने वाला है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सर्वशक्तिशाली, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ!

हे मेरे नाथ! मेरे लिये उसका विधान कर जो तेरे हर लोक मे मेरे लिये मंगलकारी हो। और तब मेरे लिये वह भेज जो तूने अपने चुने हुए प्राणियों के लिये निर्धारित किया है : ऐसे प्राणी, जिन्हें न तो दोष लगाने वालों का दोषारोपण, न ही अधर्मियों का शोर और न ही तुझसे विमुख हुए प्राणियों की विरक्ति तुम्हारी ओर उन्मुख होने से रोक सकी है।

अपनी सर्वोपरि सत्ता से, तू सत्य ही, संकट में सहायक है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सर्वशक्तिशाली, परम बलशाली।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8280 (bpn8280)

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हे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! यह तेरा सेवक तेरी ओर बढ़ चला है। तेरी सेवा के पथ में विचरण कर रहा है। तेरी अक्षय सम्पदाओं की आशा करते हुए तेरे साम्राज्य पर भरोसा रखे हुए और तेरे वरदानों की मदिरा से मदमस्त होकर तेरे प्रेम के मरुस्थल में भावना के उन्माद में भटक रहा है, तेरे अनुग्रहों की अपेक्षा रखे हुए। हे मेरे ईश्वर! तेरे प्रति अनुराग की उसकी प्रचंडता को, तेरी स्तुति की इस निरंतरता को और तेरे प्रति प्रेम की प्रखरता को बढ़ा दे।

निश्चय ही तू परम उदार भरपूर कृपा का प्रभु है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है। क्षमाशील, दयामय।

– Abdu’l-Bahá

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हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! अपने प्रियजनों को अपने धर्म में अडिग रहने, अपने पथ पर चलने और प्रभुधर्म में अटल रहने में सहायता कर; अहम् और आवेग को दमित करने की शक्ति प्रदान कर ताकि वे दिव्य मार्गदर्शन के पथ का अनुसरण कर सकें। तू शक्तिशाली, महिमावान, स्वयंजीवी, दाता, दयालु, सर्वसमर्थ और सर्वप्रदाता है।

– Abdu’l-Bahá

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आध्यात्मिक सभा

(जब भी तुम परामर्श के लिये सभाकक्ष में प्रवेश करो, तो प्रभु-प्रेम से छलकते हृदय से और मात्र उसके स्मरण के अतिरिक्त अन्य सब कुछ से मुक्त हुई जिह्वा से इस प्रार्थना का पाठ करो, जिससे कि वह सर्वशक्तिमान विजय प्राप्त करने में अनुग्रहपूर्वक तुम्हारी सहायता करे।)

हे तू दिव्य साम्राज्य के स्वामी! हमारे शरीर यहाँ एकत्र हैं अवश्य, लेकिन मंत्रमुग्ध हैं हम, हर लिया है हमारे मन-प्राण को तुम्हारे प्रेम ने; हम तेरे कांतिमय मुखड़े से आनन्द विभोर हो उठे हैं। भले ही हम दुर्बल हैं, किन्तु तेरे मार्गदर्शन के तेज और तेरी शक्ति की प्रेरणा की प्रतीक्षा करते हैं। भले ही हम दरिद्र हैं, सम्पत्ति और साधन से हैं हीन, फिर भी हम तुम्हारे दिव्य साम्राज्य की निधियों से समृद्धि पाते हैं। भले ही हम हैं बूंद भर, फिर भी तेरे महासिंधु की अतल गहराइयों से हम अपना भाग ग्रहण करते हैं! हम धूलकण हैं सही, फिर भी, तेरे भव्य सूर्य की महिमा से कांति पाते हैं। हे पालनहार प्रभु! अपनी सहायता भेज, ताकि यहाँ एकत्रित हर व्यक्ति एक प्रकाशित दीप बन जाये, हर एक बन जाये आकर्षण का केन्द्रबिन्दु और तुम्हारे स्वर्गिक आंगन मंे बुलाने वाला हरकारा बन जाये, ताकि हम इस अधम संसार को तुम्हारे स्वर्ग का दर्पण बना सकें।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8281 (bpn8281)

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(आध्यात्मिक सभा की बैठक की समाप्ति पर यह प्रार्थना करें)

हे ईश्वर! हे परमेश्वर! अपनी एकता के अदृश्य साम्राज्य से तू देखता है कि तुझमें पूरी आस्था, तुम्हारे चिन्हों में पूरे विश्वास के साथ और तुम्हारी संविदा और इच्छा के प्रति अडिग होकर, तुम्हारे प्रति आकर्षित होकर, तुम्हारे प्रेम की अग्नि से दीप्त, तुम्हारे धर्म के प्रति निष्ठावान बन हम इस आध्यात्मिक सभा में एकत्रित हुए हैं। हम तुम्हारी बगिया के सेवक हैं, तुम्हारे धर्म के प्रसारक, तुम्हारे मुखारबिंदु के प्रति समर्पित साधक, तुम्हारे प्रियजनों के प्रति विनम्र, तुम्हारे द्वार पर नतमस्तक हैं और तुमसे याचना करते हैं कि अपने प्रियजनों की सेवा करने के अवसर दे, शक्ति दे कि हम तेरी आराधना कर सकें, तेरे प्रति समर्पित रह सकें और तुझसे संलाप कर सकें। हे हमारे स्वामी! हम दुर्बल हैं, तू है सबल; हम प्राणविहीन हैं, तू है प्राणाधार चेतना; हम अभावों से भरे हैं, तू है दाता, रक्षक शक्तिशाली। हे हमारे स्वामी! अपने कृपालु मुखारविन्द की ओर हमें उन्मुख कर, अपनी असीम कृपा से, अपने स्वर्गिक सहभोज में हमें सम्मिलित कर, अपने सर्वोपरि देवदूतों द्वारा हमें सहायता दे और आभालोक के साम्राज्य के पावन जनों के द्वारा हमारी सेवा को स्वीकार कर। सत्य ही, तू उदार और कृपालु है; अक्षय सम्पदाओं का स्वामी है। सत्य ही, तू क्षमाशील और करुणामय है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8282 (bpn8282)

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हे परमेश्वर, मेरे प्रभु! हम तेरे वे ही सेवक हैं जो भक्तिपूर्वक तेरे पावन मुखड़े की ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने इस महिमामय युग में तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अपने आपको अनासक्त कर लिया है। हम इस आध्यात्मिक सभा में अपने विचारों और चिन्तन में एक बनकर उपस्थित हुए हैं और मानवजाति के बीच तेरी वाणी का यशोगान करने के लिये हमारे उद्देश्य एक हो गये हैं। हे प्रभु, हमारे परमेश्वर! हमें अपने दिव्य मार्गदर्शन के प्रतीक चिन्ह, मनुष्यों के बीच अपने उदात्त धर्म की ध्वजाएँ और अपनी सशक्त संविदा के सेवक बना, हे हमारे परमोच्च प्रभु ! हमें अपने आभा लोक में अपनी दिव्य एकता के मूर्त्त रूप और सभी देशों-प्रदेशों पर जगमगाने वाले सितारे बना। प्रभो! हमें अपनी अद्भुत कृपा की विराट तरंगों से प्रवाहित होने वाली सरितायें, अपनी दिव्य धर्म के तरूवर पर फलने वाले सुफल और स्वर्गिक उपवन में अपनी कृपा के समीर से झूमने वाले तरूवर बना। हे परमेश्वर! हमारी आत्माओं को अपनी दिव्य एकता के छन्दों पर आश्रित कर दे, हमारे हृदयों को अपनी अनुकम्पा की बरखा से उल्लसित कर दे, जिससे कि हम समुद्र की तरंगों के समान एक दूसरे में समा जायें, कि हमारे चिन्तन, हमारे विचार, हमारी अनुभूतियाँ एक ही सत्य का रूप ले लें, जो सम्पूर्ण विश्व में एकता की भावना को मूर्त्त करे। तू कृपालु, परम सम्पदामय, वरदाता, सर्वसामर्थ्यवान, दयामय, करूणामय है।

Abdu’l-Baha

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8284 (bpn8284)

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आरोग्य

स्तुत्य है तू, हे मेरे नाथ! मेरे परमेश्वर! मैं याचना करता हूँ तुझसे, तेरे उस महान नाम के द्वारा जिससे तूने अपने सेवकों को सक्रिय बनाया है और अपने नगरों का निर्माण किया है; तेरी परम श्रेष्ठ उपाधियों के द्वारा और तेरे पावन गुणों के द्वारा मैं याचना करता हूँ तुझसे कि अपने इन सेवकों की सहायता कर ताकि ये तेरी बहुमुखी उदारता की ओर ध्यान केन्द्रित कर तेरी प्रज्ञा के वितानों की ओर उन्मुख हो सकें। उन रोगों को दूर कर जिन्होंने मानवात्माओं को हर दिशा से आक्रांत किया है और सबको अपनी छत्रछाया देने वाले तेरे उस नाम के आश्रय में स्थित स्वर्ग की ओर देखने में बाधा दी है। वह नाम जिसे तूने उस स्वर्ग और इस धरती पर विद्यमान सभी के लिये नामों का सम्राट होने का विधान किया है। तू जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ है, तेरे हाथों में सभी नामों का साम्राज्य है, तेरे अतिरिक्त कोई दूसरा परमेश्वर नहीं है, सामर्थ्यशाली, प्रज्ञामय।

मैं एक दीन-हीन प्राणी हूँ। हे मेरे नाथ, मैं तेरी सम्पदाओं से जुड़ा हूँ। मैं रुग्ण हूँ, मैं तेरी आरोग्यदायी शक्ति की डोर को कस कर पकड़े हुए हूँ, मुझे सभी ओर से घेरे हुए इन रोगों से मुक्त कर और मुझे अपनी अनुकम्पा और दया के जल से पूरी तरह से निर्मल कर दे। अपनी क्षमाशीलता और अक्षय सम्पदाओं के द्वारा मुझे अपने अतिरिक्त अन्य सबकी आसक्ति से छुटकारा दे। तेरी जैसी इच्छा हो वैसा करने में और जिससे तुझे प्रसन्नता हो उसे पूरा करने में सहायता दे। तू सत्य ही, इस जीवन का और अगले जीवन का स्वामी है। तू सत्य ही सदा क्षमाशील, परम दयामय है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8287 (bpn8287)

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हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं तुझसे तेरी आरोग्यदायी शक्ति के उस महासिंधु के नाम पर और तेरे अनुग्रह के उस दिवानक्षत्र के प्रभापुंजों के नाम पर और तेरे उस नाम पर जिसके द्वारा तूने अपने सेवकों को अपने अधीन किया है और तेरे उस परमोच्च शब्द की सर्वव्यापी शक्ति के नाम पर, और तेरी इस परम उदात्त लेखनी की शक्ति के नाम पर और तेरी उस दया के नाम पर जो स्वर्ग और धरती पर विद्यमान सब की सृष्टि से पहले उद्भूत हुई थी, तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे अपनी कृपा के जल से सभी व्याधियों, रोगों, सभी निर्बलता और दुर्बलता से मुक्त कर दे।

देखता है तू, हे मेरे स्वामिन्, अपने इस आराधक को तेरी अक्षय सम्पदाओं के द्वार पर राह देखते हुए और तेरी उदारता की डोरी थाम आस लगाये हुए। मैं अनुनय करता हूँ तुझसे कि उसे उन वस्तुओं से वंचित मत कर जिन्हें वह तेरी कृपा के महासिंधु और तेरी स्निग्ध कृपालुता के दिवानक्षत्र से मांगता है।

तू जैसा चाहे करने में सशक्त है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सदा क्षमाशील, परम उदार।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8288 (bpn8288)

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(आरोग्य के लिये जिन प्रार्थनाओं को प्रकट किया गया है, वे शारीरिक और आध्यात्मिक, दोनो प्रकार से निरोग रहने के लिये हैं। इसलिये, आत्मा और शरीर के स्वास्थ्य लाभ के लिये ये प्राथनाएँ की जानी चाहिये।)

तेरा नाम ही मेरा आरोग्य है, हे मेरे ईश्वर! तेरा स्मरण ही मेरी औषधि है। तेरा सामीप्य ही मेरी आशा, तेरा प्रेम ही मेरा सहचर है। मुझ पर तेरी अनुकम्पा ही मेरी निरोगता है और इहलोक तथा परलोक दोनों में मेरी आपद सहायक है। वस्तुतः, तू ही है सर्वप्रदाता, सर्वज्ञ एवं सर्वप्रज्ञ।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8286 (bpn8286)

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आरोग्य के लिये लम्बी प्रार्थना

Long healing Prayer

वह है रोगनिवारक, वही है परिपूरक सहायक, क्षमाशील, सर्वकरुणामय !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परम महान !

हे निष्ठावान, हे गरिमावान, तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सम्राट, हे उन्नतिदाता, हे न्यायकर्ता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे अनुपम, हे अनन्त, हे एकमेव ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परम प्रशंसित, हे पावन हे सहायक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, सर्वदर्शी, हे महाप्रज्ञ, हे परम महान ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सौम्य, हे भव्य, हे निर्णायक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे प्रियतम, हे चिरवांछित, हे परमानन्द ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परम शक्तिमंत, हे प्राणाधर, हे सामर्थ्यवान ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे अधिनायक, हे स्वयंजीवी, हे सर्वज्ञ | तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे चेतना, हे प्रकाश, हे परम प्रत्यक्ष ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सर्वसुलभ, हे सर्वज्ञात, हे सर्वनिगूढ़ ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे अगोचर, हे विजेता, हे वरदाता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सर्वशक्तिमंत, हे सहायक, हे आवरणदाता! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे स्वरूपदाता, हे पालनहार, हे संहारकर्ता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे उदीयमान, हे एकत्रकर्ता, हे उन्नायक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे पूर्णकर्ता, हे अप्रतिबंधित, हे कृपालु ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परोपकारी, हे बंधनकारी, हे सृष्टिकर्ता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परमउदात्त, हे परम सौदंर्य ! तू परम दयालु, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे न्यायशील, हे दयाशील, हे परम उदार ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सर्वबाध्यकारी, हे चिरशाश्वत, हे परम ज्ञाता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे महभव्य , हे युग-प्राचीन, हे महामना ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सुसंरक्षित, हे सच्चिदानन्द, हे मनोवांछित ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सर्वदयालु, हे सर्वकृपालु, हे कल्याणीकारी! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सब केसहायक, हे सबके आहवान ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे प्रकटकर्ता, हे रूद्र, हे परम सौम्य ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे मेरी आत्मा, हे मेरे प्रियमत, हे मेरी आस्था ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे प्यास बुझाने वाले, हे भावातीत प्रभु, हे परम अनमोल ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे महानतम् स्मरण, हे सर्वोत्तम नाम हे प्रचीनतम् मार्ग ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे सर्वाधिक प्रशंसित, हे परम पावन, हे पवित्रम् ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे निबंधक हे परामर्शदाता, हे मुक्तिदाता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे बन्धु, हे अरोग्यदाता, हे सम्मोहक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे प्रताप, हे सौन्दर्य, हे परम कृपालु ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे परम विश्वासी, हे सर्वोत्तम प्रेमी, हे आदित्य! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे ज्योतिदाता, हे दिप्तिदाता , हे आनन्द के संवाहक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे कृपालु प्रभु, हे परम करुणामय, हे परम दयालु ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आहवान करता हूँ तेरा, हे ध्रुव, हे जीवनधार, हे असित्व-मूल ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn6860 (bpn6860)

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आरोग्य के लिये लम्बी प्रार्थना

आरोग्य के लिये लम्बी प्रार्थना

वह है रोगनिवारक, वही है परिपूरक सहायक, क्षमाशील, सर्वकरुणामय !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे परम महान ! हे निष्ठावान, हे गरिमावान, तू परिपूरक,

तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सम्राट, हे उन्नत्तिदाता,

हे न्यायकर्ता ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक,

तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे अनुपम, हेअनन्त,

हे एकमेव ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे परम प्रशंसित, हे पावन, हे सहायक ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक,

तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सर्वदर्शी, हे महाप्रज्ञ,

हे परम महान ! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक,

तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आरोग्य के लिये लम्बी प्रार्थना आह्वान करता हूँ तेरा, हे सौम्य, हे भव्य, हे निर्णायक! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक,तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे प्रियतम्, हे चिरवांछित, हे परमानन्द! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे परम शक्तिमंत, हे प्राणाधर, हे सामथ्र्यवान! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक,तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे अधिनायक, हे स्वयंजीवी, हे सर्वज्ञ। तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन!

आह्वान करता हूँ तेरा, हे चेतना, हे प्रकाश, हे परम प्रत्यक्ष! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सर्वसुलभ, हे सर्वज्ञात, हे सर्वनिगूढ़! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन!

आह्वान करता हूँ तेरा, हे अगोचर, हे विजेता, हे वरदाता! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सर्वशक्तिमंत, हे सहायक, हे आवरणदाता! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे स्वरूपदाता, हे पालनहार, हे संहारकर्ता! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे उदीयमान, हे एकत्रकर्ता, हे उन्नायक! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे पूर्णकर्ता, हे अप्रतिबन्धित, हे कृपालु! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे परोपकारी, हे बंधनकारी, हे सृष्टिकर्ता! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे परम उदात्त, हे परम सौन्दर्य, हे परम दयालु! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे न्यायशील, हे दयाशील,

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8747 (bpn8747)

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हे परम उदार! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सर्वबाध्यकारी, हे चिरशाश्वत, हे परम ज्ञाता! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे महाभव्य, हे युग-प्राचीन, हे महामना! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सुसंरक्षित, हे सच्चिदानन्द, हे मनोवांछित! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सर्वदयालु, सर्वकृपालु, हे कल्याणकारी! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सब के सहायक, हे सबके आह्वान! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन!

आह्वान करता हूँ तेरा, हे प्रकटकर्ता, हे रुद्र, हे परम सौम्य! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे मेरी आत्मा, हे मेरे प्रियतम, हे मेरी आस्था! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे प्यास बुझाने वाले, हे भावातीत प्रभु, हे परम अनमोल! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे महानतम् स्मरण, हे सर्वोत्तम नाम, हे प्राचीनतम् मार्ग! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सर्वाधिक प्रशंसित, हे परम पावन, हे पवित्रतम्! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे निबंधक, हे परामर्शदाता, हे मुक्तिदाता! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे बन्धु, हे आरोग्यदाता, हे सम्मोहक! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे प्रताप, हे सौन्दर्य, हे परम कृपालु! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आरोग्य के लिये लम्बी प्रार्थना आह्वान करता हूँ तेरा, हे परम विश्वासी,

हे सर्वोत्तम प्रेमी, हे आदित्य! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे ज्योतिदाता, हे दीप्तिदाता, हे आनन्द के संवाहक! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे कृपालु प्रभु, हे परम करुणामय, हे परम दयालु! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करताहूँ तेरा, हे ध्रुव, हे जीवनाधार,

हे अस्तित्व-मूल! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक,

तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे सर्वभेदी, हे सर्वदर्शी, हे दिव्यवाणी के स्वामी! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे प्रकट फिर भी निगूढ़, हे अदृश्य फिर भी कीर्तिमान, हे सर्वप्रिय द्रष्टा! तू परिपूरक, तू रोगनिवारक, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन !

आह्वान करता हूँ तेरा, हे प्रेमियों के प्राणहर्ता,

हे दुष्टों पर कृपालु ईश्वर, हे परिपूरक !

आह्वान करता हूँ तेरा, तू चिरन्तन, हे तू चिरन्तन ! आह्वान करता हूँ तेरा, हे चिरन्तन !

पावन है, तू है मेरा परमेश्वर! याचना करता हूँ मैं तुझसे तेरी उस उदारता के नाम पर जिससे कृपा और करुणा के द्वार खोले गये थे, जिससे अनन्त सिंहासन पर स्थापित हुआ था तेरा मन्दिर,

याचना करता हूँ मैं तुझसे उस करुणा के नाम पर, जिससे तूने अपने उदार उपहारों के सहभोज में समस्त सृष्टि को आमंत्रित किया था !

याचना करता हूँ मैं तुझसे उस अनुग्रह के नाम पर, जिस अनुग्रह के कारण तूने उत्तर दिया था ”ऐसा ही हो।“ तूने यह उत्तर दिया था, अपने ही ”आत्मस्वरूप“ में स्वर्ग और धरा के समस्त निवासियों की ओर से, तब, जब उषाकाल में तेरी शोभा और शक्ति प्रकट हुई थी और तेरे साम्राज्य की सत्ता प्रत्यक्ष की गई थी।

मैं फिर याचना करता हूँ तुझसे ! तेरे इन अति सुन्दर नामों के द्वारा,

आरोग्य के लिये लम्बी प्रार्थना तेरे इन परम महान गुणों के नाम पर,

तेरे महान स्मरण और विशुद्ध सौन्दर्य के नाम पर, तेरे निगूढ़ शिविर के निगूढ़ आलोक और

तेरे उस ’नाम‘ के नाम पर जो, हर सुबह, हर शाम कष्टों के परिधान से लिपटा रहा,

कि इस पाती के संवाहक की तू रक्षा कर सदा और रक्षा कर उसकी भी जो इसका पाठ करे,

जो इसे प्राप्त करे और जो उस घर से गुजरें जहाँ यह पाती रखी गई हो।

इसके माध्यम से तू हर रोगी को स्वस्थ कर, रूग्ण-विपन्न का हर संकट, हर व्यथा से बचा, हर अनचाही पीड़ा, दुःख से त्राण दे,

उनका मार्गदर्शन कर, जो तेरा मार्गदर्शन चाहते हैं, चाहते हैं पथ तेरी क्षमा और करुणा का।

तू रोगनिवारक है, संरक्षक है, दानी है, दयालु है, परम उदार, परम कृपालु है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8748 (bpn8748)

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उपवास

परम पावन ग्रंथ ”किताब-ए-अक़दस“ में लिखा है:

”प्रौढ़ता (15 वर्ष की आयु) प्राप्त करने के प्रारम्भ से ही प्रार्थन और उपवास रखने का आदेश हमने तुम्हें दिया है। यह ईश्वर द्वारा निर्धारित विधान है, जो तुम्हारा और तुम्हारे पूर्वजों का स्वामी है। इस दायित्व से उसने उन्हें मुक्त किया है जो बीमारी या अधिक आयु के कारण अशक्त हैं।…..यात्रा करने वाले, बीमार तथा वे महिलाएँ जो बच्चों के साथ हैं या स्तनपान कराती हैं उन्हें अपनी करुणा के संकेतस्वरूप परमात्मा ने इस नियम से मुक्त रखा है।….सूर्योदय से सूर्यास्त तक खान-पान से परहेज कर और सावधान रह कि तेरी वासना इस पुस्तक में निर्दिष्ट इस कृपा से तुझे वंचित न कर दे।“

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे ईश्वर, तेरे समर्थ चिन्ह के नाम पर और मानवों के बीच तेरे अनुग्रह के प्रकटीकरण के नाम पर कि मुझे अपनी निकटता के नगर के द्वार से दूर मत हटा। तेरे प्राणियों के बीच व्याप्त तेरी कृपा की जो मैंने आशा की है, उसे निराशा में मत बदल। हे मेरे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम्, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे परमेश्वर, तेरी परम मधुर वाणी और तेरे परम महान शब्द के नाम पर कि मुझे निरंतर अपनी देहरी के निकट ला और मुझे अपनी दया की छाया और अपनी अक्षय सम्पदाओं के चंदोवे से दूर मत हटा। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम्, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे हे मेरे ईश्वर, तेरे उस तेजोमय भाल की प्रभा और तेरे मुखड़े की उस ज्योति की उज्ज्वलता के नाम पर जो उस सर्वोच्च क्षितिज से आलोकित होती है कि मुझे अपने परिधान की सुरभि से आकर्षित कर, और मुझे अपनी वाणी की मदिरा का पान करा। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम्, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे परमेश्वर, तेरे उन केशों के नाम पर जो तेरी सृष्टि के साम्राज्य में गूढ़ अर्थों की कस्तूरी सुगंध फैलाते हुए तेरे मुखमंडल पर उस समय लहराते हैं जब तेरी परम यशस्वी लेखनी तेरी पातियों के पृष्ठों पर गतिशील होती है, कि मुझे तेरे धर्म की सेवा करने के लिये ऐसी शक्ति दे कि मैं पीछे न हटूँ और न ही उनके संकेतों से बाधित हो पाऊँ जो तेरे चिन्हों को अस्वीकार कर चुके हैं और तेरे मुखड़े से विमुख हो गये हैं। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम्, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मै याचना करता हूँ तुझसे हे मेरे ईश्वर, तेरे उस नाम पर, जिसे तूने नामों का सम्राट बनाया है, उपवास जिसके द्वारा वे सब, जो स्वर्ग में हैं, और वे सब, जो इस धरती पर हैं, आनन्द विभोर हो गये हैं, कि मुझे अपने सौन्दर्य के सूर्य के दर्शन के योग्य बना और मुझे अपनी वाणी की मदिरा का पान करा। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम्, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे ईश्वर, उच्चतम् शिखर पर बने हुऐ तेरी भव्यता के वितान के नाम पर, और सर्वोच्च पर्वत पर तेरे धर्मप्रकाशन के चंदोवे के नाम पर, कि अनुग्रहपूर्वक मुझे वह करने में सहायता दे, जो तेरी इच्छा है और जिसे तेरे उद्देश्य ने प्रकट किया है। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम्, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे परमेश्वर! अपने अनन्त सौन्दर्य के नाम पर ऐसा वर दे कि मैं उन सबके प्रति मृतप्राय हो जाऊँ जो मेरा है और सदासर्वदा जीवित रहूँ उसके प्रति जो तेरा है। वह है चिरंतन सौन्दर्य, जिसके प्रकट होते ही सौन्दर्य का साम्राज्य भी आराधना में विनत हो यशोगान करने लगता है। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम्, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे ईश्वर! तेरे उस परमप्रिय नाम के प्रकटीकरण के द्वारा जिसने प्रेमियों के हृदय को रिक्त कर दिया है और जिसका यशोगान करने के लिये धरती के सभी निवासी उठ खड़े हुए हैं। मेरी सहायता कर कि मैं तेरी सृष्टि में, तेरे लोगों के बीच, तेरा स्मरण कर सकूँ। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम्, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे हे मेरे ईश्वर ! तेरे नामों के साम्राज्य में तेरी वाणी के पवन झकोरों के उपवास कारण दिव्य कल्पतरु में होने वाले स्पन्दन के नाम पर कि मुझे उन सबसे दूर, बहुत दूर कर दे जिनसे तू घृणा करता है और मुझे उस बिन्दु तक ले चल, जहाँ तेरे संकेतों का अरुणोदय हुआ है। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम्, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे परमेश्वर! उस परम पावन अक्षर के नाम पर, जिसके उच्चरित होते ही महासागर उमड़ पड़े, पवन प्रवाहमान हुआ, सुफल सामने आये, वृक्षों को बसंत का वैभव मिला, अतीत के धुंधलके छंट गये, सभी आवरण हट गये और तेरे भक्तगण अपने अप्रतिबंधित स्वामी के मुखमंडल के प्रकाश की ओर बढ़ चले, कि अपने ज्ञान के कोषागार और विवेक के पात्र से मुझे वह ज्ञान दे जो अब तक गुप्त था। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम, उच्चतम, भव्यतम नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे ईश्वर! तेरे प्रेम की उस अग्नि के नाम पर, जिसने तेरे चुने हुए जनो और प्रियजनों की आँखों से नींद हर ली है और इस प्रभात के नाम पर मैं तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे उनमें गिन, जिन्होंने तेरे द्वारा भेजे गये ग्रंथ में तेरी इच्छा से प्रगट हुए को पा लिया है। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे ईश्वर, तेरे उस मुखमंडल के प्रकाश के द्वारा, जिसने तेरे भक्तजनों को तेरे विधानों के अनुपालन के लिये प्रेरित किया है और उन समर्पित लोगों के द्वारा जिन्होंने तेरे पथ पर चलते हुए तेरे शत्रुओं के प्रहारों का सामना किया है, कि अपनी परम महान लेखनी से मेरे लिये उनका विधान कर जो तूने अपने विश्वासपात्र और चुने हुए लोगों के लिये किया है। हे प्रभु! तू देखता उपवास है कि मैं तेरे पवित्रतम, प्रकाशोत्तम, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे ईश्वर, तेरे उस नाम पर जिसके द्वारा तूने अपने प्रेमियों की पुकार सुनी है और जो तेरे अभिलाषी हैं। जिसके द्वारा तूने उनकी आहें सुनी हैं और जो तेरी निकटता पाना चाहते हैं, जिसके द्वारा तूने उनकी आत्र्त पुकार सुनी है और जिनकी आशा-आकांक्षा तुझसे ही जुड़ी हैं, जिसके द्वारा तूने उनकी इच्छा पूरी की है; मैं याचना करता हूँ तेरी कृपा और अनुकम्पा के नाम पर, जिसके द्वारा क्षमाशीलता का महासिन्धु उमड़ा है, जिसके द्वारा तेरे सेवकों पर तेरी उदारता के मेघ बरसे हैं, कि उन सबके लिये, जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं और जिन्होंने तेरे द्वारा आदेशित उपवास धारण किया है, वह विधान कर, वह पुरस्कार प्रदान कर जो समुचित है। ऐसे लोग तेरे आदेश के बिना नहीं बोलते और तेरे पथ में तेरे प्रेम के लिये अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देते हैं।

मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे ईश्वर! तेरे नाम पर और तेरे संकेतों के नाम पर और तेरे प्रतीकों के नाम पर और तेरे सौन्दर्य-सूर्य के जाज्वल्यमान प्रकाश के नाम पर और तेरी परम महान शाखाओं के नाम पर कि उनके पापों को क्षमा कर दे, जिन्होंने तेरे विधानों के अनुकूल उपवास धारण किया है और उनका पालन किया है जो तेरे परम पावन ग्रंथ में विहित हैं। हे प्रभु! तू देखता है कि मैं तेरे पवित्रतम्, प्रकाशोत्तम्, सर्वाधिक शक्तिशाली, महानतम्, उच्चतम्, भव्यतम् नाम का स्मरण करता रहता हूँ और तेरे उस परिधान के आंचल की छोर से बंधा हूँ, जिससे इस लोक और परलोक में सभी बंधे हैं।

– Bahá’u’lláh

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स्तुति हो तेरी, हे प्रभु, मेरे परमेश्वर! तेरे इस धर्म प्रकटीकरण के नाम पर, जिसके द्वारा अंधकार ने प्रकाश का रूप लिया है, जिसके द्वारा बारम्बार धर्मध्वजा लहराई गई है और विहित पाती का प्रकटीकरण हुआ है और वह विस्तारित नामावली अनावृत हुई है, मैं तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे उपवास और उन्हें, जो मेरे संगी हैं, वह प्रदान कर जो हमें तेरी सर्वातीत महिमा के व्योम में ऊँचे विचरण करने में समर्थ बनाये और हमें ऐसे सन्देहों के कलुष से मुक्त कर दे जिन्होंने शंकाशील लोगों को तेरी एकता की छत्रछाया में आने से रोका है।

मैं वह हूँ, हे मेरे प्रभु, जिसने तेरी स्नेहमयी कृपालुता की डोर को मजबूती से थामा हुआ है और जो तेरी दया और तेरे अनुग्रहों के आंचल से लिपटा हुआ है। तू मेरे और मेरे प्रियजनों के लिये इहलोक और परलोक के शुभ पदार्थों का विधान कर और तब उन्हें वह गुप्त उपहार प्रदान कर जिसका विधान तूने अपने सबसे चुने हुए प्राणियों के लिये किया है।

ये वे दिन हैं, हे मेरे प्रभु, जिनमें तूने अपने सेवकों को उपवास रखने का आदेश दिया है। भाग्यशाली हैं वे जो केवल तेरे लिये और तेरे अतिरिक्त अन्य सभी पदार्थों से पूर्णतया अनासक्त होकर, उपवास धारण करते हैं। मेरी सहायता कर और उन्हें भी सहायता दे, हे मेरे प्रभु! कि हम तेरी आज्ञा का पालन करें और तेरी शिक्षाओं पर चलें। सत्य ही तू अपनी इच्छानुसार सब कुछ करने की सामथ्र्य रखता है।

तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है। तू सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है। सर्वस्तुति हो उस परमेश्वर की, अखिल लोकों के उस प्रभु की।

– Bahá’u’lláh

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हे दिव्य विधाता! विरक्त हूँ जिस तरह में दैहिक कामनाओं, अन्न और जल से, मेरा हृदय भी शुद्ध और पावन कर दे वैसे ही, अपने अतिरिक्त अन्य सब के प्रेम से। भ्रष्ट इच्छाओं और शैतानी प्रवृत्तियों से मेरी आत्मा को बचा, इसकी रक्षा कर, ताकि मेरी चेतना पवित्रता की सांस के साथ संलाप कर सके और तेरे उल्लेख के सिवा अन्य सबका परित्याग कर सके।

– Abdu’l-Bahá

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एकता

हे परमेश्वर! यह वर दे कि एकता की ज्योति सारी पृथ्वी पर छा जाये और ”साम्राज्य प्रभु का है“ यह मुहर इसके सभी समुदायों एवं राष्ट्रों के ललाट पर अंकित हो जाये।

– Bahá’u’lláh

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जय हो तेरी हे परमेश्वर, कि तूने मानवजाति के प्रति अपने प्रेम को प्रकट रूप दिया है। हे तू जो हमारा जीवन और हमारी ज्योति है, अपने पथ में अपने सेवकों का मार्गदर्शन कर और हमें तुझमें समृद्ध बना और तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से हमें मुक्त रख।

हे परमेश्वर! हमें तेरी एकता की शिक्षा दे और तेरी एकता की हमसे अनुभूति करा जिससे कि हम तेरे अतिरिक्त अन्य कुछ न देखें, तू दयालु और अक्षय सम्पदाओं का दाता है।

हे परमेश्वर! अपने प्रियजनों के हृदयों में अपने प्रेम की ज्वाला प्रज्ज्वलित कर, जिससे कि वे तेरे अतिरिक्त, अन्य सभी विचारों को भस्मसात कर दें।

हे परमेश्वर! हमारे सम्मुख अपने परमोच्च अनन्तता को प्रकट कर, कि तू सदैव रहा है और सदा रहेगा और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है। सत्य ही तुझ में सभी विश्रांति और शक्ति पायेंगे।

– Bahá’u’lláh

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हे तू, जो स्वामियों का स्वामी है! मैं साक्षी देता हूँ कि तू है समस्त सृष्टि का स्वामी और है सभी दृश्य-अदृश्य प्राणियों का शिक्षक। मैं साक्षी देता हूँ कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड तेरी शक्ति के अधीन है और पृथ्वी की समस्त शक्तियाँ भी तुझे भयभीत नहीं कर सकतीं और न ही तुम्हारे उद्देश्य को पूरा करने में सम्राटों और राष्ट्रों की प्रभुसत्ता तुम्हें रोक सकती है। मैं स्वीकार करता हूँ कि सम्पूर्ण विश्व को नवजीवन देने और लोगों के बीच एकता की स्थापना करने तथा उनकी मुक्ति के अतिरिक्त तुम्हारी और कोई इच्छा नहीं है।

– Bahá’u’lláh

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हे मेरे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! अपने सेवकों के हृदयों को मिलाकर एक कर दे और उन पर अपना महान उद्देश्य प्रकट कर। वे तेरी शिक्षाओं पर चलें और तेरे नियमों पर अटल रहें। हे ईश्वर! उनके प्रयास में तू उनकी सहायता कर और उन्हें अपनी सेवा करने की शक्ति प्रदान कर। हे ईश्वर! उन्हें उनके स्वयं के ऊपर न छोड़; उनके पगों का, अपने ज्ञान के प्रकाश द्वारा मार्गदर्शन कर और उनके हृदयों को अपने प्रेम से आनंदित कर दे। सत्य ही, तू उनका सहायक और स्वामी है।

– Bahá’u’lláh

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हे मेरे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! अपने सेवकों के हृदयों को मिलाकर एक कर दे और उन पर अपना महान उद्देश्य प्रकट कर। वे तेरी शिक्षाओं पर चलें और तेरे नियमों पर अटल रहें। हे ईश्वर! उनके प्रयास में तू उनकी सहायता कर और उन्हें अपनी सेवा करने की शक्ति प्रदान कर। हे ईश्वर! उन्हें उनके स्वयं के ऊपर न छोड़; उनके पगों का, अपने ज्ञान के प्रकाश द्वारा मार्गदर्शन कर और उनके हृदयों को अपने प्रेम से आनंदित कर दे। सत्य ही, तू उनका सहायक और स्वामी है।

– Bahá’u’lláh

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हे दयालु ईश्वर! तूने समस्त मानवजाति को एक ही मूल कुटुम्ब से उत्पन्न किया है। तूने ऐसा निश्चित किया है कि सभी मनुष्य एक ही कुटुम्बी हैं। तेरे पवित्र सान्निध्य में सब तेरे ही सेवक हैं और समस्त मानवजाति तेरी ही छत्रछाया में आश्रित है। सब तेरी अक्षय सम्पदाओं के सहभोज में एकत्रित हैं। सब तेरे मंगल विधान की ज्योति से प्रकाशित हैं।

हे परमात्मन्! तू सब पर कृपालु है, तूने सबको आजीविका दी है, सबको आश्रय दिया है, सबको जीवन प्रदान किया है; तूने सबको प्रतिभा और गुणों से विभूषित किया है; सब तेरी कृपा के सागर में निमग्न हैं। हे तू दयालु स्वामी ! सबको एक कर दे। सभी धर्मों को सहमत होने दे, सभी राष्ट्रों को एक राष्ट्र बना दे, ताकि वे सब परस्पर एक-दूसरे को, एक ही परिवार के सदस्यों की भाँति देखें और सम्पूर्ण वसुधा को एक ही कुटुम्ब मानें। वे सब मिलकर सद्भाव के वातावरण में रहें। हे ईश्वर! मानवजाति की एकता का ध्वज उन्नत कर दे। हे ईश्वर! परम् महान शांति स्थापित कर। सबके हृदयों को मिलाकर एक कर दे। हे तू दयालु पिता, हे ईश्वर, अपनी स्नेह-सुरभि से हमारे हृदयों को उल्लास से भर दे। अपने मार्गदर्शन के प्रकाश द्वारा हमारे नेत्रों को प्रदीप्त कर। अपने शब्दों के स्वरमाधुर्य से हमारे कानों को झंकृत कर दे और अपने मंगल विधान के संरक्षण के दुर्ग में आश्रय प्रदान कर। तू सर्वसमर्थ है, सर्वशक्तिमान् है, तू क्षमावंत, मानवजाति की त्रुटियों को अनदेखा करने वाला है।

– Abdu’l-Bahá

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कार्मल की पाती

शत्-शत् नमन इस युग को, एक ऐसा युग जिसमें दया की सुरभि समस्त सृजित वस्तुओं पर तरंगित हुई है, एक ऐसा समृद्ध युग जिसकी बराबरी अतीत के कालों और शताब्दियों से कभी भी नहीं की जा सकती, एक ऐसा युग जब प्राचीनतम प्रभु ने अपना रूख अपने पावन आसन की ओर किया है। वहाँ समस्त सृजित वस्तुओं ने और उनके अलावा देवदूतों ने गुहार लगाई है, ”हे कार्मल (पर्वत) तू शीघ्रता कर, देख! ईश्वर के मुखमंडल का प्रकाश, नामों के साम्राज्य के सम्राट और स्वर्गों के रचयिता का पदार्पण यहाँ हुआ है।“

आनन्दविह्वल कार्मल का स्वर कुछ इस प्रकार गूंजा, ”मेरा जीवन तेरे लिये बलिदान हो जाये, तूने मेरी ओर निहारा है, अपनी कृपा मुझ पर बरसाई है और अपने पग मेरी ओर बढ़ाये हैं। हे अनन्त जीवन के उद्गम, तेरे वियोग में मैं प्राणविहीन हो गया,

विरह ने मेरी आत्मा झुलसा दी है। तुझे शत्-शत् प्रणाम, कि तूने मुझे अपनी पुकार सुनने के योग्य बनाया, अपने पग मेरी ओर बढ़ाकर मुझे मान दिया और अपने इस युग की जीवनदायिनी सुरभि से मेरी आत्मा को नवस्फूर्ति दी, तेरी महालेखनी की गूंज तेरे लोगों के बीच तेरा आह्वान है और जब वह घड़ी आई तब तुम्हारा प्रतिरोधरहित धर्म प्रकट किया गया तब तूने अपनी महालेखनी में अपनी श्वांस फूंक दी और देखो, समस्त सृष्टि कम्पायमान हो उठी और उस ईश्वर के कोषागार में छिपे, सभी गुप्त रहस्यों पर से पर्दा उठ गया, ईश्वर जो सभी सृजित वस्तुओं का स्वामी है।“

जैसे ही उसकी आवाज प्रभु के पावन पर्वत तक पहुँची वैसे ही हमने उत्तर दिया, ”हे कार्मल, अपने स्वामी को धन्यवाद दो। मुझसे विरह की अग्नि तुम्हें दग्ध करती जा रही थी, मेरी उपस्थिति का महासागर जब तुम्हारे समक्ष उमड़ा तो तुम्हारे नेत्रों में प्रसन्नता की लहर दौड़ आई और समस्त सृष्टि हर्षोन्मान्दित हो गई तथा सभी दृश्य तथा अदृश्य वस्तुओं के बीच आनन्द व्याप्त हो गया। खुशियाँ मनाओ, क्योंकि इस युग में ईश्वर ने तुम पर अपना सिंहासन स्थापित कार्मल की पाती किया है, तुम्हें अपने चिन्हों का उद्गम स्थल बनाया है और अपने प्रकटीकरण के प्रमाणों का दिवानक्षत्र माना है। उसका सौभाग्य है जो तुम्हारी परिक्रमा करता है जो तुम्हारी महिमा के प्रकटीकरण का उद्घोष करता है और उस आशीष का स्मरण करता है जो तुम्हारे स्वामी ने कृपापूर्वक तुम पर बरसाये हैं। सर्वमहिमाशाली अपने स्वामी के नाम पर अमरत्व के पात्र को कसकर थाम लो और उसे धन्यवाद दो, क्योंकि तुम पर अपनी दया के प्रतीकस्वरूप उसने तुम्हारी वेदना को प्रसन्नता में बदल दिया है और तुम्हारे कष्टों को आशीषपूर्ण आनन्द का रूप दिया है। वस्तुतः, वह उस स्थान को प्रेम करता है जो उसका सिंहासन बनाया गया है, जिस पर उसके पग पड़े हैं, जो उसकी उपस्थिति से सम्मानित हुआ है, जहाँ से उसने महाशंखनाद किया है और जिस पर उसने अपने आँसू बहाये हैं।“

”हे कार्मल, जिऑन को गुहार लगा और यह शुभ संदेश दे: वह जो नश्वर नेत्रों से ओझल था, प्रकट हो गया है! उसकी सर्वविजयी प्रभुसत्ता स्थापित हुई है, उसकी सर्वग्राही भव्यता प्रकट हुई है। सावधान! कहीं तुम संकोच न कर बैठो या अपने कदम रोक न लो। शीघ्रता करो और आगे बढ़ कर ईश्वर के नगर की परिक्रमा करो जो स्वर्गिक काबा से अवतरित हुआ है, जिसके इर्द-गिर्द ईश्वर के प्रिय पात्रों ने, शुद्ध हृदय लोगों ने और देवदूतों ने परिक्रमा की है। देखो, किस प्रकार से धरती के कोने-कोने में, इसके प्रत्येक नगर में इस प्रकटीकरण के शुभ संदेश का उद्घोष करने के लिये आकुल हूँ - एक ऐसा प्रकटीकरण जिसकी ओर सिनाई पर्वत का हृदय आकर्षित हुआ है और जिसके नाम की गुहार सदा ”प्रज्ज्वलित झाड़ी“ ने लगाई है, ”धरती और स्वर्ग के सभी साम्राज्य स्वामियों के स्वामी ईश्वर के हैं“ सत्य ही, यह वह युग है, जिसमें धरती और सागर दोनों इस उद्घोष पर आनन्दविह्वल हुए हैं, वह युग जिसके लिये नश्वर मानव के मन-मानस की समझ से परे वे सभी वस्तुएँ दी गई हैं जिन्हें ईश्वर ने अपने कृपास्वरूप निर्धारित की हैं। शीघ्र ही प्रभु अपने संदेश की नौका तुम्हारे मन-सागर तक लायेगा और बहा के उन लोगों को प्रकट करेगा जो ”महानामों की पुस्तक“ में वर्णित किये गये हैं।“

कार्मल की पाती समस्त मानवजाति के स्वामी का जयघोष हो, जिसके नाम मात्र की चर्चा से धरती का कण-कण कम्पायमान हो उठा और महिमा की वाणी ने मुखरित हो उसे अनावृत किया जो ईश्वर के ज्ञान से आवृत उसकी शक्ति के कोषालय में अब तक गुप्त था। सत्यतः वह सर्वशक्तिशाली, सर्वोच्च ईश्वर अपने नाम की अंतःशक्ति के सहारे उन सब का सम्राट है जो स्वर्गों में और पृथ्वी पर हैं।

– Bahá’u’lláh

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कोष

(प्रभु के सभी मित्रों को…..यथाशक्ति दान देना चाहिये, उनके द्वारा समर्पित राशि, चाहे कितनी भी अल्प क्यों न हो। ईश्वर किसी भी व्यक्ति पर उसकी सामर्थ्य से अधिक बोझ नहीं डालता। ऐसे दान सभी केन्द्रों और सभी अनुयायियों के पास से आने चाहिये।)

”हे प्रभु के मित्रों ! तुम आश्वस्त रहो कि इन दानों के बदले प्रभु-कृपा से स्वर्गिक उपहारस्वरूप तुम्हारी खेती-बाड़ी, तुम्हारे उद्योग-धंधों और व्यापार में कई गुना बढ़ोत्तरी होगी। वह, जो यह सद्कर्म करेगा, निःसंदेह, पुरस्कार में उसका दस गुना पायेगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रभु उन्हें भरपूर सम्पुष्टि प्रदान करता है, जो उसके पथ में अपनी सम्पदा व्यय करते हैं।“

– Abdu’l-Bahá

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हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! अपने सच्चे प्रेमियों के ललाट को तेजस्वी बना और उन्हें निश्चित विजय के देवदूतों का सहारा दे। अपने सुगम पथ पर उनके पगों को अडिग बना और अपने आशीषों के द्वार खोल, अपनी पुरातन सम्पदाओं में से उन्हें अंशदान दे, क्योंकि तेरे धर्म की सुरक्षा प्रदान करते हुए, तेरे स्मरण पर भरोसा रखते हुए, तेरे प्रेम के लिये अपने हृदय समर्पित करते हुए और तेरे सौन्दर्य की आराधना में, तुझे प्रेम करने के उपायों की खोज में, जो भी तूने उन्हें दिया है उसे, उन्होंने अर्पित किया है।

हे मेरे नाथ उनके लिये भरपूर अंशदान का आदेश कर, एक निर्धारित और निश्चित पुरस्कार उन्हें प्रदान कर। वस्तुतः तू पालनहार, उदार, सहायक, कृपालु और सदा क्षमाशील है।

– Abdu’l-Bahá

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क्षमा याचना

महिमावंत है तू, हे नाथ, मेरे परमेश्वर! मैं याचना करता हूँ तुझसे तेरे प्रियजनों के नाम पर, और तेरे विश्वासपात्रों के नाम पर और उसके नाम पर जिसे तूने अपने आदेश से अपने अवतारों और अपने दिव्य संदेशवाहकों की मुहर नियत किया है कि अपने स्मरण को मेरा सहचर, अपने प्रेम को मेरी आकांक्षा, अपने मुखारविन्द को मेरा लक्ष्य, अपने नाम को मेरा पथदर्शक दीपक, अपनी इच्छा को मेरी कामना और अपनी प्रसन्नता को मेरा आनन्द बनने दे।

मैं पतित हूँ, हे मेरे प्रभु! तू है सदा क्षमाशील। जैसे ही मैंने तुझे पहचाना, मैं तेरी स्नेहमयी कृपा के परमोच्च दरबार तक पहुँचने के लिये शीघ्रता से बढ़ चला। क्षमा कर मुझे, मेरे स्वामिन्! मेरे पापों ने मुझे तेरी प्रसन्नता की राह पर चलने और तेरी एकमेवता के महासिंधु के तट तक पहुँचने से रोका है। हे मेरे नाथ! ऐसा कोई नहीं है जो मुझसे कृपापूर्ण व्यवहार करे, जिसकी ओर मैं उन्मुख हो सकूँ। ऐसा कोई नहीं है जो मुझ पर ऐसी करुणा करे कि मैं उसकी दया के लिये आतुर रहूँ। त्याग मत मुझे, मैं तेरी कृपा की निकटता की याचना करता हूँ। अपनी उदारता और अपने आशीषों के प्रवाहों को मुझ तक आने से मत रोक। मेरे लिये, हे मेरे नाथ, उसका विधान कर जिसका विधान तूने अपने प्रियजनो के लिये किया है और मेरे लिये वह अंकित कर जो तूने अपने प्रियजनों के लिये अंकित किया है। मेरी दृष्टि सभी कालों में, सभी समय तेरे अनुग्रहपूर्ण मंगल विधान के क्षितिज पर जमी रही है और मेरे नेत्र तेरी करुणामयी कृपा के दरबार में नत रहे हैं। जो तेरे लिये शोभनीय है, वैसा ही व्यवहार कर मुझसे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, शक्ति का ईश्वर, महिमा का परमेश्वर, वह जिसकी सहायता की याचना सभी मानव करते हैं।

– Bahá’u’lláh

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महिमामय है तू, हे नाथ, मेरे परमेश्वर! जितनी बार भी मैं तेरा नाम लेने का प्रयत्न करता हूँ, मैं प्रबल पापों और तेरी इच्छा के विरूद्ध किये गये कर्मों को याद करता हूँ और पाता हूँ अपने आपको इतना शक्तिविहीन कि तुम्हारा गुणगान भी नहीं कर पाता। लेकिन तेरी अनुकम्पा में मेरा परम विश्वास, तुझमें मेरी आशा को पुनर्जीवन देता है और मेरा यह विश्वास कि कुछ भी हो जाये तू कृपा ही देगा, मुझे तेरी ओर उन्मुख होने, तेरा गुणगान करने में और याचना भरे हाथ तेरी ओर फैलाने में समर्थ बनाता है। हे मेरे नाथ! मैंं तेरी उस दया की याचना करता हूँ जो सभी सृजित वस्तुओं में श्रेष्ठ है और जिसके साक्षी हैं वे सभी जो तेरे नाम के महासिंधु की अतल गहराइयों में निमग्न हैं। हे मेरे नाथ! मुझे मेरे ऊपर मत छोड़, क्योंकि मेरा मन दुष्कर्मों में प्रवृत्त हो जाता है। अपनी सुरक्षा के दुर्ग में मुझे शरण दे, मेरी रक्षा कर! मैं वह हूँ, हे मेरे प्रभु! जो तेरी इच्छा के अनुरूप चलना चाहता है, मैंने उसका ही वरण किया है जो तेरेविधानों और तेरी इच्छा के अनुरूप है। मैने वही चाहा है जो तेरे आदेश और निर्णय के प्रतीक हैं। हे प्रभु! इतनी अनुकम्पा कर मेरे ऊपर; हे तू जो उन हृदयों को प्रिय है, जो तेरी कामना करते हैं ! तेरे धर्म के प्रकटीकरण, तेरी प्रेरणा के दिवास्त्रोत, तेरी भव्यता के प्रवक्ता, तेरे ज्ञान के कोषालय के नाम पर मैं याचना करता हूँ कि अपने पवित्र निवास से मुझे वंचित मत कर, अपने मंदिर और मण्डप वितान से मुझे दूर मत रख। वर दे, हे मेरे स्वामी! कि तुम्हारे गरिमामय दरबार तक पहुँच पाऊँ, उसकी ही परिक्रमा करूँ और तुम्हारे द्वार पर विनम्र बन खड़ा रहूँ।

तू वह है, जिसकी शक्ति अनन्तकाल से है। कुछ भी तेरे ज्ञान से परे नहीं। तू सत्य ही शक्ति का परमेश्वर, महिमा और प्रज्ञा का प्रभु है। ईश्वर का गुणगान हो, जो सभी लोकों का स्वामी है।

– Bahá’u’lláh

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तेरे नाम का गुणगान हो, हे मेरे परमेश्वर! और सभी वस्तुओं के परमेश्वर! मेरे गौरव, और सभी वस्तुओं के गौरव! मेरी कामना और सभी वस्तुओं की कामना! मेरी शक्ति और सभी वस्तुओं की शक्ति! मेरे सम्राट, और सभी वस्तुओं के सम्राट! मेरे स्वामी और सभी वस्तुओें के स्वामी! मेरे लक्ष्य और सभी वस्तुओं के लक्ष्य! मुझे गति देने वाले और सभी वस्तुओं के गतिदाता! मैं तुझसे याचना करता हूँ कि अपनी मृदुल कृपा के महासिंधु से मुझे वंचित नहीं रखना, न ही कर देना अति दूर अपनी निकटता के तटों से। तेरे सिवा नहीं है कुछ भी जो मुझको देता हो लाभ। तेरी समीपता से बढ़कर और किसी से प्राप्य नहीं कुछ भी। मैं विनती करता हूँ तेरी विपुल समृद्धि के नाम पर, जिसके द्वारा छोड़ स्वयं को तू, कर देता है सबकुछ दान, कि मुझको उनमें गिन जिन्होंने अपना मुखड़ा तेरी ओर कर लिया है और उठ खड़े हुए हैं तेरी सेवा में। हे मेरे स्वामी, अपने सेवकों और अपनी सेविकाओं को क्षमा का दान दे दे। तू है सदा क्षमाशील, और परम कृपालु !

– Bahá’u’lláh

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हे ईश्वर हमारे स्वामी! अपनी कृपा के माध्यम से उन सब से हमारी रक्षा कर जो तेरे लिये घृणित है और हमें कृपापूर्वक वह प्रदान कर जो तेरे लिये शोभनीय है। हमें अपनी उदारता का और अधिक भाग दे और हमें आशीर्वाद प्रदान कर। हमने जो कुछ किया है उसके लिये हमें क्षमा कर और हमारे पापां को धो डाल तथा अपनी कृपापूर्ण क्षमाशीलता के द्वारा हमें क्षमा कर। वस्तुतः तू सर्वादात्त, स्वयंजीवी है।

तेरा प्रेममय विधान स्वर्ग में और धरती पर सभी सृजित वस्तुओं को घेरे हुए है और तेरी क्षमा समस्त सृष्टि को पार कर गई है। प्रभुसत्ता तेरी है; तेरे ही हाथ में सृजन एवं प्रकटीकरण के साम्राज्य हैं; अपने हाथ में तू समस्त सृजित वस्तुओं को धारण किये हुए है तथा तेरी ही मुठ्ठी में क्षमाशीलता के नियत परिमाण हैं। अपने सेवकां में से तू जिसे चाहे उसे क्षमा कर देता है। वस्तुतः तू सदा क्षमाशील, सर्वप्रेममय है। तेरे ज्ञान से कुछ भी बाहर नहीं रह सकता और ऐसा कुछ भी नहीं है जो तुझ से छिपा है।

हे ईश्वर हमारे स्वामी! अपनी शक्ति के सामर्थ्य से हमारी रक्षा कर, हमें अपने उमड़ते हुए अद्भुत महासागर में प्रवेश करा और हमें वह प्रदान कर जो तेरे लिये अति शोभनीय हो।

तू परम शासक, बलशाली, कर्ता, उदात्त, सर्वप्रेममय है!

– Báb

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गुणगान हो तेरा, हे स्वामी। हमारे पापां को क्षमा कर, हम पर दया कर और अपने पास लौटने में हमारी सहायता कर। हमें, अपने अतिरिक्त किसी अन्य पर भरोसा करने का दुःख न भुगतने दे और अपनी उदारता के माध्यम से, कृपापूर्वक हमें वह प्रदान कर जो तुझे प्रिय है, जो तेरी इच्छा है और जो तेरे योग्य है। उनके स्थान को उदात्त कर जिन्हांने सच्चा विश्वास किया है, तथा अपनी कृपापूर्ण क्षमाशीलता द्वारा उन्हें क्षमा कर। वस्तुतः तू संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।

– Báb

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मैं तुझसे क्षमा की भीख माँगता हूँ, हे मेरे परमेश्वर, तेरे उल्लेख के अतिरिक्त प्रत्येक उल्लेख के लिये और तेरी प्रशंसा के अतिरिक्त प्रत्येक प्रशंसा के लिये और तेरी निकटता के आनन्द के अतिरिक्त प्रत्येक आनन्द के लिये और तुझसे संलाप के सुख के अतिरिक्त प्रत्येक सुख के लिये और तेरे प्रेम एवं तेरी सुप्रसन्नता के आनन्द के अतिरिक्त प्रत्येक आनन्द के लिये और उन सभी वस्तुओं के लिये जो मुझसे सम्बद्ध हैं, जिनका तुझसे कोई सम्बन्ध नहीं है, हे तू जो स्वामियां का स्वामी है, वह जो साधन प्रदान करता है और द्वारों को खोलता है।

– Báb

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महिमा हो तेरी, हे ईश्वर! मैं तेरा कैसे उल्लेख कर सकता हूँ जब कि तू समस्त मानवजाति की प्रशंसा से परे, पावन है। महिमामण्डित हो तेरा नाम, हे ईश्वर, तू सम्राट है, अनन्त सत्य है; तू वह जानता है जो स्वर्ग में और धरती पर है और सब कुछ तुझ तक लौट जाना है। तूने एक स्पष्ट परिमाण के अनुसार ईश्वर द्वारा आदेशित प्रकटीकरण को नीचे भेजा है। प्रशंसित है तू, हे स्वामी! स्वर्ग और धरती, तथा जो कुछ भी इनके मध्य अस्तित्व में है, के देवदूतां के माध्यम से। तू जिसे चाहे अपने आदेश से विजयी बनाता है। तू प्रभुसत्तासम्पन्न, अनन्त सत्य, अपराजेय शक्ति का स्वामी है।

महिमावन्त है तू, हे स्वामी! तू अपने सेवकों के पापां को सर्वदा क्षमा कर देता है, जो तेरी क्षमा की याचना करते हैं। मेरे पापां को तथा उनके पापों को धो डाल जो भोर के समय में तुझसे क्षमा माँगते हैं, जो दिन के समय और रात्रि बेला में तुझसे प्रार्थना करते हैं, जिन्हें ईश्वर के अतिरिक्त अन्य किसी की लालसा नहीं है, जो वह सब कुछ अर्पित कर देते हैं जो ईश्वर ने उन्हें कृपापूर्वक प्रदान किया है, जो प्रातः काल में तथा सांध्य बेला में तेरा गुणगान करते हैं और जो अपने कर्त्तव्यां के प्रति लापरवाह नहीं हैं। तेरे नाम की जयजयकार हो, हे परमेश्वर।

– Báb

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हे तू क्षमाशील स्वामी ! तू ही है अपने इन सभी सेवकों की शरण। तू ही है रहस्यों का ज्ञाता, सर्वज्ञानी ! बेसहारे हैं हम, तू ही है शक्तिमान, सर्वसमर्थ ! हम हैं पतित, तू है पतितपावन, हे कृपालु, हे दयालु स्वामी ! हमारे दोषों की ओर न देख, अपनी दया और कृपा हमें दे। हमारे दोष हैं अनेक, तू है असीम दया का सागर; हम हैं दुर्बल, दुःख से भरे, तू है सदासहाय ! हमें शक्ति दे, समर्थ बना। हमें इस योग्य बना कि हम तेरी पावन देहरी तक पहुँच सकें। हमारे हृदय प्रकाशित कर दे, हमें देखने योग्य दृष्टि प्रदान कर, सुनने वाले कान दे, मृतप्राय लोगों को पुनर्जीवित कर, रोगियों को आरोग्य प्रदान कर। निर्धन को धन, भयाक्रान्तों को शांति और सुरक्षा दे। अपने साम्राज्य में हमें स्वीकार कर, अपने मार्गदर्शन से हमारे अन्तर्मन आलोकित कर दे। तू बलशाली और सर्वसमर्थ है। तू ही है उदार और दयालु।

– Abdu’l-Bahá

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गर्भवती माताओं के लिये

हे सर्वकृपालु की सेविकाओं! बच्चों की प्रारम्भिक अवस्था से ही उन्हें प्रशिक्षित करने का तुम पर उत्तरदायित्व है और इसमें तनिक भी लापरवाही बरतने की अनुमति नहीं है।

– Abdu’l-Bahá

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हे नाथ! मेरे स्वामी! तुमने अपनी इस समर्पित सेविका पर जो अनुग्रह किया है उसके लिये मैं तेरे प्रति आभार प्रकट करती हूँ। यह तेरी दासी तेरी प्रार्थना और अभ्यर्थना करती है, क्योंकि सत्य ही तूने अपने प्रत्यक्ष साम्राज्य की ओर उसका मार्गदर्शन किया है, इस क्षणभंगुर संसार में अपनी पुकार सुनने के योग्य बनाया है और उन चिन्हांं के दर्शन कराये हैं जो सभी पदार्थों पर तेरे विजयी शासन के प्रमाण प्रकट करते हैं। हे स्वामी! वह जो मेरी कोख में है उसे मैं तुझे समर्पित करती हूँ। अपनी कृपा और उदारता से उसे अपने साम्राज्य में प्रशंसा के योग्य और सौभाग्यशाली शिशु बना, ताकि वह तेरी शिक्षा के अधीन फले-फूले और विकास करे। वस्तुतः तू कृपालु है, वस्तुतः तू महान अनुग्रहों का स्वामी है।

– Abdu’l-Bahá

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घर से निकलते समय

हे मेरे ईश्वर! मैं तेरी कृपा से इस प्रभात वेला में जाग उठा हूँ, और तुझ में ही मैंने सम्पूर्ण विश्वास अर्पित कर अपना निवास छोड़ा है और स्वयं को तेरे संरक्षण में सौंप दिया है। अपनी दया के स्वर्ग से तू मुझ पर अपना आशीष भेज और मुझे अपने घर सुरक्षित लौटने में वैसे ही समर्थ बना, जैसे तूने मुझे घर से प्रस्थान करते समय, अपनी सुरक्षा में रखकर, अपनी ओर उन्मुख होने के योग्य बनाया है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, एक और केवल एक, अतुलनीय, सर्वज्ञ तथा सर्वप्रज्ञ।

– Bahá’u’lláh

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तीर्थयात्रा की प्रार्थना

(यह पाती बाब और बहाउल्लाह की सामधियों पर पढ़ी जाती है। उनकी बरसी पर भी अक्सर इस पाती का पाठ किया जाता है।)

हे तू भव्यता के प्रकटावतार, अनन्तता के सम्राट! स्वर्ग और धरा पर जो कुछ भी है उन सबका तू स्वामी है; तुझ पर ही आश्रित है वह कीर्ति, जो तेरी दिव्य आत्मा से उदित हुई है और वह गरिमा जो, तेरे दीप्तिमान सौन्दर्य से चमकी है। मैं साक्षी देता हूँ कि तुझसे ही ईश्वर का प्रभुत्व और साम्राज्य, उसकी भव्यता और उसकी शोभा प्रकट हुई थी और चिरंतन आभा के दिवा नक्षत्रों ने अपनी कांति बिखेरी थी, तेरी अकाट्य आज्ञा के स्वर्ग में और सृष्टि के क्षितिज पर अगोचर का सौन्दर्य चमका है। मैं पुनः साक्षी देता हूँ कि तेरी लेखनी के स्पंदन मात्र से तेरा विधान, ’तेरा अस्तित्व हो’, प्रभावशाली हो उठा और ईश्वर के गूढ़ रहस्य प्रकट हो गये, सभी चीज़ों को अस्तित्व प्रदान किया गया और सभी प्रकटीकरण पृथ्वी पर भेजे गये हैं।

मैं यह भी साक्षी देता हूँ कि तेरे सौन्दर्य के द्वारा तीर्थ यात्रा की पाती ही उस आराध्य का सौन्दर्य अनावृत हुआ है और तेरे मुखड़े से ही उस ईष्ट का मुखड़ा प्रभासित हुआ है। अपने एक शब्द से तूने अपनी सम्पूर्ण सृष्टि के बीच अपना यह निर्णय सुना दिया है कि जो भी तेरे भक्त होंगे वे गरिमा के शिखर पर पहुँचेंगे और जो नास्तिक होंगे वे पतन की गर्त में गिरेंगे।

मैं साक्षी देता हूँ कि जिसने तुझे जाना है, उसने ईश्वर को जाना है और जिसे तेरा सान्निध्य मिला है उसे परमात्मा का सान्निध्य मिला है। सौभाग्य होगा उसका जिसने तुझमें और तेरे चिन्हों में विश्वास किया है, और तेरी सम्प्रभुता के समक्ष नत हुआ है और तुझसे मिलकर जिसका गौरव बढ़ा है और जिसे तेरी कृपा के आनन्द की अनुभूति हुई है, और जिसने तेरी परिक्रमा की है, और तेरे सिंहासन के समक्ष जो खड़ा है। दुर्भाग्य होगा उसका, जिसने तेरे मार्ग का उल्लंघन किया है और तुझे अस्वीकार किया है, और तेरे चिन्हों को नकारा है और तेरी सम्प्रभुता को चुनौती दी है, और तेरे विरोध में उठ खड़ा हुआ है और तरे मुखड़े के समक्ष अपना अहंकार जतलाया है, और तेरे प्रमाणों का खण्डन किया है और जो तेरे शासन और साम्राज्य से दूर भाग गया है और जिनकी गिनती उन अविश्वासियों में हुई है जिनके नाम तेरे आदेश की उँगलियों से तेरी पवित्र पातियों में अंकित हुए हैं। अतः, हे मेरे परमेश्वर, मेरे प्रियतम्! अपनी कृपा और दया की दाहिनी भुजा से मुझ पर अपने अनुग्रह के पावन समीर प्रवाहित कर कि वह मुझे स्वयं मुझसे और संसार से दूर खींच कर, तेरी निकटता और सान्निध्य के दरबारों तक ले जाये। तू जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ है। तू सत्य ही सभी वस्तुओं से सर्वोपरि रहा है।

परमेश्वर का स्मरण और उसकी स्तुति, परमेश्वर का तेज और उसकी आभा तुझ पर विराजे; हे तू, जो उसका सौन्दर्य है। मैं साक्षी देता हूँ कि सृष्टि की दृष्टि ने तुझ जैसा अत्याचार-पीड़ित कभी नहीं देखा होगा; अपने जीवन के प्रत्येक दिन तू विपदाओं के महासिंधु के तल में डूबा रहा। एक समय तू ज़ंजीरों और बेड़ियों से जकड़ा था, दूसरे समय तुझे शत्रुओं की तलवारों ने धमकाया, फिर भी, बावजूद इन सबके, तूने मनुष्य को पालन करने के लिये वे विधान दिये जो सर्वज्ञ, सर्वप्रज्ञ के द्वारा तुझकों मिले थे।

ऐसा हो जाये कि मेरी चेतना उन यातनाओं की बलि चढ़ जाये, जो तूने सही और मेरी आत्मा उन तीर्थ यात्रा की पाती कष्टों को भेंट चढ़ जाये, जो तूने भोगें हैं। मैं परमेश्वर से विनती करता हूँ तेरे और उन सबके नाम पर, जिनके मुखड़े, तेरे मुखड़े के प्रकाश से प्रकाशित हुए हैं और जिन्होंने तेरे प्रेम के वशीभूत आदेशित होकर सभी आज्ञाओं का अनुपालन किया है, कि तू अपने और अपने प्राणियों के बीच का पर्दा हटा दे, और मुझे इहलोक और परलोक के शुभमंगल का दान दे। तू, सत्य ही, सर्वशक्तिमान, सर्वप्रशंसित सर्वगरिमामय, सर्वक्षमाशील, सर्वदयालु है।

हे मेरे स्वामी, मेरे प्रभु! जब तक तेरा परम महान नाम रहे और तेरा परम पावन धर्म रहे तू अपने आशीष इस दिव्य तरूवर और इसकी शाखाओं, और इसकी डालियों और इसकी पत्तियों और इसकी तनाओं और इसकी प्रशाखाओं को देता रह। आक्रमणकारी के षड़यंत्रों और विपदा के तूफानों से इसकी रक्षा कर। सत्य ही तू सर्वसमर्थ, सर्वशक्तिशाली है। हे मेरे स्वामिन! मेरे परमात्मन्, तू अपने सेवकों एवं सेविकाओं को भी आशीष दे जिन्हें तेरा सान्निध्य प्राप्त हुआ है। सत्यमेव, तू सर्वकृपालु है, जिसकी कृपा अनन्त है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सदा क्षमाशील, परम उदार।

– Abdu’l-Bahá

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यह प्रार्थना अब्दुल-बहा द्वारा प्रकटित की गई है और उनकी समाधि पर पढ़ी जाती है। यह व्यक्तिगत प्रार्थना के रूप में भी प्रयुक्त की जाती है। अब्दुल-बहा ने कहा हैः

”…..जो भी इस प्रार्थना को विनम्रता और गहरी भक्ति से पढ़ेगा वह इस सेवक के हृदय को आनन्द, प्रसन्नता और उल्लास प्रदान करेगा,…..उससे साक्षात् मिलने के समान होगा।“

वह सर्वमहिमामय है!

हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! दीन और अश्रुपूरित मैं अपने याचक हाथ तेरी ओर फैलाता हूँ और अपना मुखड़ा तेरे द्वार की उस धूल से मंडित करता हूं, जो विद्वानों के ज्ञान और उन सबकी स्तुति से परे है, जो तेरा महिमागान करते हैं। अपने द्वार पर खड़े अपने दीन और विनीत सेवक को अनुग्रहपूर्वक देख, उस पर अपनी करुणा भरी आँखों की तीर्थयात्रा की प्रार्थना दयादृष्टि डाल और उसे अपनी अनन्त कृपा के सागर में निमग्न कर दे।

हे नाथ! यह तेरा दीनहीन सेवक है, विनीत, पूरी आस्था के साथ तेरे ही हाथों में अपने आपको समर्पित करते हुए, अत्यन्त भक्तिभाव से, आँसू भरे नयन के साथ तुझे पुकार रहा है और कह रहा है:

हे नाथ, मेरे परमेश्वर! मुझे अपने प्रियजनों की सेवा करने की कृपा प्रदान कर, अपने प्रति मेरे सेवाभाव को दृढ़ कर, अपनी पावनता के दरबार और महिमामय भव्य साम्राज्य में स्तुति और प्रार्थना के प्रकाश से मेरा मस्तक आलोकित कर दे और अपनी महिमा के साम्राज्य की प्रार्थना की ज्योति प्रदीप्त कर दे। अपने स्वर्गिक प्रवेश द्वार पर स्वार्थविहीन बनने में मेरी सहायता कर और अपनी पवित्र सीमा में सभी वस्तुओं से अनासक्त रहने में मुझे समर्थ बना दे। हे नाथ, निःस्वार्थता के पात्र से मुझे पान करने दे, निःस्वार्थता का ही वस्त्र मुझे पहना और इसके महासिंधु में निमग्न कर दे मुझको। बना दे मुझे अपने प्रियजनों की राहों की धूल और मुझे ऐसा दान दे कि मैं, अपनी आत्मा उस धरती के लिये बलिदान कर सकूँ जिस पर, तेरी राह में तेरे प्रियजन चले हों, हे सर्वोच्च महिमा के स्वामी!

इस प्रार्थना के द्वारा तेरा यह सेवक तुझे दिन-रात पुकारता है, इसके हृदय की अभिलाषा पूरी कर दे, हे स्वामी! इसके हृदय को प्रकाशित कर दे, इसके अंतर को आनंदित कर दे, इसकी ज्योति जला दे, ताकि यह तेरे धर्म और तेरे सेवकों की सेवा कर सके।

तू ही दाता है, करुणामय है, परम दयालु, है कृपालु!

– Abdu’l-Bahá

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दिवंगतों के लिए

हे मेरे परमेश्वर!

हे तू पापों को क्षमा करने वाले! वरदाता! व्याधियों को दूर करने वाले!

सत्य ही , मैं तुझसे याचना करना हूं कि जो इस भोतिक देहरूपी चोलो को छोड़कर उस आध्यात्मिक लोक में आरोहण कर गये हैं उनके पापों को क्षमा कर दे!

हे मेरे प्रभु! उन्हें भूलों से मुक्त करके पवित्र कर दे, उनके शोक का निवारण कर, और उनके अंधकार को ज्योति का रूप दे दे!

उन्हें आनन्द - उद्यान में प्रवेश दे, परम पावन जल से उन्हें स्वच्छ कर दे और उन्हें वरदान दे कि वे पर्वत शिखर पर तेरे वैभव के दर्शन कर सकें।

– Bahá’u’lláh

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दिवंगतों के लिये

दिवंगतों के लिये इस प्रार्थना का पाठ केवल वैसे मृतकों के लिये करें जिनकी उम्र पंद्रह वर्ष से अधिक है। ”यह एकमात्र प्रार्थना है, जो समूह में कही जाती है। यह प्रार्थना एक अनुयायी द्वारा कही जाती है जबकि अन्य सभी जो उस स्थान पर उपस्थित हैं, खड़े रहते हैं। इस प्रार्थना का पाठ करते समय किब्ले की ओर मुँह करना आवश्यक नहीं है।“

– Bahá’u’lláh

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हे मेरे परमेश्वर! ये तेरा सेवक है और तेरे सेवक का पुत्र है जिसने तुझ पर और तेरे चिन्हों में आस्था रखी है और तेरी ओर उन्मुख हुआ है तथा जो तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से अनासक्त हो चुका है। तू सत्य ही उनमें से है जो दया करते हैं, परम दयालु हैं।

हे तू, जो मनुष्यों के पापों को क्षमा करता है और उनके दोषों पर पर्दा डालता है, इसके साथ वैसा ही व्यवहार कर, जैसा कि तेरी अक्षय सम्पदाओं के स्वर्ग और तेरी कृपा के महासागर को शोभा देता है। अपनी उस सर्वातीत दया की परिधि में, जो धरती और स्वर्ग की स्थापना से पहले भी विद्यमान थी, इसे प्रवेश दे। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू ही है सदा क्षमाशील; परम उदार !

(तब वह छः बार ’अल्ला-ओ-आभा‘ के पावन नाम का उच्चारण करे और उसके बाद 19 बार नीचे दिये गये छन्दों का पाठ करे।)

हम सब सत्य ही, प्रभु की आराधना करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के सम्मुख नमन करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु के प्रति आस्थावान हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की स्तुति करते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु को धन्यवाद देते हैं। हम सब सत्य ही, प्रभु की इच्छा के प्रति धैर्यवान हैं ।

(यदि दिवंगत आत्मा नारी है, तो प्रार्थना करने वाला कहे ”यह तेरी सेविका और तेरी सेविका की पुत्री है“ इत्यादि!)

– Bahá’u’lláh

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महिमा हो तेरी, हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! अपनी अनन्त प्रभुसत्ता की शक्ति के सहारे जिसे तूने ऊपर उठाया है उसे गिरने न दे और जिसे तूने अपनी अनन्तता के मंडप तले प्रवेश के योग्य बनाया है उसे अपने से दूर न रख। हे मेरे प्रभु! क्या तू उसे अपने से दूर रखेगा, जिसे तूने अपनी प्रभुता की छांव दी है? हे मेरी आकांक्षा! क्या तू उसे अपने से दूर कर देगा जिसके लिये तू शरण रहा है। जिसे तूने ऊपर उठाया है उसे तू नीचे नहीं गिरा सकता, जो तुझे याद करता रहा, क्या तू उसे भुला सकता है?

महिमा हो, चतुर्दिक महिमा फैले तेरी! तू वह है जो अनन्तकाल से सम्पूर्ण सृष्टि का सम्राट रहा है और रहा है इसका गतिदाता और तू ही सदा रहेगा सभी सृजित वस्तुओं का स्वामी तथा नियंता। तू महिमावंत है, हे मेरे ईश्वर! यदि तू अपने सेवकों पर कृपा करना छोड़ देगा तो कौन उन पर कृपा करेगा? यदि तू अपने प्रियजनों को सहायता देना बंद कर देगा तो कौन है दूसरा जो सहायता दे सकेगा?

महिमा हो, चतुर्दिक महिमा फैले तेरी। तू अपने सत्य से सुशोभित है और सत्य ही, हम सभी तेरी आराधना करते हैं, तू अपने न्याय में मूर्तिमान है औैर सत्य ही, तू अपनी अनुकम्पाओं में प्रिय है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, संकटों में सहायक, स्वयंजीवी।

– Bahá’u’lláh

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हे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! निश्चय ही तेरा यह सेवक तेरी दिव्य सर्वोच्चता के सम्मुख विनीत, तेरी एकता के द्वार पर विनम्र है; इसने तुझमें और तेरे श्लोकों में विश्वास किया, तेरे पावन शब्दों का साक्ष्य दिया, तेरे प्रेम के प्रकाश से इसका पथ आलोकित हुआ, तेरे ज्ञान के महासागर की अतल गहराइयों में जो खोया रहा, जो तेरे पवन-झकोरों की ओर बढ़ा, जिसने तुझ पर भरोसा किया, जो तेरी ओर उन्मुख हुआ, जिसने तेरी आराधना की और जो तेरी क्षमा के लिये आश्वस्त है।

इसने अपना भौतिक चोला छोड़ दिया है और इस चाह के साथ कि तुझसे मिलन होगा, अमरता के साम्राज्य की ओर उड़ चला है।

दिवंगतों के लिये ईश्वर! इसे महिमामंडित कर, अपनी सर्वोच्च दया के मंडप तले इसे आश्रय दे, अपने महिमाशाली स्वर्ग में प्रवेश करा और अपनी गुलाब वाटिका में इसके अस्तित्व को सुनिश्चित कर, ताकि रहस्यों के लोक में यह प्रकाश-सिंधु में निमग्न हो जाये। सत्य ही तू है उदार, शक्तिशाली, क्षमादाता और दानी।

हे मेरे परमेश्वर! हे तू पापों को क्षमा करने वाले ! वरदाता ! व्याधियों को दूर करने वाले ! सत्य ही, मैं तुझसे याचना करता हूँ कि जो इस भौतिक देहरूपी चोले को छोड़कर उस आध्यात्मिक लोक में आरोहण कर गये हैं उनके पापों को क्षमा कर, हे मेरे प्रभु!

हे मेरे प्रभु! उन्हें भूलों से मुक्त करके पवित्र कर दे, उनके शोक का निवारण कर और उनके अंधकार को ज्योति का रूप दे दे। उन्हें आनन्द उद्यान में प्रवेश दे, परम पावन जल से उन्हें स्वच्छ कर दे और उन्हें वरदान दे कि वे उस पर्वत शिखर पर तेरे वैभव के दर्शन कर सकें।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8320 (bpn8320)

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दिव्य योजना की पाती से

हे तू अतुलनीय परमेश्वर! हे तू दिव्य साम्राज्य के स्वामी! ये आत्माएँ तेरी स्वर्गिक सेना हैं। इनकी सहायता कर और उस ’सर्वोच्च सभा‘ के सैन्य समूहों द्वारा उन्हें विजयी बना, जिससे उनमें से प्रत्येक सैनिक समान बन सकें और देश-देशांतर को ईश्वर के प्रेम और दिव्य शिक्षाओं के प्रकाश द्वारा जीत सके। हे परमेश्वर! तू उनका सम्बल बन और बीहड़ बियाबान में, पर्वत पर, घाटी में, वनों-मैदानों में और समुद्रों में तू उनका अंतरंग मित्र बन, जिससे वे दिव्य साम्राज्य और पावन चेतना के उच्छवास की शक्ति के द्वारा ऊँची पुकार लगा सकें। वस्तुतः, तू शक्तिशाली, सामर्थ्यशाली और सर्वशक्तिमान है और तू ही है प्रज्ञावंत, सब की सुनने वाला और देखने वाला।

*(पर्वत, मरुभूमि, समतल, अथवा समुद्र की राह जो कोई भी शिक्षण के उद्देश्य से भ्रमण कर रहा हो, उसे यह प्रार्थना करनी चाहिये।)

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8687 (bpn8687)

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हे ईश्वर! हे परमेश्वर! तू देखता है मेरी दुर्बलता, दीनता और विनम्रता को, फिर भी तेरी शक्ति और सामर्थ्य में भरोसा रखते हुए, मैंने तुझमें विश्वास किया है और तेरे सेवकों के बीच तेरी शिक्षाआें के प्रसार के लिये मैं उठ खड़ा हुआ हूँ। हे नाथ, मैं एक पंख टूटा पंछी हूँ और तेरे असीम अंतरिक्ष में उड़ान भरना चाहता हूँ। तेरी अनुकम्पा और कृपा, तेरी सम्पुष्टि और सहायता के बिना मेरे लिये ऐसा करना भला कैसे सम्भव होगा? हे प्रभु! मेरी दुर्बलता पर दया कर और अपनी सामर्थ्य की शक्ति मुझे दान दे। हे स्वामिन्! यदि पावन चेतना के उच्छ्वास सर्वाधिक निर्बल प्राणियों को भी सम्पुष्टि प्रदान कर दें तो वह जो भी चाहेगा प्राप्त कर लेगा, जो भी कामना करेगा उसे पा लेगा। निश्चय ही तूने पहले भी अपने सेवकों की सहायता की है। वे दुर्बलतम् प्राणी थे, तेरे अकिंचन सेवक और धरती पर निवास करने वालों में निरीहतम, लेकिन तेरी कृपा और शक्ति के द्वारा उन्होंने उनसे भी ऊँचा स्थान पा लिया, जो मानवजाति के बीच अत्यन्त प्रतापशाली और प्रतिष्ठित माने जाते थे। पहले पतंगों के समान थे वे, बन गये शाही बाज, पतली जलधारा के समान थे वे, बन गये समुद्र से विशाल, क्योंकि तुम्हारी कृपा के सहारे वे मार्गदर्शन के क्षितिज के चमकते सितारे बन गये, अमरता की गुलाब वाटिका के चहकते पंछी बन गये, ज्ञान और विवेक के जंगलों के दहाड़ते सिंह बन गये और महासागरों में तैरते महामत्स्य बन गये।

निश्चय ही तू करुणामय, शक्तिसम्पन्न, सार्मथ्यशाली और दयालुआें में सर्वाधिक दयालु है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8688 (bpn8688)

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हे प्रभु, मेरे परमेश्वर! गुणगान हो तेरा, शत-शत नमन तुझे। तूने ही दिखलाई है राह मुझे उस राजमार्ग की जो सीधा है, किन्तु है बहुत लम्बा पथ; इस पथ पर चलने के योग्य बनाया है तूने ही, मेरी आँखों को नया प्रकाश दिया है अपनी आभा का, रहस्यों के साम्राज्य से आने वाले पावन पक्षियों के कलरव को सुनने वाले कान दिये हैं तूने ही और न्यायनिष्ठों के बीच अपने प्रेम से विभोर किया है तूने ही। हे प्रभु! अपनी चेतना के उच्छ्वासों से मेरा रोम-रोम भर दे कि मैं देश-देशान्तर में सम्पूर्ण मानवजाति को तेरे आगमन का शुभ संदेश दे सकूँ, पृथ्वी पर तेरे साम्राज्य की स्थापना की बात बता सकूँ। हे प्रभु, मैं निर्बल हूँ, अपनी शक्ति और सामर्थ्य से मुझे सबल बना। मैं अक्षम हूँ, अपनी स्तुति और गुणगान करने में मुझे सक्षम बना। मैं अधम हूँ, अपने साम्राज्य में प्रवेश देकर मुझे सम्मानित कर; मैं तुझसे अलग-थलग पड़ गया हूँ, अपनी दयालुता की देहरी तक पहुँचने में मेरी सहायता कर। हे प्रभु! मुझे एक देदीप्यमान दीपक बना दे, एक जगमगाता हुआ सितारा बना दे, फलों से भरा एक ऐसा वृक्ष बना दे जिसकी शाखाएँ फैलें। सत्य ही, तू शक्तिशाली, बलशाली, और अबाधित है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8689 (bpn8689)

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हे परमेश्वर! हे परमेश्वर! यह एक पंख टूटा पंछी है और इसकी उड़ान बहुत धीमी है….इसकी सहायता कर कि यह समृद्धि और मुक्ति के सर्वोच्च शिखर पर उड़ान भर सके, इस असीम अंतरिक्ष में परम आनन्द और सुख सहित सर्वत्र विचरण कर सके, सभी देशों-प्रदेशों में तेरे सर्वोपरि नाम का मधुगान गुंजरित कर सके, तेरी पुकार सुन सके और तेरे मार्गदर्शन के संकेतों को समझ सके। हे प्रभु, मैं अकेला, एकाकी और दीन हूँ। तेरे अतिरिक्त मेरा कोई पालनहार नहीं, अवलम्बन नहीं; तेरे अतिरिक्त कोई और सहारा नहीं है। स्वर्गदूत के समूहों द्वारा मेरी सहायता कर; अपने वचनों के प्रसार में मुझे विजयी बना और अपने लोगों के बीच तेरे ज्ञान का प्रसार कर सकूँ, मुझे इस योग्य बना। सत्य ही, तू निर्बल का बल; और असहायों का सदा सहाय है। सत्य ही तू शक्तिशाली, बलशाली है और है अबाधित।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8690 (bpn8690)

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(ईश्वर की सुरभि का प्रसार करने वालों को प्रत्येक सुबह इस प्रार्थना का पाठ करना चाहिये।)

हे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! तू देखता है इस निर्बल को, तेरी स्वर्गिक शक्ति की याचना करते हुए, इस निर्धन को, तेरी दैवी निधियों की कामना करते हुए इस प्यासे को, अनन्त जीवन-निर्झरनी की इच्छा लिये हुए इस पीड़ित को, उस प्रतिज्ञापित आरोग्य की अभ्यर्थना करते हुए, जो तूने अपनी असीम कृपा के द्वारा अपने उच्च साम्राज्य में अपने चुने हुए जनों के लिये नियत किया है। हे ईश्वर, तेरे अतिरिक्त मेरा कोई सहायक नहीं, तेरे अतिरिक्त मेरा कोई आश्रय नहीं, तेरे अतिरिक्त मेरा कोई पालनहार नहीं। अपने देवदूतों द्वारा मेरी सहायता कर कि मैं तेरी पावन सुरभि सर्वत्र फैला सकूँ और देश-देशांतर में तेरे चुने हुए लोगों के बीच तेरी शिक्षाओं का प्रसार कर सकूँ। हे मेरे प्रभु! मुझे अपने सिवा अन्य सबसे अनासक्त होने की शक्ति दे, तेरी कृपा की डोर कसकर थामे रहूँ ऐसी भक्ति दे, तेरे धर्म के प्रति पूरी तरह समर्पितरहूँ , ऐसी निष्ठा दे, तेरे प्रेम में पगूं और तूने अपने पावन ग्रंथ में जो भी निर्धारित किया है उसका पालन कर सकूँ, ऐसी दृढ़ता दे। सत्य ही, तू शक्तिशाली है, है सामर्थ्यवान और सर्वसम्पन्न।

– Abdu’l-Bahá

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दृढ़ता

प्रतापशाली हो तेरा नाम, हे मेरे नाथ, मेरे परमेश्वर! तेरी उस शक्ति के नाम पर, जिसने समस्त सृष्टि को आवृत्त किया है, और तेरी उस सम्प्रभुता के नाम पर, जो सम्पूर्ण सृष्टि से परे है, और तेरे विवेक में लुप्त उस शब्द के नाम पर, जिसके द्वारा तूने स्वर्ग और धरती की सृष्टि की है, मैं याचना करता हूँ, ऐसा वर दे कि तेरे लिये अपने प्रेम में हम दृढ़ रह सकें, तुम्हारी प्रसन्नता के अनुकूल आज्ञा पालन में अडिग बनें, तेरी छवि अपलक नेत्रों से निहार सकें और तेरी महिमा का गुणगान कर सकें।

हे मेरे परमेश्वर ! देश-विदेश में तेरे प्राणियों के बीच तेरे नाम का प्रकाश फैलाने और तेरे साम्राज्य में तेरे धर्म की रक्षा करने की हमें शक्ति दे। सदा रहा है तेरा स्वतंत्र अस्तित्व और तू ऐसा ही रहेगा सदासर्वदा, तुम्हारे प्राणी तुम्हारा स्मरण करें, न करें! तुझको ही मैने अपनी पूरी आस्था समर्पित की है, तेरी ओर ही मैं उन्मुख हुआ हूँ, तेरे प्रेममय विधान की डोर को मैंने दृढ़ता से थाम रखा है, और तेरी कृपा की छत्रछाया की ओर मैंने अपने पाँव बढ़ाये हैं। मुझे अपने द्वार के बाहर रख कर निराश मत कर, हे मेरे परमेश्वर! अपनी दया मुझसे दूर मत रख, क्योंकि मैं केवल तेरी ही कामना करता हूँ। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, सदा क्षमाशील, सर्वकृपालु। स्तुति हो तेरी हे तू, जो उनका प्रियतम है, जिन्होंने तुझे जाना है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8310 (bpn8310)

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हे तू, जिसकी निकटता है मेरी कामना, जिसका सान्निध्य है मेरी आशा, जिसका स्मरण है मेरी आकांक्षा, जिसकी महिमा का दरबार है मेरी मंजिल, जिसका निवास ही है मेरा लक्ष्य, जिसका नाम है मेरा रोग-निवारक, जिसका प्रेम है मेरे हृदय की शक्ति, जिसकी सेवा मेरी है सर्वोच्च अभिलाषा; मैं तेरे उस नाम के द्वारा जिसके द्वारा तूने, तुझे पहचानने वालों को अपने ज्ञान की परम उदात्त ऊँचाइयांं तक उड़ने में समर्थ बनाया है, और भक्तिपूर्वक तेरी आराधना करने वालों को अपने अनुग्रह की परिधि में पहुँचने की शक्ति दी है, तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे तेरे मुखारविंद की ओर उन्मुख होने में, तुझ पर अपनी दृष्टि स्थिर रखने में, और तेरी महिमा की बात करने में सहायता दे।

मैं वह हूँ, हे मेरे नाथ! जिसने तेरे अतिरिक्त सब कुछ भुला दिया है और जो तेरी कृपा के दिवास्त्रोत की ओर उन्मुख हो गया है, जिसने तेरे दरबार की निकटता पाने की आशा में, तेरे अतिरिक्त अन्य सब का परित्याग कर दिया है। देख मुझे उस आसन की ओर निहारते हुए जो तेरे मुखारबिंद के प्रकाश की भव्यता से प्रकाशमान है। इसलिये, हमारे प्रियतम, मुझ तक वह भेज जो मुझे तेरे धर्म में दृढ़ रहने के योग्य बनाये, जिससे नास्तिकों के संदेह, मुझे तेरी ओर उन्मुख होने में बाधक न बन सकें। वस्तुतः, तू ही है शक्ति का परमेश्वर, संकटों में सहायक, सर्वप्रतापशाली, सामर्थ्यशाली!

– Bahá’u’lláh

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हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं पश्चाताप में तेरी ओर मुड़ा हूँ। वस्तुतः तू ही ह क्षमादाता, करुणामय। हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं तेरे पास लौट आया हूँ और सच, तू ही सदा क्षमाशील, कृपालु है। हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं तेरी कृपा की डोर से बंध गया हूँ। तेरे ही पास है स्वर्ग और धरती की सभी सम्पदाओं का अक्षय भ्ांडार। हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैंने तेरी ओर आने की शीघ्रता की है और सच, तू ही क्षमा करने वाला और अपार कृपा का स्वामी है। हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं तेरी कृपा की स्वर्गिक मदिरा का प्यासा हूँ। और सच तू ही दाता, कृपालु, सर्वसामर्थ्यवान, सर्वशक्तिशाली है। हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! मैं साक्षी देता हूँ कि तूने अपना धर्म प्रकट किया है, अपना वचन पूरा किया है और अपनी कृपा के स्वर्ग से उसे अवतरित किया है, जिसने तेरे कृपापात्रों के हृदय तेरी ओर खींच लिये हैं। सौभाग्य होगा उसका जिसने तेरी अटूट डोर को दृढ़ता से थाम लिया है और तेरे देदीप्यमान परिधान की छोर से जो दृढ़ता से बंधा है।

हे समस्त अस्तित्व के स्वामी! गोचर और अगोचर के सम्राट! मैं तेरी सामर्थ्य, तेरी भव्यता और तेरी सम्प्रभुता के नाम पर मांगता हूँ कि अपनी महिमा की लेखनी द्वारा मेरा नाम अपने उन श्रद्धालु भक्तों की श्रेणी में अंकित कर दे, जिन्हें पापियों के लम्बे लेख तेरे मुखारबिंद के प्रकाश की ओर उन्मुख होने से रोक नहीं पाये हैं। हे प्रार्थना सुनने वाले और उसका फल देने वाले परमेश्वर!

– Bahá’u’lláh

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जयघोष हो तेरा, हे मेरे ईश्वर। मेरे परम् प्रियतम! अपने धर्म में मुझे दृढ़ बना और वर दे कि मैं उनमें गिना जाऊँ जिन्होंने तेरी संविदा का उल्लंघन नहीं किया है और न ही अपनी कपोल कल्पना के देवों का अनुसरण किया है। मुझे समर्थ बना कि तेरे सान्निध्य में मैं सच्चाई का दामन थाम सकूँ, अपनी दया का दान दे और मुझे अपने उन सेवकों में शामिल होने दे जो भय नहीं करते, न ही चिन्तातुर होते हैं। मुझें मेरे हाल पर न छोड़, हे ईश्वर, न ही मुझे उसे पहचानने से वंचित कर जो तेरा ही प्रतिरूप है और न ही मुझे उनमें गिन जो तुझसे विमुख हो चुके हैं। हे मेरे प्रभु! मुझे उनमें गिन जिन्होंने तेरे सौन्दर्य को पहचाना है, जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर करने का सौभाग्य प्राप्त किया है और जो अपने समर्पण का एक पल भी सम्पूर्ण सृष्टि के साम्राज्य के बदले देना पसंद नहीं करेंगे। दया कर, हे प्रभु, विशेषरूप से तब जब तेरी धरती के लोग राह भटक गये हैं, घातक दोषों से भर गये हैं। हे मेरे ईश्वर, मुझे वह दे जो तेरी दृष्टि में शुभ और शोभनीय है। तू, सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, उदार, करुणामय और सदा क्षमाशील है।

वर दे, हे मेरे प्रभु! कि मैं उनमें न गिना जाऊँ जो कान रहते सुन नहीं पाते, आँख रहते देख नहीं पाते, जिह्वा होते हुए भी मूक बने बैठे हैं और जिनके हृदय कुछ भी समझने में विफल हो गये हैं। हे प्रभु, मुझे अज्ञानता की अग्नि और स्वार्थी इच्छाओं से मुक्त कर, अपनी सर्वोच्च दया के घेरे में रहने दे और मुझे वह दे जो तुमने अपने प्रिय पात्रों के लिये निर्धारित किया है। तू जो चाहे करने में समर्थ है। सत्य ही तू, संकटमोचन, स्वयंजीवी है।

– Báb

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स्तुत्य और महिमावंत है तू, हे परमात्मन्! तेरा पावन सान्निध्य प्राप्त करने का दिवस शीघ्र आये, ऐसा वर दे। अपने प्रेम और प्रसन्नता की शक्ति से हमारे हृदय उल्लसित कर दे और हम स्वेच्छा से तेरी इच्छा और आदेश के प्रति समर्पित हो सकें, ऐसी दृढ़ता प्रदान कर। वस्तुतः तेरे ज्ञान के वृत्त में वे सब हैं, जिनकी रचना तूने की है और जिनकी रचना तू करेगा। तेरी स्वर्गिक शक्ति उन सब के अनुभव से परे है, जिनको तूने अस्तित्व दिया है और जिन्हें तू अस्तित्व देगा। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई नहीं है, जिसकी आराधना की मेरी कामना है। तेरे अतिरिक्त अन्य नहीं है कोई, जो स्तुत्य है। तेरी सुप्रसन्नता के अतिरिक्त नहीं है कुछ भी जो प्रिय है मुझे। वस्तुतः; तू ही है सर्वोपरि शासक, परम् सत्य, संकटमोचन, स्वयंजीवी।

– Báb

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हे नाथ, मेरे परमात्मन्! अपने प्रियजनों को अपने धर्म में अडिग रहने, अपने पथ पर चलने, प्रभुधर्म में दृढ़ रहने में सहायता दे। उन्हें अपनी कृपा प्रदान कर कि वे अहंकार और वासना के आघातों को सह सकें और तेरे दिव्य मार्गदर्शन का अनुसरण कर सकेंं। तू शक्तिशाली, कृपालु, स्वयंजीवी, उदात्त, करुणामय, सर्वसमर्थ, सर्वदयालु है।

– Abdu’l-Bahá

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पति के लिये

हे मेरे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! तेरी यह सेविका, अपना भरोसा तुझ पर रखकर, तेरी ओर उन्मुख हो कर, तुझसे याचना करती हुई तुझे पुकार रही है कि अपनी स्वर्गिक कृपा उस पर बरसा दे, उसके समकक्ष अपने आध्यात्मिक रहस्यों को प्रकट कर दे और उस पर अपना परमात्म प्रकाश डाल। हे मेरे स्वामिन्! मेरे पति की आँखों को देखने की शक्ति प्रदान कर। तू उसके हृदय को अपने ज्ञान के प्रकाश से आनन्दित कर दे, तू उसका मन अपने ज्योतिर्मय सौन्दर्य की ओर आकर्षित कर ले, उसकी चेतना को अपनी भव्यता के दर्शन करा उसे उल्लसित कर दे। हे प्रभु! उसकी आँखों के सामने से परदा हटा दे, उस पर अपनी भरपूर कृपा की वर्षा कर, अपने प्रेम की मदिरा से उसे दीवाना बना दे, उसे अपने देवदूतों में से एक बना दे जो चलते तो धरा पर हैं लेकिन जिनकी आत्माएँ परमोच्च स्वर्गों मेंं उड़ती हैं। उसे तेरे जनो के मध्य तेरी प्रज्ञा के प्रकाश से चमकता हुआ देदीप्यमान दीपक बना दे। वस्तुतः तू अनमोल, सदा कृपालु, मुक्तहस्त दाता है।

– Abdu’l-Bahá

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परीक्षा और सहायता

हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! अपनी कृपा और उदारता से मुझे शोक-मुक्त कर दे और अपनी सत्ता और शक्ति से मेरी वेदना को दूर कर दे। हे मेरे परमेश्वर! देख रहा है तू कि मैं ऐसे समय में तेरी ओर उन्मुख हुआ हूँ जब दुःखों ने मुझे चारों ओर से घेर लिया है। तू स्वामी है समस्त अस्तित्व का, सभी गोचर अगोचर पदार्थों पर तेरी छत्रछाया है। मैं याचना करता हूँ तुझसे, तेरे उस नाम पर, जिसके द्वारा तूने मानव-हृदय और आत्माओं को अपने अधीन किया है। मैं याचना करता हूँ तेरी दया के महासागर की उन तरंगों के नाम पर और तेरी असीम कृपालुता के दिवानक्षत्र की प्रभा के नाम पर, कि तू मेरी गिनती उनमें कर जिन्हें कोई भी वस्तु तेरी ओर उन्मुख होने से रोक नहीं पाई है। हे तू जो सभी नामों का स्वामी, रचयिता है सभी स्वर्गों का। हे मेरे स्वामी तू वह सब देख रहा है जो तेरे दिवसों में मुझ पर टूट पड़ा है। उसके द्वारा मैं तुझसे प्रार्थना करता हूँ जो तेरे नामों का अरुणोदय और तेरे गुणों का उद्गम स्थल है, कि मेरे लिये उसका विधान कर जो मुझे तेरी सेवा में उठ खड़े होने और तेरी महिमा का गान करने के योग्य बना दे। वस्तुतः, तू ही है सर्वसामर्थ्यवान, सर्वशक्तिशाली, जो सब की प्रार्थना सुनता है। तेरे मुखारविन्द के प्रकाश के नाम पर मैं तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे मेरे कार्यों में सिद्धि दे, मुझे ऋण-मुक्त कर और मेरी आवश्यकताओं को पूरा कर। तू वह है, जिसकी शक्ति और जिसकी सत्ता का प्रमाण प्रत्येक वाणी ने दिया है, जिसकी विभूति और जिसकी प्रभुसत्ता को हर विवेकयुक्त हृदय ने स्वीकारा है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, जो सब की सुनता है, सब का दुःख हरता है।

– Bahá’u’lláh

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हे मेरे परमेश्वर! मैं तुझे तेरी शक्ति की सौगंध देता हूँ कि परीक्षाओं की घड़ी में मुझको कोई क्षति न होने दे और असावधानी के पलों में अपनी प्रेरणा से मेरे पगों को तू सही राह दिखा। तू ही है परमेश्वर, जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ; तेरी इच्छा की राह में कोई बाधा नहीं बन सकता है।

– Báb

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कहो, परमेश्वर सर्वोपरि परिपूरक है, समस्त स्वर्गों में और धरती पर ऐसा कुछ भी नहीं, जिसे नहीं कर सकता हो वह पूरा। वस्तुतः वह स्वयं में ज्ञाता, अवलम्बनदाता, सर्वशक्तिशाली है।

– Báb

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क्या ईश्वर के अतिरिक्त कठिनाइयां को दूर करने वाला अन्य कोई है? कह दो, ईश्वर का गुणगान हो! वही ईश्वर है! सभी उसके सेवक हैं तथा सभी उसके आदेश से प्रतिबन्धित हैं।

– Báb

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हे स्वामी! तू प्रत्येक वेदना का हर्ता है और प्रत्येक व्याधि को दूर करने वाला है। तू वह है जो प्रत्येक शोक को दूर करता है, प्रत्येक दास को मुक्त करता है और प्रत्येक आत्मा का उद्धारकर्ता है। हे स्वामी! अपनी दया के द्वारा मुझे मुक्ति प्रदान कर और अपने ऐसे सेवकां में गिन जिन्हांने मोक्ष पा लिया है।

– Báb

Prayer bpn8337 (bpn8337)

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हे मेरे नाथ, मेरे परमात्मन्! विपत्ति में मेरा आश्रय, आपदा में मेरे रक्षक और विश्वास, एकाकीपन में मेरे सहचर, वेदना में मेरी सांत्वना और अकेलेपन में मेरे एक स्नेहिल सखा, मेरे दुःखों की पीड़ा को हरने वाले और मेरे पापों को क्षमा करने वाले!

मैं पूरी तरह तेरी ओर उन्मुख हूँ और अपने समर्पित हृदय से, अपने मन में और अपनी वाणी से तुझसे अत्यन्त भावभीने शब्दों में याचना करता हूँ कि मुझे उन सबसे बचा जो तेरी दिव्य एकता के इस युगचक्र में तेरी इच्छा के विपरीत हैं, मुझे उन सभी कलुषों से निर्मल कर जो तेरे कृपावृक्ष की छाँव पा सकने में बाधक हैं ताकि मैं निष्कलुष, निष्पाप रह सकूँ।

दया कर, हे स्वामी! निर्बल पर, स्वस्थ कर रोगी को और तृप्त कर जलती तृषा को। हर्षित कर उस वक्ष को जिसमें तेरे प्रेम की ज्वाला सुलगती हो, उसे अपने स्वर्गिक प्रेम की लौ और चेतना से प्रज्ज्वलित कर।

दिव्य एकता के इन वितानों को अपनी पावनता के वस्त्रों से सजा और अपनी अनुकम्पा का ताज मुझे पहना दे।

मेरे मुखड़े को अपनी कृपा के प्रभामंडल से उद्भासित कर और अपनी इस पावन देहरी की सेवा करने में कृपापूर्वक मेरी सहायता कर।

मेरे हृदय को अपने प्रणियों के प्रेम से आप्लावित कर दे ताकि मैं तेरी दया का चिन्ह, तेरे अनुग्रह का प्रतीक और तेरे प्रियजनों में स्नेह-भावना बढ़ाने वाला बन जाऊँ, तेरे प्रति समर्पित हो तेरा ही स्मरण करूँ, अपने अहम् को भूलकर जो कुछ तेरा है उसके प्रति सदा सजग रहूँ।

हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर ! अपनी क्षमा और अपने अनुग्रह के पवन-झकोरों को मुझ तक आने से न रोक और मुझे अपनी सहायता और कृपा के स्रोतों से वंचित मत कर।

अपनी सुरक्षा के पंखों की छाया में मुझे नीड़ बनाने दे और मुझ पर अपने सर्वरक्षक नेत्र की कृपादृष्टि डाल। मेरी वाणी को जड़ता से मुक्त कर कि तेरे नाम की महिमा गा सकूँ, ताकि मेरी वाणी विराट सभाओं में उच्च स्वर में निनादित हो और मेरे होठों से तेरी स्तुति का प्रबल प्रवाह बह निकले।

तू सत्य ही अनुकम्पाशाली, महिमावान, समर्थ और सर्वशक्तिमान है।

– Abdu’l-Bahá

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वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

– Abdu’l-Bahá

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वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

– Abdu’l-Bahá

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वह करुणामय, सर्वकृपालु है! हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! तू मुझे देखता है, तू मुझे जानता है, तू ही मेरी शरण और मेरा आश्रय है, मैने तेरे अतिरिक्ति किसी और की न कामना की है, न करूंगा। तेरे प्रेम-पथ के सिवा मैंने अन्य किसी पथ पर न पाँव रखा है न रखूँगा। निराशा की अंधियारी रात में मेरी आँखें, अपेक्षा और आशा से भरी हुई, तेरे असीम अनुग्रह के प्रभात की ओर लगी हैं और अरुणोदय की बेला में मेरी मुरझाई हुई आत्मा तेरे सौन्दर्य और तेरी परिपूर्णता के स्मरण से नवस्फूर्ति और शक्ति प्राप्त करती है। जिसे तेरी दया का सहारा है वह एक बूंद भी हो तो असीम सिंधु बन जायेगा और जिस पर तेरी स्नेहिल कृपालुता का उमड़ता प्रवाह सहायक हो वह तुच्छ धूलकण होकर भी तेजस्वी नक्षत्र सा जगमगायेगा।

हे तू विशुद्धता की चेतना ! हे तू जो असीम आशीषों का दाता है। अपने इस सम्मोहित, प्रकाशित सेवक को अपनी सुरक्षा में आश्रय दे।

इस अस्तित्व के लोक से उसे निज प्रेम में दृढ़ और अडिग रहने में सहायता दे और वर दे कि इस पंख टूटे पंछी को स्वर्गिक वृक्ष पर स्थित तेरे दिव्य नीड़ में शरण और आश्रय मिले।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8347 (bpn8347)

bahaiprayers.net 8347

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परीक्षाएँ और कठिनाइयाँ

जो तेरे समीप हैं उनके लिये कठिनाइयाँ रोग-निवारक औषधि हैं, जो तुझे चाहते हैं उनकी बस यही एक कामना है कि तू उन्हें मुक्ति दे, जो तुझे पाना चाहते हैं उनके हृदय तेरी परीक्षाओं के लिये तरसते हैं, जिन्होंने तेरे सत्य को जान लिया है उनके लिये आशा की बस एक किरण है तेरा निर्णय। तेरा दिव्य माधुर्य और तेरे मुखमंडल की महिमा के नाम पर मैं तुझसे याचना करता हूँ कि अपने उच्च साम्राज्य से हमारे लिये वह भेज जो तेरे समीप आने में हमें समर्थ बनाये। हे मेरे ईश्वर, अपने धर्म में मुझे दृढ बना, अपने ज्ञान के प्रकाश से हमारे हृदयों को आलोकित कर दे और अपने नाम की चमक से हमारे मन-प्राण दीप्त कर दे।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8342 (bpn8342)

bahaiprayers.net 8342

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महिमा हो तेरी, मेरे परमेश्वर! यदि वे दुःख न होते जो तेरे पथ में सहने पड़ते हैं तो तेरे सच्चे प्रेमी पहचाने जाते, और यदि वे संकट न होते जो तेरे प्रेम के कारण उठाने पड़ते हैं तो, तेरी चाह रखने वालों के पद कैसे प्रकट होते? तेरी सामर्थ्य मेरी साक्षी है कि जो भी तेरी आराधना करते हैं, उन सबके सहचर, उनके बहाए हुए आँसू हैं और तेरी आकांक्षा करने वालों को दिलासा देने वाली हैं उनके मुख से निकली आहें। जो तुझसे मिलने की शीघ्रता करते हैं, उनका आहार उनके टूटे हुए दिल के टुकड़े हैं।

कितना मधुर स्वाद देती है मुझको तेरे पथ में भोगी गई मृत्यु की कटुता और कितने अनमोल हैं मेरी दृष्टि में तेरी वाणी के यशोगान के बदले लगने वाले तेरे शत्रुओं के तीर। अपने धर्म की राह में तू जो चाहे वह सब गरल मुझको पीने दे। अपने प्रेम में वह सब सहने दे मुझको, जिसका तूने आदेश दिया है। तेरी महिमा की सौगंध! जो तू चाहे बस वही मेरी भी इच्छा है और प्रिय है मुझको बस वही जो तुझको प्रिय है। हर समय बस तुझमें ही रखी है मैंने अपनी सम्पूर्ण आस्था।

मैं तुझसे याचना करता हूँ, हे मेरे परमेश्वर, कि तू इस धर्म के ऐसे सहायकों को उत्पन्न कर जो तेरे नाम और सम्प्रभुता के योग्य हों, ताकि वे तेरे प्राणियों के बीच मुझे स्मरण कर सकें और तेरी पृथ्वी पर विजय-पताका फहरा सकें। जैसा तुझे अच्छा लगे वैसा करने में तू समर्थ है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, संकट में सहायक, स्वयंजीवी।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8344 (bpn8344)

bahaiprayers.net 8344

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प्रतापशाली है तू, हे नाथ, हे मेरे परमेश्वर! अंतर्दृष्टि से सम्पन्न हर व्यक्ति तेरी सम्प्रभुता और तेरे अधिराज्य को करता है स्वीकार और देख पाता है प्रत्येक विवेकशील नेत्र तेरे वैभव की महानता और सामर्थ्य की बाध्यकारी शक्ति।

उन्हें रोक सकने में असमर्थ हैं परीक्षाओं के प्रचंड पवन, जो निहार कर तेरी महिमा के क्षितिज को, पाते हैं आनन्द तेरी निकटता का; जिन्होंने तेरी इच्छा के प्रति स्वयं को पूरी तरह कर दिया है समर्पित, उन्हें तेरे दरबार से दूर रख पाने में या वहाँ पहुँचने में बाधा बनने में संकटों के झंझावात भी हो जाते हैं विफल। ऐसा लगता है कि उनके हृदय में प्रज्ज्वलित हैं तेरे प्रेम के दीपक और ललक उठी है तेरी मृदुलता की ज्योति उनके वक्ष में। विपदायें भी उन्हें तेरे धर्म से विमुख करने में असमर्थ हैं और भाग्य के उलट-फेर भी नहीं भटका सकते हैं उनको तेरी सुप्रसन्नता के पथ से।

मैं तुझसे याचना करता हूँ हे मेरे ईश्वर, उनके द्वारा और उनकी उन आहों के द्वारा जो तेरे वियोग में उनके हृदय से निकली हैं, कि उन्हें अपने विरोधियों के दुष्कृत्यों से सुरक्षित रख और उनकी आत्मा को उससे पोषित कर जिसका विधान तूने अपने उन प्रियजनों के लिये किया है जिन्हें कोई भय त्रस्त नहीं करता और जिन पर कोई विपदा नहीं आयेगी।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8345 (bpn8345)

bahaiprayers.net 8345

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हे मेरे परमेश्वर, तू भलीभांति जानता है कि सभी दिशाओं से मुझ पर विपदायें बरस पड़ी हैं और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई नहीं जो उन्हें दूर कर सकता है या कम भी कर सकता है। तेरे प्रति अपने प्रेम के कारण मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू किसी भी आत्मा को तब तक विपदाग्रस्त नहीं करता जब तक अपने पावन स्वर्ग में उसके स्थान को ऊँचा करने का निर्णय तू नहीं ले लेता और जब तक यह भौतिक जीवन जीने के लिये उसके दिल को मजबूत करने का इरादा तेरा नहीं होता। अपनी शक्ति के सहारे तू ये सुरक्षा-कवच उसे इसलिये प्रदान करता है कि दुनिया के मिथ्या अभिमान के प्रति उसका झुकाव न हो जाये। यह सच है और तू भलीभाँति परिचित भी है कि दुनिया और स्वर्गों के समस्त सुख से भी अधिक तेरे नाम के स्मरण में मैं प्रसन्नता का अनुभव करूँगा।

हे मेरे ईश्वर, अपने प्रेम और अपनी आज्ञाओं के पालन में मेरे दिल को मजबूत कर और ऐसा वर दे कि तेरे विरोधियों की छाया से मैं पूरी तरह मुक्त रह सकूँ। सत्य ही, मैं तेरी महिमा के नाम पर शपथ लेता हूँ कि तेरे अतिरिक्त मैं किसी अन्य की समीपता की कामना नहीं करता और न ही तेरी दया के अतिरिक्त किसी अन्य की दया का पात्र ही बनना चाहता, न ही मुझे तेरे न्याय के अतिरिक्त किसी अन्य से न्याय पाने की अभिलाषा है।

तू परम् उदार है, हे स्वर्गों और धरा के प्रभु, सभी मनुष्यों के गुणगान से परे। तेरे आज्ञाकारी सेवकों को शांति प्राप्त हो और ईश्वर की महिमा बढ़े, तू ही है सभी लोकों का स्वामी !

– Báb

Prayer bpn8346 (bpn8346)

bahaiprayers.net 8346

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प्रभात

मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, हे मेरे ईश्वर! और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये उचित है कि वह तेरे संरक्षण के अभय स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। मेरे अन्तर्मन को भी, हे मेरे नाथ! अपने प्राकट्य के अरुणोदय की आभाओं द्वारा वैसे ही आलोकित कर दे जिस प्रकार तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा प्रकाशित किया है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8348 (bpn8348)

bahaiprayers.net 8348

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हे मेरे परमेश्वर और मेरे नाथ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस अरुणोदय बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरे आदेश की पुस्तक में विहित विधान के अनुसार ही तेरी एकमेवता का सूर्य तेरी इच्छा के क्षितिज से प्रकट होकर जगमगाया है और उसने सम्पूर्ण विश्व पर अपनी आभा बिखेर दी है।

स्तुति हो तेरी, हे मेरे परमेश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारी लिये वह भेज, हे मेरे नाथ! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रिय हैं, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान रूप से, इस लोक और आने वाले लोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें सुरक्षित रख उन सबसे जिन्हें तूने ही आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्त्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।

उसे आशीष दे हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों का अधिष्ठाता बनाया है और जिसके द्वारा तूने पुण्यात्मा और दुष्टों के बीच का भेद प्रकट किया है। अनुग्रहपूर्वक मुझे सहायता प्रदान कर कि हम तेरी इच्छा पर चलें, तेरे प्रेम में ढलें। हे मेरे प्रभु, उन्हें आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर हैं और उन्हें भी जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने तुझमें आस लगाई है और तेरा आह्वान सुना है। तू सत्य ही, सभी वस्तुओं का स्वामी और सम्राट है, और है सर्वोपरि।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8349 (bpn8349)

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मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, हे मेरे ईश्वर! और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये उचित है कि वह तेरे संरक्षण के अभय स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। मेरे अन्तर्मन को भी, हे मेरे नाथ! अपने प्राकट्य के अरुणोदय की आभाओं द्वारा वैसे ही आलोकित कर दे जिस प्रकार तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा प्रकाशित किया है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8352 (bpn8352)

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हे मेरे परमेश्वर और मेरे नाथ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस अरुणोदय बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरे आदेश की पुस्तक में विहित विधान के अनुसार ही तेरी एकमेवता का सूर्य तेरी इच्छा के क्षितिज से प्रकट होकर जगमगाया है और उसने सम्पूर्ण विश्व पर अपनी आभा बिखेर दी है।

स्तुति हो तेरी, हे मेरे परमेश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारी लिये वह भेज, हे मेरे नाथ! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रिय हैं, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान रूप से, इस लोक और आने वाले लोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें सुरक्षित रख उन सबसे जिन्हें तूने ही आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्त्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।

उसे आशीष दे हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों का अधिष्ठाता बनाया है और जिसके द्वारा तूने पुण्यात्मा और दुष्टों के बीच का भेद प्रकट किया है। अनुग्रहपूर्वक मुझे सहायता प्रदान कर कि हम तेरी इच्छा पर चलें, तेरे प्रेम में ढलें। हे मेरे प्रभु, उन्हें आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर हैं और उन्हें भी जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने तुझमें आस लगाई है और तेरा आह्वान सुना है। तू सत्य ही, सभी वस्तुओं का स्वामी और सम्राट है, और है सर्वोपरि।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8353 (bpn8353)

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मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, हे मेरे ईश्वर! और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये उचित है कि वह तेरे संरक्षण के अभय स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। मेरे अन्तर्मन को भी, हे मेरे नाथ! अपने प्राकट्य के अरुणोदय की आभाओं द्वारा वैसे ही आलोकित कर दे जिस प्रकार तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा प्रकाशित किया है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8357 (bpn8357)

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हे मेरे परमेश्वर और मेरे नाथ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस अरुणोदय बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरे आदेश की पुस्तक में विहित विधान के अनुसार ही तेरी एकमेवता का सूर्य तेरी इच्छा के क्षितिज से प्रकट होकर जगमगाया है और उसने सम्पूर्ण विश्व पर अपनी आभा बिखेर दी है।

स्तुति हो तेरी, हे मेरे परमेश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारी लिये वह भेज, हे मेरे नाथ! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रिय हैं, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान रूप से, इस लोक और आने वाले लोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें सुरक्षित रख उन सबसे जिन्हें तूने ही आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्त्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।

उसे आशीष दे हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों का अधिष्ठाता बनाया है और जिसके द्वारा तूने पुण्यात्मा और दुष्टों के बीच का भेद प्रकट किया है। अनुग्रहपूर्वक मुझे सहायता प्रदान कर कि हम तेरी इच्छा पर चलें, तेरे प्रेम में ढलें। हे मेरे प्रभु, उन्हें आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर हैं और उन्हें भी जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने तुझमें आस लगाई है और तेरा आह्वान सुना है। तू सत्य ही, सभी वस्तुओं का स्वामी और सम्राट है, और है सर्वोपरि।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8358 (bpn8358)

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मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, हे मेरे ईश्वर! और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये उचित है कि वह तेरे संरक्षण के अभय स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। मेरे अन्तर्मन को भी, हे मेरे नाथ! अपने प्राकट्य के अरुणोदय की आभाओं द्वारा वैसे ही आलोकित कर दे जिस प्रकार तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा प्रकाशित किया है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8359 (bpn8359)

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हे मेरे परमेश्वर और मेरे नाथ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस अरुणोदय बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरे आदेश की पुस्तक में विहित विधान के अनुसार ही तेरी एकमेवता का सूर्य तेरी इच्छा के क्षितिज से प्रकट होकर जगमगाया है और उसने सम्पूर्ण विश्व पर अपनी आभा बिखेर दी है।

स्तुति हो तेरी, हे मेरे परमेश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारी लिये वह भेज, हे मेरे नाथ! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रिय हैं, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान रूप से, इस लोक और आने वाले लोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें सुरक्षित रख उन सबसे जिन्हें तूने ही आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्त्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।

उसे आशीष दे हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों का अधिष्ठाता बनाया है और जिसके द्वारा तूने पुण्यात्मा और दुष्टों के बीच का भेद प्रकट किया है। अनुग्रहपूर्वक मुझे सहायता प्रदान कर कि हम तेरी इच्छा पर चलें, तेरे प्रेम में ढलें। हे मेरे प्रभु, उन्हें आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर हैं और उन्हें भी जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने तुझमें आस लगाई है और तेरा आह्वान सुना है। तू सत्य ही, सभी वस्तुओं का स्वामी और सम्राट है, और है सर्वोपरि।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8362 (bpn8362)

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मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, हे मेरे ईश्वर! और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये उचित है कि वह तेरे संरक्षण के अभय स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। मेरे अन्तर्मन को भी, हे मेरे नाथ! अपने प्राकट्य के अरुणोदय की आभाओं द्वारा वैसे ही आलोकित कर दे जिस प्रकार तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा प्रकाशित किया है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8366 (bpn8366)

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हे मेरे परमेश्वर और मेरे नाथ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस अरुणोदय बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरे आदेश की पुस्तक में विहित विधान के अनुसार ही तेरी एकमेवता का सूर्य तेरी इच्छा के क्षितिज से प्रकट होकर जगमगाया है और उसने सम्पूर्ण विश्व पर अपनी आभा बिखेर दी है।

स्तुति हो तेरी, हे मेरे परमेश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारी लिये वह भेज, हे मेरे नाथ! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रिय हैं, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान रूप से, इस लोक और आने वाले लोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें सुरक्षित रख उन सबसे जिन्हें तूने ही आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्त्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।

उसे आशीष दे हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों का अधिष्ठाता बनाया है और जिसके द्वारा तूने पुण्यात्मा और दुष्टों के बीच का भेद प्रकट किया है। अनुग्रहपूर्वक मुझे सहायता प्रदान कर कि हम तेरी इच्छा पर चलें, तेरे प्रेम में ढलें। हे मेरे प्रभु, उन्हें आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर हैं और उन्हें भी जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, जिन्होंने तुझमें आस लगाई है और तेरा आह्वान सुना है। तू सत्य ही, सभी वस्तुओं का स्वामी और सम्राट है, और है सर्वोपरि।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8369 (bpn8369)

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प्रभुधर्म की विजय

जयघोष हो तेरे नाम का, हे नाथ, मेरे परमेश्वर! अंधियारा छा गया है समस्त भू पर और दुष्ट शक्तियों ने घेर लिया है सभी राष्ट्रो को। इसमें भी मैं देखता हूँ तेरे ही विवेक को और पाता हूँ तेरे विधान की चमक।

वे जो तुझसे दूर आवरण में लिपटे हैं, समझ लिया है उन्होंने कि शक्ति है उनमें तेरे प्रकाश को बुझा देने की और तेरी अग्नि को मिटा देने की और तेरी कृपा के पवन झकोरों को रोक लेने की। किन्तु नहीं, तेरी प्रभुता मेरी साक्षी है यदि प्रत्येक विपदा तेरे विवेक और प्रत्येक अग्नि-परीक्षा तेरे मंगल-विधान का संवाहक नहीं बनाई गई होती तो हमारा विरोध करने का साहस कोई भी नहीं दिखाता, भले ही धरती तथा स्वर्ग की समस्त शक्तियाँ हमारे विरोध में खड़ी हो जातीं। यदि मैं तेरे विवेक के अद्भुत रहस्यों को, जो खुले पड़े हैं सम्मुख मेरे, प्रकट कर देता तो तेरे शत्रुओं के साम्राज्य विदीर्ण जाते। अतः, महिमा हो तेरे नाम की, हे मेरे परमेश्वर! याचना करता हूँ मैं तुझसे, तेरे परम महान नाम के द्वारा कि जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपने उस विधान के चारो ओर एकत्र कर जो तेरी इच्छा की सद्कृपा से प्रवाहित है, और उनके लिये वह भेज जो उनके हृदयों को आश्वस्त करे।

तू जो भी चाहता है वह करने में समर्थ है। तू ही वस्तुतः, संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8355 (bpn8355)

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जयघोष हो तेरे नाम का, हे नाथ, मेरे परमेश्वर! अंधियारा छा गया है समस्त भू पर और दुष्ट शक्तियों ने घेर लिया है सभी राष्ट्रो को। इसमें भी मैं देखता हूँ तेरे ही विवेक को और पाता हूँ तेरे विधान की चमक।

वे जो तुझसे दूर आवरण में लिपटे हैं, समझ लिया है उन्होंने कि शक्ति है उनमें तेरे प्रकाश को बुझा देने की और तेरी अग्नि को मिटा देने की और तेरी कृपा के पवन झकोरों को रोक लेने की। किन्तु नहीं, तेरी प्रभुता मेरी साक्षी है यदि प्रत्येक विपदा तेरे विवेक और प्रत्येक अग्नि-परीक्षा तेरे मंगल-विधान का संवाहक नहीं बनाई गई होती तो हमारा विरोध करने का साहस कोई भी नहीं दिखाता, भले ही धरती तथा स्वर्ग की समस्त शक्तियाँ हमारे विरोध में खड़ी हो जातीं। यदि मैं तेरे विवेक के अद्भुत रहस्यों को, जो खुले पड़े हैं सम्मुख मेरे, प्रकट कर देता तो तेरे शत्रुओं के साम्राज्य विदीर्ण जाते। अतः, महिमा हो तेरे नाम की, हे मेरे परमेश्वर! याचना करता हूँ मैं तुझसे, तेरे परम महान नाम के द्वारा कि जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपने उस विधान के चारो ओर एकत्र कर जो तेरी इच्छा की सद्कृपा से प्रवाहित है, और उनके लिये वह भेज जो उनके हृदयों को आश्वस्त करे।

तू जो भी चाहता है वह करने में समर्थ है। तू ही वस्तुतः, संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8361 (bpn8361)

bahaiprayers.net 8361

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जयघोष हो तेरे नाम का, हे नाथ, मेरे परमेश्वर! अंधियारा छा गया है समस्त भू पर और दुष्ट शक्तियों ने घेर लिया है सभी राष्ट्रो को। इसमें भी मैं देखता हूँ तेरे ही विवेक को और पाता हूँ तेरे विधान की चमक।

वे जो तुझसे दूर आवरण में लिपटे हैं, समझ लिया है उन्होंने कि शक्ति है उनमें तेरे प्रकाश को बुझा देने की और तेरी अग्नि को मिटा देने की और तेरी कृपा के पवन झकोरों को रोक लेने की। किन्तु नहीं, तेरी प्रभुता मेरी साक्षी है यदि प्रत्येक विपदा तेरे विवेक और प्रत्येक अग्नि-परीक्षा तेरे मंगल-विधान का संवाहक नहीं बनाई गई होती तो हमारा विरोध करने का साहस कोई भी नहीं दिखाता, भले ही धरती तथा स्वर्ग की समस्त शक्तियाँ हमारे विरोध में खड़ी हो जातीं। यदि मैं तेरे विवेक के अद्भुत रहस्यों को, जो खुले पड़े हैं सम्मुख मेरे, प्रकट कर देता तो तेरे शत्रुओं के साम्राज्य विदीर्ण जाते। अतः, महिमा हो तेरे नाम की, हे मेरे परमेश्वर! याचना करता हूँ मैं तुझसे, तेरे परम महान नाम के द्वारा कि जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपने उस विधान के चारो ओर एकत्र कर जो तेरी इच्छा की सद्कृपा से प्रवाहित है, और उनके लिये वह भेज जो उनके हृदयों को आश्वस्त करे।

तू जो भी चाहता है वह करने में समर्थ है। तू ही वस्तुतः, संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8367 (bpn8367)

bahaiprayers.net 8367

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महिमा हो तेरी, हे स्वामी, तू जिसने अपने आदेश की शक्ति से सभी सृजित वस्तुओं को अस्तित्व में लाया है।

हे स्वामी! जिन्हांने तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ त्याग दिया है, उनकी सहायता कर और उन्हें महान विजय प्रदान कर। हे स्वामी, अपने सेवकों की सहायता करने के लिये, उन्हें सहयोग और सहायता प्रदान करने के लिये, उन्हें महिमा से आच्छादित करने के लिये, उन्हें सम्मान एवं उच्चता प्रदान करने के लिये, उन्हें समृद्ध बनाने के लिये और अद्भुत विजय के द्वारा उन्हें विजयी बनाने के लिये, ऐसे देवदूतां को नीचे भेज जो स्वर्ग में और धरती पर तथा जो कुछ भी इनके मध्य है, में है।

तू उनका स्वामी है, स्वर्ग और धरती का स्वामी है और स्वामी है समस्त लोकों का। हे प्रभु, इन सेवकां की शक्ति के माध्यम से इस धर्म को बल प्रदान कर और संसार के सभी लोगों पर प्रभावी होने में इनकी सहायता कर; क्यांकि, वे सत्य ही, तेरे ऐसे सेवक हैं जिन्होंने स्वयं को तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से अनासक्त कर लिया है और वस्तुतः तू सच्चे अनुयायियों का रक्षक है।

हे स्वामी, अनुदान दे कि तेरे इस अलंघनीय धर्म के प्रति अपनी निष्ठा के माध्यम से उनके हृदय, उन सभी वस्तुओं से अधिक शक्तिशाली बन जायें, जो स्वर्ग में और धरती पर, तथा जो कुछ भी इनके मध्य है, में है; और हे स्वामी, अपनी अद्भुत शक्ति के चिन्हां से उनके हाथों को बलशाली बना ताकि वे समस्त मानवजाति के समक्ष तेरी शक्ति प्रकट कर सकें।

– Báb

Prayer bpn8360 (bpn8360)

bahaiprayers.net 8360

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हे नाथ अपनी दिव्य एकता के वृक्ष के शीघ्र विकास का विधान कर। हे स्वामी, अपनी सुप्रसन्नता की जलधार से इसे सींच और अपने दिव्य आश्वासन के प्रकटीकरण से इससे ऐसे फल उपजा जैसा तू अपने यशगान और महिमागान के लिये, अपनी स्तुति और आभार के लिये, अपने नाम के जयघोष के लिये, अपने सार तत्व की एकता के गुणगान के लिये और अपनी आराधना के समर्पण के लिये चाहता है! सब कुछ केवल तेरी मुट्ठी में है। परम सौभाग्यशाली हैं वे जिनके रक्त का तूने अपने अस्तित्व के वृक्ष को सींचने के लिये और अपनी पावन और अखण्ड वाणी को यशस्वी बनाने के लिये चुना है।

– Báb

Prayer bpn8363 (bpn8363)

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हे नाथ! धरती के सभी लोगां को अपने धर्म के स्वर्ग में प्रवेश पाने में सहायता कर, ताकि अस्तित्व में लाया गया कोई भी प्राणी, तेरी सुप्रसन्नता की सीमाओं से बाहर न रह पाये। अनन्तकाल से, तू वह करने में समर्थ रहा है जो तुझे प्रिय है और जो तेरी इच्छा है।

– Báb

Prayer bpn8365 (bpn8365)

bahaiprayers.net 8365

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हे नाथ! धरती के सभी लोगां को अपने धर्म के स्वर्ग में प्रवेश पाने में सहायता कर, ताकि अस्तित्व में लाया गया कोई भी प्राणी, तेरी सुप्रसन्नता की सीमाओं से बाहर न रह पाये। अनन्तकाल से, तू वह करने में समर्थ रहा है जो तुझे प्रिय है और जो तेरी इच्छा है।

– Báb

Prayer bpn8370 (bpn8370)

bahaiprayers.net 8370

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वह परमेश्वर है! हे नाथ मेरे ईश्वर, मेरे परम प्रियतम! ये वे सेवक हैं जिन्होंने तेरी पुकार सुनी है, तेरी वाणी, तेरे आह्वान पर ध्यान दिया है और विश्वास किया है तुझमें; ये साक्षी रहे हैं तेरी अद्भुत लीला के, स्वीकारा है इन्होंने तेरे प्रमाणों को और पुष्ट किया है तेरे साक्ष्यों को; राह पकड़ी है तेरी, अनुसरण किया है तेरे मार्गदर्शन का, पाये हैं रहस्य तेरे और जाना है मंत्र तेरे ग्रंथ का; पाया है स्रोत तेरी पातियों का, भाव तेरे संदेशों का और तेरे प्रकाशन और भव्यता के वस्त्र का आंचल दृढ़ता से जिन्होंने थाम लिया है; जिनके पग अडिग हैं तेरी संविदा में और हृदय दृढ़ हैं तेरे प्रमाण में।

नाथ! तू उनके हृदय में अपने दिव्य आकर्षण की लौ जला दे और वर दे कि प्रेम और ज्ञान का पंछी उनके हृदय में चहके। वर दे कि वे तेरे ऐसे समर्थ चिन्ह बनें, ऐसी जगमगाती ध्वजायें बनें और परिपूर्णता को प्राप्त हों जैसे तेरे शब्द परिपूर्ण हैं। उन्नत कर तू अपना धर्म उनके माध्यम से, फहरा अपनी धर्म-ध्वजा और दूर-दूर तक अपनी अद्भुत लीला का विस्तार कर। बना अपनी वाणी को विजयी उनके माध्यम से और अपने प्रियजनों के मेरूदंड सशक्त कर। मुक्त कर उनकी वाणी को तेरे यशगान के लिये, प्रेरित कर उन्हें तू अपनी पावन इच्छा के पालन के लिये। अपने पावन साम्राज्य में उनके मुखड़ों को आलोकित कर और अपने धर्म की विजय के लिये उठ खड़े होने में उनकी सहायता करके उनका आनन्द सार्थक कर। स्वामिन्, हम दुर्बल हैं, हमें अपनी पावनता की सुरभि का प्रसार करने की शक्ति दे; दरिद्र हैं हम, अपनी दिव्य एकता के कोष से हमें समृद्ध बना; निर्वस्त्र हैं हम, अपनी कृपा के वस्त्र हमें पहना; पापी हैं हम, अपनी कृपालुता, अपने अनुग्रह और अपनी क्षमाशीलता से हमारे पापों को क्षमा कर। तू ही वस्तुतः; सम्बल देने वाला, सहायक, कृपालु, सामर्थ्यशाली और शक्तिशाली है। महिमाओं की महिमा उन पर विराजती है, जो हैं दृढ़ और अटल।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8368 (bpn8368)

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बालक और युवा

स्तुति हो तेरी, हे नाथ, मेरे परमात्मन्! कृपापूर्वक वर दे कि यह शिशु तेरी स्नेहसिक्त दया और तेरे प्रेमपूर्ण मंगलविधान के स्तनों से आहार पाये और तेरे स्वर्गिक वृक्ष के फल से पोषित हो। इसे अपने अतिरिक्त अन्य किसी के सार-सम्भाल में न जाने दे, क्योंकि तूने अपनी सर्वोपरि इच्छा और शक्ति से स्वयं ही इसका सृजन किया है और इसे अस्तित्व दिया है। तुझ सर्वशक्तिशाली, सर्वज्ञाता के सिवा अन्य कोई परमेश्वर नहीं है।

महिमावंत है तू, हे मेरे प्रियतम, इस पर अपनी स्वर्गिक अक्षय सम्पदाओं की सुरभि और अपने पावन वरदानों की सुगंध प्रवाहित कर। इसे अपने परमोच्च नाम की छत्रछाया तले आश्रय की आकांक्षा करने योग्य बना, हे तू जो अपनी मुट्ठी में नामों और गुणों का साम्राज्य ग्रहण किये हुए है! वस्तुतः तू जो चाहे करने में समर्थ है और तू निश्चय ही सामर्थ्यशाली, सदा क्षमाशील, अनुग्रहमय और कृपालु है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8378 (bpn8378)

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हे ईश्वर! मेरा मार्गदर्शन कर, मेरी रक्षा कर, मुझे एक प्रदीप्त दीपक और जगमगाता सितारा बना दे। तू शक्तिशाली और बलशाली है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8379 (bpn8379)

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हे प्रभु! मेरे नाथ! मैं छोटी उम्र का बालक हूँ, अपनी दया के दुग्ध से मेरा पोषण कर, अपने प्रेम के वक्ष पर मुझे प्रशिक्षण दे, अपने मार्गदर्शन की पाठशाला में मुझे शिक्षित कर और अपने आशीष की छत्रछाया में मेरा विकास कर। अंधकार से मुझे मुक्ति दे, मुझे एक दीप्त प्रकाशपुंज बना दे; उदासी से मुझे छुटकारा दिला; गुलाब वाटिका का एक फूल मुझे बना दे; मुझे अपनी देहरी का एक सेवक बन जाने दे और मुझे सदाचारियों की वृत्ति और स्वभाव प्रदान कर; मुझे मानव संसार के लिये सम्पदाओं का एक माध्यम बना और मेरे मस्तक को शाश्वत जीवन के मुकुट से सुशोभित कर। तू बालक और युवा निश्चय ही शक्तिशाली, सामर्थ्यवान, सर्वद्रष्टा और सबका सुननेवाला है !

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8380 (bpn8380)

bahaiprayers.net 8380

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हे प्रभु! इन बालकों को शिक्षित कर। ये तेरे फूलों की बगिया के पौधें हैं, तेर उपवन के फूल हैं, तेरी वाटिका के गुलाब हैं। अपनी वर्षा की फुहारें इन पर पड़ने दे, सत्य के इस सूर्य को अपने स्नेह सहित इन पर जगमगाने दे। अपने समीर को इनमें ताजगी भरने दे, ताकि ये प्रशिक्षित हो सकें, विकास कर सकें और परम सौन्दर्य को मूर्त्त कर सकें। तू दातार है, तू करुणामय है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8381 (bpn8381)

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हे ईश्वर, इस युवक को तेजस्वी बना और इस दीन-हीन प्राणी को अपनी उदारता का दान दे। इसे ज्ञान प्रदान कर, हर सुबह इसे अतिरिक्त शक्ति से सम्पन्न बना और अपने संरक्षण के आश्रय में इसे सुरक्षा दे, ताकि यह दोषों से मुक्त हो सके, पथभ्रष्टों को राह दिखला सके, दुःखी व्यक्ति को प्रसन्नता की ओर ले चले, दासों को मुक्त कर सके और नासमझों को जगा सके। ऐसा वर दे कि तेरे स्मरण और गुणगान से सभी धन्य हो सकें। तू सर्वसमर्थ और शक्तिसम्पन्न है।

(”…..आरम्भ से ही बच्चों को ईश्वर का ज्ञान कराना चाहिये और ईश्वर का स्मरण करने के लिये उन्हें याद दिलाते रहना चाहिये। उनके अन्तर्मन में ईश्वर का प्रेम कुछ इस तरह व्याप्त हो जाने दें जैसे उनकी माँ का दूध उनकी नस-नस में घुल-मिल जाता है…..“)

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8383 (bpn8383)

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हे दयालु स्वामी! ये नन्हें बालक तेरी शक्ति की उंगलियों से बने हैं; ये तेरी महानता के अद्भुत चिन्ह हैं। हे ईश्वर! इन बालकों की रक्षा कर। इन्हें सहायता दे ताकि ये मानवजाति की सेवा के योग्य बन सकें। हे ईश्वर! ये बालक मोती हैं, इन्हें अपनी स्हनेहिल कृपा की सीप में सुरक्षित रख। तू दयालु है और है सभी को प्रेम करने वाला।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8382 (bpn8382)

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मध्यम अनिवार्य प्रार्थना

इस अनिवार्य प्रार्थना का पाठ प्रतिदिन सुबह, दोपहर और शाम के समय किया जाना चाहिये जो भी इसप्रार्थना का पाठ करना चाहे उसे पहले अपने हाथ धो लेने चाहिये और हाथ धोते समय कहना चाहिये :

हे मेरे प्रभु! मेरे हाथों को शक्ति दे

कि ये तेरे ग्रंथ को ऐसे दृढ़ संकल्प के साथ थाम सकें कि दुनिया की कोई भी ताकत इन्हें विचलित न कर पाये।

तब इनकी उन सबसे रक्षा कर जो तेरा नहीं है। तू, सत्य ही, शक्तिशाली, परम बलशाली है।

और अपना चेहरा धोते समय उसे कहना चाहिये :

मैं तेरी ओर उन्मुख हुआ हूँ, हे मेरे ईश्वर! मुझे अपनी छवि की ज्योति से आलोकित कर। तेरे अतिरिक्त किसी अन्य की ओर

उन्मुख न होने में इसकी रक्षा कर।

तब उसे खड़ा हो जाना चाहिये और क़िब्ले

(आराधना का केन्द्र बिन्दु - बहजी, अक्का) की ओर मुँह करके कहना चाहिये :

स्वयं प्रभु साक्षी है कि उसके अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं। प्रकटीकरण और सृष्टि के साम्राज्य उसी के हैं।

सत्यतः उसने ही उसे प्रकट किया है, जो प्रकटीकरण का दिवानक्षत्र है, जिसने सिनाई पर संवाद किया है, जिसके द्वारा सर्वोच्च क्षितिज आलोकित किया गया है,

वह दिव्य तरुवर, जिसके आगे कोई राह नहीं है, बोल उठा है

और जिसने उन सबके लिये जो इस धरती पर और स्वर्ग में हैं, पुकार लगाई है : ”देखो ! सर्वसमर्थ परमेश्वर आ गया है।“

पृथ्वी और स्वर्ग, महिमा और साम्राज्य उसी के हैं। वह सभी वस्तुओं का स्वामी है।

परमोच्च लोक का सिंहासन उसी का है। वही धरती का सम्राट है।“

उसे झुक कर अपने घुटनों के ऊपर हाथ रखकर यह कहना चाहिये :

तू मेरी और मेरे अतिरिक्त

अन्य किसी की प्रशंसा से बहुत ऊपर है। तू मेरे और स्वर्ग में तथा पृथ्वी पर

निवास करने वालों के वर्णन से भी परे है।

तब खुले हाथों से हथेली ऊपर करते हुये उसे कहना चाहिये :

हे मेरे ईश्वर! उसे निराश न कर जिसने विनम्र हाथों से तेरी दया और कृपा के आंचल को थाम रखा है। हे प्रभु! जो दयालुहैं, उन सबमें तू सर्वाधिकदयालुहै।

तब वह बैठ जाये और कहे :

मैं तेरी एकता और एकमेवता का साक्षी हूँ और इसकी भी साक्षी देता हूँ कि तू ही है ईश्वर और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है। सत्य ही, तूने प्रकट किया है अपना धर्म,

पूरा किया है अपना वचन !

तूने उन सबके लिये, जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर निवास करते हैं,

अपनी उन्मुक्त कृपा के द्वार खोल दिये हैं। जिन्हें समय के झंझावातों ने

तुझसे विमुख नहीं किया, जो तेरे सान्निध्य की आशा में

अपना सर्वस्व न्यौछावर कर बैठे हैं।

तेरे ऐसे प्रियजनों को आशीष और शांति मिले, नमन हो उनका, उनका यश बढ़े।

सत्य ही, तू सदा क्षमाशील, सर्वकृपालु है।

इस लम्बे पद के स्थान पर यदि कोई यह कहना चाहे कि :

”प्रभु साक्षी है कि उसके अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं,

वही है संकटों में सहायक, स्वयंजीवी“

तो यह पर्याप्त होगा और इसी रहबैठने के बाद अगर कोई इतना कहना चाहे कि

”मैं तेरी एकता और एकमेवता का साक्षी हूँ और इसकी भी साक्षी देता हूँ कि तू ही ईश्वर है और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है“ तो यह पर्याप्त होगा।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8738 (bpn8738)

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मध्यरात्रि की प्रार्थना

हे सत्य के साधक! यदि तू कामना करता है कि प्रभु तेरे नेत्र खोल दें, तो तुझे अवश्य ही मध्यरात्रि में प्रभु की आराधना, उसकी प्रार्थना और उससे यह कहते हुए संलाप करना चाहिये :

हे स्वामिन््! मैं तेरी एकता के साम्राज्य की ओर उन्मुख हुआ हूँ और तेरी दया के सागर में डूबा हुआ हूँ।

इस अंधेरी रात में मेरी दृष्टि को अपनी परम ज्योति की झलक दिखला और मुझे इस अद्भुत युग में अपने प्रेम की मदिरा से आनन्दित कर दे। हे नाथ! मुझे अपना आह्वान सुनने की शक्ति दे और मेरे सामने अपने स्वर्ग के द्वार खोल दे, ताकि मैं तेरी महिमा की आभा को निहार सकूँ और तेरे सौन्दर्य के प्रति आकर्षित हो जाऊँ। निश्चय ही तू दाता, उदार, दयाशील, और क्षमाशील है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8692 (bpn8692)

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माता-पिता के लिये

देखता है तू, हे स्वामी ! तुम्हारी अनुकम्पा और कृपा के लिये स्वर्ग की ओर फैली मेरी याचना भरी बाहें। वर दे कि ये तेरी उदारता और कृपा से परिपूर्ण सहायता के बहुमूल्य रत्नों से भर जायें। हमें और हमारे माता-पिता को क्षमादान दे और हमने तेरे आशीष और तेरी दिव्य उदारता के महासागर से जो कुछ भी पाना चाहा है, उनसे इन्हें भर दे। हमारे हृदयों के प्रिय प्रभु, अपनी राह में अर्पित हमारे सभी कर्म स्वीकार कर। सत्य ही, तू सर्वशक्तिशाली है, है सर्वोच्च, अतुलनीय, एकमेव। सत्य ही, तू है एक और केवल एक क्षमादाता, करूणामय।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8326 (bpn8326)

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महिमा हो तेरी, हे स्वामी, मेरे नाथ! मैं तुझसे याचना करता हूँ कि क्षमा कर दे मुझे और उन्हें, जो तेरे धर्म के समर्थक हैं। वस्तुतः, तू सम्प्रभु स्वामी है, क्षमादाता, सर्वाधिक उदार। अपने वैसे सेवकों को, जो ज्ञानविहीन हैं, अपने धर्म को स्वीकार करने के योग्य बना, क्योंकि एक बार यदि वे तेरे बारे में जान जायेंगे तो वे न्याय दिवस की सत्यता के साक्षी बनेंगे और तेरी कृपा के प्रकटीकरण का विरोध नहीं करेंगे। उनके लिये अपनी दया के चिन्ह भेज और वे जहाँ कहीं भी निवास करें उन्हें अपनी उदारता का अंशदान दे, जिसका विधान तूने उनके लिये किया है जो तेरे सेवकों के बीच विशुद्ध हृदय हैं। तू सत्य ही सर्वोपरि सम्राट, सर्वकृपालु, परम करुणामय है। अपनी कृपा और अपने आशीषां की बूंदें बरसने दे वहाँ जिनके निवासियों ने तेरे धर्म को स्वीकार किया है। वस्तुतः, क्षमादान देने में तू सर्वोपरि है। यदि तेरी कृपा उन तक नहीं पहुँच पायेगी तो तेरे इस युग में वे तेरे भक्तों में कैसे गिने जायेंगे। मुझे आशीष दे, हे मेरे ईश्वर! और उन्हें भी जो इस पूर्व निर्धारित युग में तेरे चिन्हों पर विश्वास करेंगे! जो अपने दिलों में तेरा प्यार धारण करते हैं, एक ऐसा प्रेम जिसे तूने ही उन्हें दिया है, उन्हें भी आशीष दे, हे मेरे प्रभु! सत्य ही, तू न्याय का स्वामी है, है सर्वोच्च!

– Báb

Prayer bpn8328 (bpn8328)

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हे स्वामी! इस सर्वमहान युग में माता-पिता की ओर से संतानों द्वारा की गई प्रार्थना तू स्वीकार करता हैं। यह इस युग के विशेष आशीषों में एक है। अतः, हे कृपालु प्रभु! अपनी एकमेवता की देहरी पर इस सेवक की विनती स्वीकार कर और अपनी अनुकम्पा के महासागर में इसके पिता को निमग्न कर दे, क्योंकि यह पुत्र तेरी सेवा करने के लिये उठ खड़ा हुआ है और तेरे प्रेम के पथ पर हर पल प्रयत्नशील है। सत्य ही, तू दाता, क्षमादाता और कृपालु है।

– Abdu’l-Bahá

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रिज़वान की पाती

गुणगान हो तेरा, हे ईश्वर! तूने उन्हें नवरूज़ को एक उत्सव के रूप में दिया है जिन्होंने तेरे प्रेम के कारण उपवास किया है और उन सबका परित्याग किया है जो तेरी दृष्टि में घृणित है। वरदान दे, हे मेरे प्रभु ! कि मेरे प्रेम की अग्नि और तेरे द्वारा विहित उपवास से उत्पन्न ताप उन्हें तेरे धर्म में प्रदीप्त कर दे और तेरे स्मरण और गुणगान में प्रवृत्त कर दे।

हे मेरे स्वामी! जब तूने उन्हें अपने द्वारा निर्धारित उपवास के आभूषण से अलंकृत किया है, तो उन्हें अपनी करुणा और उदार कृपा से, अपनी स्वीकृति का आभूषण भी दे, क्योंकि मनुष्य का हर कर्म तेरी ही कृपा पर निर्भर है, तेरी ही आज्ञा पर आश्रित है। उपवास तोड़ने वाले को भी यदि तू उपवास करने वाला घोषित कर दे, तो उसकी गिनती अनन्त काल से उपवास करने वालों में होगी; और यदि तेरे निर्णय में उपवास करने वाला उपवास तोड़ने वाला घोषित हो जाये, तो उसकी गिनती उन लोगों में होगी जिन्होंने तेरे प्रकटीकरण के परिधान को मैला कर दिया है, और जो तेरे जीवन-निर्झर के स्फटिक जल से दूर कर दिया गया है।

तू वह है जिसके माध्यम से ’प्रशंसनीय है तू निज कार्यों में‘ का ध्वज लहराया है और ”अनुपालित है तू निज आदेश में“ की पताका फहराई गई है। हे मेरे ईश्वर! अपने सेवकों को तू अपने पद का ज्ञान करा दे, ताकि वे जान सकें कि हर वस्तु की उत्तमता तेरी आज्ञा, तेरे परम पावन शब्द पर आश्रित है; हर कर्म का गुण तेरी इच्छा और कृपा पर निर्भर है, ताकि वे जान सकें कि मनुष्य के कर्म की बागडोर तेरी स्वीकृति और तेरी आज्ञा की पकड़ में है। उन्हें यह ज्ञान करा दे कि कुछ भी उन्हें तेरे सौन्दर्य से वंचित नहीं कर सकता। ईसामसीह के उद्गार हैं: ”ओ दिव्य चेतना (ईसा) के परम महान जनक! समस्त साम्राज्य तेरा है।“ और इसी के लिये तेरे मित्र (मुहम्मद) ने आवाज लगाई: ”तेरी जयजयकार हो, ओ परम प्रियतम, कि तूने अपने परम महान सौन्दर्य के दर्शन कराये हैं और अपने प्रियजनों के लिये उसका विधान किया है, जो उन्हें नवरूज़ की प्रार्थना तेरे महान नाम के आसन के निकट लायेगा, जिनके माध्यम से, उनके अतिरिक्त, जिन्होंने तेरे सिवा अन्य सभी कुछ से स्वयं को अनासक्त कर लिया है, अन्य लोगों ने विलाप किया है। जो अनासक्त हुए हैं वे उसकी ओर उन्मुख हुए हैं, जो तेरे अस्तित्व को साकार करता है, जो तेरे गुणों का अवतार है।“

हे मेरे ईश्वर, वह जो तेरी परम महान शाखा है उसने और तुम्हारे सभी मित्रों ने आज के दिन अपना उपवास खोला है, जिसे उन्होंने तुम्हारी सुप्रसन्नता के लिये तुम्हारे विधानों के अधीन धारण किया था। हे प्रभु, उसके लिये और उन सबके लिये जिन्होंने उपवास के दिनों में तेरी निकटता पाई है, वह सब मंगल विधान कर जिसे तूने अपने परम महान ग्रंथ में विहित किया है। तब उन्हें वह प्रदान कर जो उनके लिये इहलोक ओर परलोक में लाभदायक हो।

तू सत्य ही, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8755 (bpn8755)

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लघु अनिवार्य प्रार्थना

बहाउल्लाह प्रकट की गई दैनिक अनिवार्य प्रार्थनाएँ संख्या में तीन हैं। प्रत्येक बहाई को चाहिये कि इनमें से कोई एक प्रार्थना वह चुन ले और अनिवार्य रूप से उसका पाठ प्रतिदिन करे। अनिवार्य प्रार्थना का पाठ उनके साथ दिये गये विशेष निर्देशों के अनुसार ही करना चाहिये।

”अनिवार्य प्रार्थनाओं के सिलसिले में ’सुबह‘ ’दोपहर‘ और ’संध्या‘ का अर्थ है सूर्योदय से दोपहर तक, दोपहर से सूर्यास्त तक और सूर्यास्त से लेकर सूर्यास्त के दो घंटे बाद तक का समय।“

चौबीस घंटे में एक बार, दोपहर से शाम के बीच इस प्रार्थना का पाठ करना चाहिये।

मैं साक्षी देता हूँ, हे मेरे ईश्वर! कि तुझे जानने और तेरी आराधना करने हेतु तूने मुझे उत्पन्न किया है। मैं इस क्षण अपनी शक्तिहीनता और तेरी शक्तिमानता, अपनी दरिद्रता तथा तेरी सम्पन्नता का साक्षी हूँ। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, तू ही है संकटों में सहायक, स्वयंजीवी।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8736 (bpn8736)

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लम्बी अनिवार्य प्रार्थना

लम्बी अनिवार्य प्रार्थना

(चौबीस घंटे में एक बार किये जाने के लिये)

जो कोई भी इस प्रार्थना का पाठ करना चाहे, वह खड़ा होकर ईश्वर की ओर उन्मुख हो, और, जब वह अपने स्थान पर खड़ा हो, वह दायें और बायें देखे, मानो अपने स्वामी, परम दयावान, सहानुभूतिकर्ता की दया की प्रतीक्षा में हो। तब वह कहे:

हे तू, जो समस्त नामों का स्वामी और आकाशों का सृजनकर्ता है! मैं उनके माध्यम से तुझसे याचना करता हूँ जो तेरे सर्वमहिमावान, परमउदात्त, अदृश्य सार के उद्गमस्थल हैं कि मेरी प्रार्थना को ऐसी ज्वाला बना दे जो उन पर्दों को जला डाले जिन्होंने तेरे सौन्दर्य से मुझे दूर रखा है, और एक ऐसा प्रकाश जो तेरी उपस्थिति के महासागर की ओर मुझे ले जाये।

वह तब अपने हाथ ईश्वर - पावन और परमोच्च है वह - कि प्रार्थना में उठाये और कहे:

हे तू, समस्त विश्व की कामना और राष्ट्रों के प्रियतम ! तू मुझे अपनी ओर उन्मुख होते हुये देख रहा है, और तेरे अतिरिक्त अन्य सभी के प्रति आसक्ति से मुक्त, मैं तेरी डोर थामे हुए हूँ,, जिसके स्पंदन से समस्त सृष्टि गतिमान हो उठी है। हे मेरे स्वामी ! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ! देख, मैं तेरी इच्छा और आकाँक्षा को पूरा करने के लिये उठ खड़ा हुआ हूँ और तेरी सुप्रसन्नता के अतिरिक्त मेरी कोई कामना नहीं है। तेरी दया के महासागर और तेरी अनुकम्पा के दिवानक्षत्र के नाम से मैं तुझसे याचना करता हूँ कि तू अपने सेवक के साथ वह कर जिसकी तू इच्छा करता और चाहता है। तेरी शक्ति की सौगन्ध ! जो समस्त उल्लेख और प्रशंसा से परे हैं। जो भी तेरे द्वारा प्रकट किया गया है वह मेरे हृदय की कामना और मेरी आत्मा को प्रिय है। हे ईश्वर, मेरे ईश्वर ! मेरी आशाओं और मेरे कर्मों को न देख, बल्कि केवल अपनी इच्छा को देख, जिसने धरती और आकाशों को घेर रखा है। हे सभी राष्ट्रों के स्वामी ! तेरे सर्वमहान नाम की सौगन्ध ! मैंने वही चाहा है जो तूने चाहा है और उसी से प्रेम करता हूँ, जिससे तू प्रेम करता है।

तब वह घुटने के बल धरती पर माथा टेक कर कहे:

तू अपने सिवाय किसी अन्य के वर्णन से परे है और स्वयं के अतिरिक्त किसी अन्य की समझ से परे है।

तब खड़ा हो जाये और कहे:

हे मेरे स्वामी, मेरी प्रार्थना को जीवंत जल की एक निर्झरनी बना दे ताकि मैं तब तक जीवित रहूँ जब तक तेरी सत्ता कायम है और तेरे लोकों के प्रत्येक लोक में तेरी चर्चा कर सकूँ।

तब वह पुनः अपने हाथों को प्रार्थना में उठाये और कहे:

हे तू, जिसके वियोग में हृदय और आत्मायें द्रवित हो गई हैं और जिसके प्रेम की ज्वाला से सम्पूर्ण संसार दमक उठा है, और तेरे उस नाम से जिसके द्वारा तूने समस्त सृष्टि को अपने अधीन किया है, तुझसे याचना करता हूँ कि जो तेरे पास है उससे मुझे वंचित न कर, हे तू जो समस्त जनों पर शासन करता है। तू देखता है, हे मेरे स्वामी ! इस अजनबी को तेरी विराटता के वितान तले, तेरी दया की परिधि में, अपने सर्वोच्च निवास की ओर शीघ्रता से जाते हुये, और पथ भटके पथिक को तेरी क्षमा के सागर की याचना करते हुये, और इस पतित को तेरी महिमा के प्रांगण की आकांक्षा लिये, और इस दीन-हीन को तेरी सम्पदा की चमक की ओर निहारते हुए। अधिकार तेरा है, तू जो चाहे आदेश दे सकता है। मैं साक्षी हूँ कि तू अपने कर्मों में स्तुत्य है और तेरे आदेशों का पालन किया जाना ही चाहिये और तू अपने आदेश में सदा ही अप्रतिबंधित रहा है।

तब वह अपने हाथ ऊपर उठाये और तीन बार महानतम नाम का उच्चारण करे। फिर अपने घुटनों पर हाथ रखकर वह ईश्वर - पावन और परमोच्च है वह - के सम्मुख घुटनों के बल झुक जाये, और कहे:

तू देखता है, हे मेरे ईश्वर, कि किस प्रकार मेरे अंग-प्रत्यंग में मेरी चेतना तेरी आराधना की आकाँक्षा लिये और तेरे स्मरण और गुणगान की लालसा लिये स्पंदित हुई है; किस प्रकार यह उसकी साक्षी है जिसका साक्ष्य तेरे आदेश की जिह्वा ने तेरी वाणी के साम्राज्य और ज्ञान के आकाश में दिया। ऐसी अवस्था में, हे मेरे ईश्वर, तेरे पास जो कुछ भी है वह मुझे तुझसे मांगना प्रिय लगता है, ताकि मैं अपनी दरिद्रता दिखा सकूं और तेरी उदारता और तेरी सम्पदाओं का गुणगान कर सकूं और अपनी शक्तिहीनता की घोषणा कर सकूं और तेरी शक्ति तथा सामर्थ्य को व्यक्त कर सकूं।

तब वह खड़ा हो जाये और दो बार अपने हाथ प्रार्थाना में ऊपर उठाये और कहे:

तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सर्वशक्तिशाली, सर्वउदार! तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, तू ही आदि और अन्त का आदेशकर्ता है। हे ईश्वर, मेरे ईश्वर ! तेरी क्षमाशीलता ने मुझे साहस दिया है और तेरी दया ने मुझे शक्ति दी है; तेरी पुकार ने मुझे जगाया है और तेरे अनुग्रह ने मुझे खड़ा किया है और तुझ तक पहुँचने की राह दिखलाई है। अन्यथा मैं कौन हूँ, कि मैं तेरी निकटता के नगर के द्वार तक पहुँचने का साहस जुटा पाता या फिर, तेरी इच्छा के आकाश से प्रस्फुटित प्रकाश की ओर उन्मुख हो पाता ? देखता है तू, हे मेरे स्वामी, तेरी कृपा के द्वार पर यह तुच्छ प्राणी दस्तक दे रहा है और यह क्षणभंगुर जीव तेरी उदारता के हाथों अनन्त जीवन की सरिता की खोज कर रहा है। हर काल में तेरा ही आदेश रहा है, हे तू जो समस्त नामों का स्वामी है, हे आसमानों के रचयिता, तेरी इच्छा के प्रति मेरी स्वीकृति और सहर्ष समर्पण !

तब वह तीन बार हाथ उठाकर कहे:

प्रत्येक महान से ईश्वर महानतर है !

तब वह घुटनों के बल धरती पर अपना माथा टेकते हुए कहे:

तू इस से परे है कि तेरे निकट जनों कि स्तुति तेरी निकटता के आकाश तक पहुँच सके अथवा तेरे प्रति समर्पित जनों के हृदय-पखेरू तेरे प्रवेश मार्ग के द्वार तक पहुँच सकें। मैं साक्षी हूँ कि तू समस्त गुणों से पावन, और समस्त नामों से पवित्र रहा है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, परम उदात्त, सर्व महिमाशाली।

तब वह बैठ जाये और कहे:

मैं प्रमाणित करता हूँ, कि वह, जिसे सभी सृजित वस्तुओं ने, उच्च जन समूह ने, सर्वोच्च स्वर्ग के निवासियों ने और उन सबसे परे सर्वमहिमाशाली क्षितिज से स्वयं भव्यता की जिह्वा ने प्रमाणित किया है कि तू ही ईश्वर है, तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं और यह कि जिसे प्रकट किया गया है वह गूढ़ रहस्य, संचित प्रतीक है जिसके द्वारा ’भ‘ और ’व‘ अक्षर परस्पर जोडे़ और बुन दिये गये है। मैं प्रमाणित करता हूँ कि यह वही है जिसका नाम सर्वोच्च की लेखनी द्वारा लिपिबद्ध किया गया है और जिसका उल्लेख ईश्वर की पुस्तकों में किया गया है जो ऊपर सिंहासन और नीचे धरती का स्वामी है।

तब वह सीधा खड़ा हो जाये और कहे:

हे समस्त प्राणियों के स्वामी और सभी दृश्य-अदृश्य वस्तुओं के मालिक ! तू देखता है मेरे आँसुओं को और मेरी आहों को जो मैं भरता हूँ और सुनता है तू मेरी कराह और मेरे चित्कार को और मेरे हृदय के विलाप को। तेरी शक्ति की सौगंध ! मेरे अतिक्रमणों ने मुझे तेरी समीप आने से रोका है और मेरे पापों ने मुझे तेरी पावनता के प्रांगण से बहुत दूर कर दिया है। हे मेरे स्वामी, तेरे प्रेम ने मुझे समृद्ध बनाया है और तेरे वियोग ने मुझे नष्ट कर दिया है और तुझसे दूरी ने मुझे क्षीण कर दिया है। इस वीराने में तेरे पदचापों के माध्यम से, और इन शब्दों के द्वारा कि “मैं यहीं हूँ”, “मैं यहीं हूँ”, जिन शब्दों का तेरे प्रियजनों ने इस विराटता में उच्चारण किया है, मैं तेरे प्राकट्य के श्वांसों के माध्यम से, और तेरे प्रकटीकरण के प्रभात की मृदुल बयारों के माध्यम से, मैं तुझसे याचना करता हूँ कि ऐसा विधान कर कि मैं तेरे सौन्दर्य के दर्शन कर सकूँ, और जो कुछ भी तेरे पावन ग्रंथ में है उसका अनुपालन कर सकूँ।

तब वह महानतम् नाम का तीन बार उच्चारण करे और घुटनों पर हाथ रखते हुए झुके और कहे:

स्तुति हो तेरी, हे मेरे ईश्वर, कि तेरा स्मरण करने और तेरा यशगान करने में तूने मेरी सहायता की है, तूने ही दिया है उसका ज्ञान जो तेरे चिह्नों का उद्गमस्थल है, तूने ही बनाया है इस योग्य मुझे कि तेरे स्वामित्व के समक्ष विनत हो सकूँ और तेरे ईश्वरत्व के प्रति विनम्र रह सकूँ और तेरी महिमा की जिह्वा द्वारा जो कुछ भी उच्चारा गया है उसे स्वीकार कर सकूँ।

तब वह खड़ा हो जाये और कहे:

हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! मेरे पापों के बोझ से मेरी कमर झुक गई है; मेरी लापरवाही ने मुझे बर्बाद कर दिया है। जब कभी भी मैं अपने दुष्कर्मों और तेरी हितेषिता के विषय में सोचता हूँ तो मेरा हृदय, अन्दर-ही-अन्दर द्रवित हो उठता है, और रक्त मेरी शिराओं में उद्वेलित हो जाता है। तेरे सौन्दर्य की सौगन्ध, हे तू, विश्व की कामना! लज्जित हूँ मैं तेरी ओर देखने में, याचना भरे अपने हाथ तेरी कृपा के आकाश की ओर फैलाने में। तू देखता है, मेरे आँसू तुझे याद करने में तेरा गुणगान करने में कैसे अवरोध बने हैं, हे तू जो सर्वोच्च सिंहासन और धरती का स्वामी है ! तेरे साम्राज्य के चिह्नों और तेरी प्रभुत्व के रहस्यों द्वारा मैं तुझसे याचना करता हूँ कि हे सबके स्वामी! कि अपने प्रियजनों के साथ अपनी अनुकम्पा और गरिमा के अनुरूप व्यवहार कर, हे गोचर और अगोचर के सम्राट !

तब वह तीन बार महानतम् नाम का उच्चारण करे और घुटनों के बल धरती पर माथा टेक कर कहे:

स्तुति हो तेरी, हे हमारे ईश्वर ! कि तूने हम तक वह भेजा है जो हमें तेरी निकटता की ओर आकर्षित करता है और तेरे ग्रंथों और तेरे लेखों में उल्लिखित प्रत्येक उत्तम वस्तु हमें प्रदान करता है। हम याचना करते हैं, हे मेरे स्वामी, हमें व्यर्थ विचारों और निरर्थक कल्पनाओं से बचा। तू, सत्य ही, शक्तिशाली, सर्वज्ञ है।

तब वह अपना सर उठाये, बैठ जाये और कहे:

हे मेरे ईश्वर, मैं उसका साक्षी हूँ जिसके साक्षी तेरे प्रियजन हैं, और स्वीकार करता हूँ मैं उसको, जिसे सर्वाच्च स्वर्ग के निवासियों ने और तेरे शक्तिशाली सिंहासन की परिक्रमा करने वालों ने स्वीकार किया है। धरती और आकाश के साम्राज्य तेरे ही हैं, हे समस्त लोकों के स्वामी !

– Bahá’u’lláh

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विवाह

विवाह की प्रतिज्ञा परम पावन पुस्तक ”किताब-ए-अक़दस“ में वर्णित वह श्लोक है जो वर और वधू द्वारा बारी-बारी से वैसे दो गवाहों की उपस्थिति में पढ़ी जानी चाहिये जो आध्यात्मिक सभा को स्वीकार्य

हों। विवाह की प्रतिज्ञा इस प्रकार है : ”हम, सत्य ही, परमेश्वर की इच्छा का अनुपालन करेंगे।“

”बहाई विवाह दो पक्षों के बीच मृदुल मिलन और स्नेहपूर्ण सम्बन्ध है, लेकिन उन्हें (विवाह बंधन में बंधने वाले स्त्री-पुरूष को) अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिये और एक दूसरे के चरित्र से सुपरिचित हो जाना चाहिये। एक सुदृढ़ संविदा द्वारा यह चिरंतन बंधन संरक्षित कर लिया जाना चाहिये और उद्देश्य होना चाहिये मधुर सम्बन्ध, साहचर्य और एकता तथा अनन्त जीवन को बढ़ावा देना।“

”….एक विवाहित जोड़े का जीवन आसमान के फरिश्तों की तरह होना चाहिये - ख़ुशियों से भरा और आध्यात्मिक आनन्द से परिपूर्ण, एकता का प्रतीक और मित्रवत् - मानसिक और दैहिक मित्रता….। उनके मत और विचार सत्य के सूर्य की किरणों के समान और आसमान के चमकीले तारों की प्रखरता लिये हों। सहभागिता और समरसता के वृक्ष की टहनियों पर मधुर गान गुंजित करते पक्षियों की तरह उनका जीवन हो। उन्हें बराबर आनन्द से उल्लसित होना चाहिये और दूसरों के दिलों को खुशी देने का साधन बनना चाहिये। उन्हें अपने संगी साथियों के सामने एक उदाहरण बनना चाहिये, एक-दूसरे के प्रति सच्चा प्रेम और वफ़ादारी रखनी चाहिये और अपने बच्चों को कुछ इस प्रकार शिक्षित करना चाहिये कि वे अपने परिवार का नाम रौशन करें।“

– Abdu’l-Bahá

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महिमा हो तेरी, हे परमेश्वर! सत्य ही, तेरा यह सेवक और तेरी यह सेविका तेरी दया की छत्रछाया में एकत्रित हुए हैं और तेरी कृपा और तेरी उदारता के प्रताप से एकता के सूत्र में बंधे हैं। हे प्रभो! अपने इस लोक और उस दिव्य साम्राज्य में इनका सहायक बन और अपने अनुग्रह, और अपनी असीम दया के द्वारा इनके लिये प्रत्येक शुभ वस्तु का विधान कर। हे प्रभो, इन्हें अपने दासत्व में सुदृढ़ बना और इनकी सहायता कर कि ये तेरी सेवा कर सकें। इन पर अनुकम्पा कर कि तेरे संसार में ये तेरे नाम के प्रतीक चिन्ह बन सकें और अपने उन वरदानों के द्वारा इनकी रक्षा कर जो इस लोक और परलोक में भी अक्षय हैं। हे प्रभो, ये तेरी दयालुता के दिव्य साम्राज्य से याचना कर रहे हैं और तेरी एकमेवता के साम्राज्य का आह्वान कर रहे हैं। सत्य ही, ये तेरे आदेश का पालन करने के लिये ही विवाह सूत्र में बंधे हैं। जब तक समय का अस्तित्व रहे, हे प्रभो! तब तक इन्हें एकता और परस्पर प्रेम का प्रतीक चिन्ह बना रहने दे। सत्य ही, तू सर्वशक्तिशाली, सर्वव्यापी और सर्वसामर्थ्यशाली है।

– Abdu’l-Bahá

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वह ईश्वर है! है अद्वितीय स्वामी!

अपने सर्वशक्तिसम्पन्न विवेक से तूने मानवजाति के लिये विवाह का विधान किया है कि इस आश्रित संसार में एक के बाद एक मानव की पीढ़ियाँ बनी रहें और जब तक इस संसार का अस्तित्व है तब तक तेरी एकमेवता की देहरी पर तेरी सेवा और आराधना, तेरी स्तुति और प्रार्थना में वे अपने को व्यस्त रखें। ”मैंने आत्माओं और मनुष्यों की सृष्टि नहीं की है बल्कि अपने आराधक सृजित किये हैं“। अतः हे प्रभु! तू अपने प्रेम के नीड़ में इन दो पक्षियों का विवाह अपनी दया के स्वर्ग में सम्पन्न कर और इन्हें अनन्त कृपा को आकर्षित करने का साधन बना जिससे प्रेम के इन दो ”सागरों“ के मिलन से कोमलता की एक लहर उमड़ सके और जीवन के तट पर ये पावनता और श्रेष्ठता के मोती बिखेर सकें। ”उसने दो सागरों को उन्मुक्त कर दिया है ताकि वे एक दूसरे से मिल सकें : उनके बीच एक मर्यादा है जिसका वे उल्लंघन न करें। अब अपने स्वामी की कृपा के सागरों में से तू किसको अस्वीकार करेगा? प्रत्येक से वह महानतर और लघुतर मोती उत्पन्न करता है।“

हे तू कृपालु स्वामी! इस विवाह को तू मूंगे और मोती उत्पन्न करने का साधन बना। तू सत्य ही सर्वशक्तिशाली, सर्वमहान और सदा क्षमाशील है।

– Abdu’l-Bahá

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हे मेरे प्रभु! हे मेरे परमेश्वर! ये दो उज्ज्वल चंद्रमा तेरे प्रेम के कारण परिणय सूत्र में बंधे हैं, तेरी पावन देहरी की सेवा के लिये एक हुए हैं, तेरे धर्म के कार्यों के निमित्त एकप्राण बने हैं। हे मेरे स्वामी, सर्वकृपालु प्रभु! तू इस विवाह को अपनी असीम अनुकम्पा का प्रकाश-सूत्र बना दे, हे कल्याणकर्ता, हे दाता! इन्हें अपने वरदानों की ऐसी जगमगाती किरण बना दे। कि इस महान वृक्ष से ऐसी शाखाएँ फूटें जो तेरे उपहारों की वर्षा में फलें-फूलें।

सत्य ही तू उदार है, सत्य ही तू सर्वशक्तिशाली है, सत्य ही तू दयालु है, है सर्वकृपालु!

– Abdu’l-Bahá

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शयनकाल

हे मेरे ईश्वर! मेरे नाथ! मेरी आकांक्षा के लक्ष्य! तेरा यह सेवक तेरी दया के आश्रय में सोना चाहता है और तेरी सुरक्षा तथा तेरे संरक्षण की याचना करता हुआ, तेरी कृपा की छत्रछाया में विश्राम लेना चाहता हैं। मैं तुझसे याचना करता हॅूँ, हे मेरे नाथ! कि अपने उस नेत्र द्वारा, जो कभी सोता नहीं है, मेरी आँखों को अपने अतिरिक्त अन्य कुछ भी देखने से बचा। मेरी दृष्टि को इतना सशक्त बना दे कि ये तेरे चिन्हों को पहचान सकें और तेरे प्रकटीकरण के क्षितिज के दर्शन कर सकें। तू वह है जिसके प्रकटीकरण के समक्ष शक्ति का सार तत्व भी प्रकम्पित हो उठता है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, तू ही है सर्वशक्तिमान, सर्वदमनकारी और अप्रतिबंधित।

– Bahá’u’lláh

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मैं कैसे निद्रा का वरण कर सकता हूँ, हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर, जबकि तेरे लिये लालायित नेत्र तुझसे वियोग के कारण निद्राहीन हैं और कैसे मैं विश्राम के लिये लेट सकता हूँ जबकि तेरे प्रेमियों की आत्माएँ तेरे सान्निध्य से दूरी के कारण अति व्याकुल हैं? मैंने, हे मेरे नाथ, अपनी चेतना और अपने सम्पूर्ण अस्तित्व को तेरी सामर्थ्य और तेरी सुरक्षा के दाहिने हाथ में सौंप दिया है और मैं तेरी शक्ति के प्रताप से ही अपना सिर तकिये पर रखता हूँ और तेरी इच्छा और तेरी सुप्रसन्नता के अनुसार ही इसे ऊपर उठाता हूँ। तू सत्य ही, सुरक्षित रखने वाला, सर्वशक्तिमंत, परम बलशाली है।

तेरी सामर्थ्य की शपथ! मैं चाहे निद्रा में रहूँ अथवा जाग्रत अवस्था में, जो कुछ तू चाहता है उसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं मांगता हूँ। मैं तेरा सेवक हूँ और तेरे हाथों में हूँ। जिससे तेरी सुप्रसन्नता की सुरभि का प्रसार हो वैसा ही करने में कृपापूर्वक मेरी सहायता कर। यह सत्य ही, मेरी आशा और उन सबकी आशा है जो तेरे निकट तक पहुँचने का सुख पाते हैं। स्तुति हो तेरी; हे अखिल लोकों के स्वामिन्।

– Bahá’u’lláh

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शिक्षण

महिमावंत हो तेरा नाम, हे मेरे ईश्वर ! तूने उस युग को प्रकट किया है जो युगों का अधिपति है, वह युग जिसे तूने अपने प्रियजनों तथा दिव्य अवतरणों के समक्ष अपनी श्रेष्ठतम पातियों में घोषित किया था, वह युग जब तूने समस्त सृजित वस्तुओं पर अपने नामों की आभा बिखराई थी। उसे प्रदत्त तेरा आशीष महान है जिसने स्वयं को तेरी ओर उन्मुख किया है और तेरा सान्निध्य पा लिया है और तेरी वाणी की प्रखरता को ग्रहण किया है।

मैं तुझसे याचना करता हूँ, हे मेरे स्वामी, तेरे उस नाम से, जिसके चहुँओर नामों का साम्राज्य आराध्य भाव से परिक्रमा करता है, कि तू अपने उन प्रियजनों की सहायता कर जो तेरे सेवकों के मध्य तेरी वाणी की महिमा का बखान करते हैं और दूर-दूर तक तेरे प्राणियों के बीच तेरा यशोगान करते हैं, जिससे तेरी पृथ्वी के निवासियों की आत्माएँ तेरे प्राकट्य के आह्लाद से भर उठीं हैं।

हे मेरे नाथ! तूने अपने अनुग्रह की जीवन्त जलधाराओं तक पहुँचने में उनका मार्गदर्शन किया है, उन्हें उदारता से यह वर दे कि वे तुझसे विमुख न हों। तूने उन्हें अपनी सिंहासनस्थली तक बुलाया है, अपनी स्नेहयुक्त दयालुता के द्वारा तू उन्हें अपनी समीपता से दूर न कर। उनके पास वह भेज जो उन्हें तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे पूरी तरह अनासक्त कर दे। तू अपनी समीपता के अंतरिक्ष में उड़ान भरने में उन्हें इतना समर्थ बना कि न तो दमनकर्ता के तीव्र प्रहार और न ही तेरी परम पावनता और परम शक्तिमानता में अविश्वास करने वालों के भ्रामक परामर्श उन्हें तुझसे दूर रख सकें।

– Bahá’u’lláh

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परमेश्वर, जो सभी अवतारों का प्रणेता है, सभी उद्गमों का मूल है, सभी धर्मों का जनक है, समस्त प्रकाशपुंजों का स्त्रोत है, मैं साक्षी देता हूँ कि तेरे नाम से बोध का स्वर्ग विभूषित हुआ है, वाणी का महासिंधु उमड़ा है और सभी धर्मों के अनुयायियों के बीच तेरे मंगलविधान का शासन लागू हुआ है।

मैं याचना करता हूँ तुझसे कि मुझे इतना समृद्ध बना दे कि मैं तेरे सिवा अन्य सब से मुक्त हो जाऊँ और तेरे अतिरिक्त अन्य किसी पर आश्रित न रहूँ। तब मुझ पर अपनी कृपा के मेघों की वह बरखा बरसा जो तेरे लोकों के हर लोक में लाभकारी हो। तब अपनी शक्तिदायिनी अनुकम्पा द्वारा मेरी ऐसी सहायता कर कि मैं तेरे सेवकों के बीच तेरे धर्म की सेवा कर सकूँ और कुछ ऐसा कर दिखाऊँ कि जब तक तेरा साम्राज्य और तेरी सम्प्रभुता है तब तक मैं याद किया जाऊँ।

यह तेरा सेवक है, हे मेरे स्वामी ! जो तेरी कृपा के क्षितिज और तेरे उपहारों के स्वर्ग की ओर पूर्ण समर्पण के साथ उन्मुख हुआ है।

तू सत्य ही, शक्ति और सम्पन्नता का स्वामी है। तू उसकी सुनता है जो तेरा गुणगान करता है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, तू सर्वज्ञ सर्वप्रज्ञ है।

– Bahá’u’lláh

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हे मेरे ईश्वर! देखता है तू मुझे दीनता में नत्, तेरे आदेशों के प्रति स्वयं को विनत करते हुए, तेरी सम्प्रभुता के प्रति समर्पित होते हुए, तेरे अधिराज्य की सामर्थ्य से प्रकम्पित होते हुए, तेरे कोप से बचते हुए, तेरी कृपा की याचना करते हुए, तेरी क्षमाशीलता पर भरोसा रखते हुए, तेरे क्रोध के भय से कांपते हुए; मैं धड़कते हृदय, अश्रुपूरित नेत्र और याचना भरी अंतश्चेतना से और सभी वस्तुओं से पूर्ण अनासक्ति के साथ तुझसे याचना करता हूँ कि तू अपने प्रेमियों को अपने साम्राज्य के आर-पार भेदती किरणों के समान बना दे और अपने प्रिय सेवकों को अपने पावन शब्दों का गुणगान करने में सहायता कर ताकि उनके मुखड़े तेज से प्रभासित और दीप्तिमान बन सकें, उनके हृदय रहस्यों से परिपूरित हो जायें और प्रत्येक आत्मा अपने पापों के बोझ से मुक्त हो सके। निर्लज्ज बन गये लोगांं और अधर्मियों तथा अन्याय करने वालों से उनकी रक्षा कर। सत्य ही, तेरे प्रेमी प्यासे हैं। हे नाथ! उन्हें अपनी दया और कृपा के निर्झर स्त्रोत तक ले चल। सत्य ही, वे क्षुधित हैं, उन तक अपना स्वर्गिक भोज भेज। सत्य ही, वे निर्वस्त्र हैं, उन्हें विद्वता और ज्ञान के वस्त्र पहना। वे शूरवीर हैं, हे मेरे प्रभो! उन्हें युद्ध क्षेत्र तक ले चल। वे मार्गदर्शक हैं, उन्हें तर्कों एवं प्रमाणों से युक्त बना। वे तेरे सक्रिय सेवक हैं उन्हें सेवा में दृढ़ता की छलकती मदिरा के प्याले को सब में बांटने वाला बना। हे ईश्वर उन्हें ऐसे गायक बना जो सुदूर उपवनों में तेरा यशगान करते हैं। उन्हें ऐसे सिंह बना, गहन झाड़ियाँ जिनका बिछौना हों, उन्हें महामत्स्य बना, जो विस्तृत गहराइयों में गोते लगाते हों। सत्य ही, तू असीम अनुकम्पाओं से पूर्ण है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सामर्थ्यवान, शक्तिसम्पन्न, दानशील।

– Abdu’l-Bahá

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हे ईश्वर ! अपने पावन शब्दों का प्रसार करने में, व्यर्थ और मिथ्या बातों का प्रतिकार करने में, सत्य को सिद्व करने में, देश-देशांतर तक तेरे वचनों को फैलाने में, तेरा गौरवगान करने में और सदाचारियों के हृदयों को तेरे अरूणिम प्रकाश से आलोकित करने में सहायता कर। तू, सत्य ही, उदार और क्षमाशील है।

ABDULBAHA

– Abdu’l-Bahá

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संरक्षण

हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तेरे प्रेम की डोर थामे हुए मैं अपने घर से निकल पड़ा हूँ, मैंने पूरी तरह से तेरी देख-रेख और तेरे संरक्षण में स्वयं को सौंप दिया है। तेरी उस शक्ति के नाम पर, जिससे तूने अपने प्रियजनों को राह भटकने और गिरने से रोका है, दुराग्रही अत्याचारियों से दूर रखा है और अपने से दूर भटके दुराचारियों से बचाया है, मैं याचना करता हूँ कि अपनी कृपा और अनुकम्पा से मुझे सुरक्षित रख। अपनी शक्ति और सामर्थ्य के बल पर मुझे अपने घर वापस लौटने में समर्थ बना। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकट में सहायक, स्वयंभू है।

– Bahá’u’lláh

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स्तुति हो तेरी, हे नाथ, मेरे परमेश्वर! तू देखता है और जानता है कि मैंने तेरे सेवकों का अन्य किसी ओर नहीं, बल्कि बस तेरी कृपा की ओर उन्मुख होने का आह्वान किया है और इन्हें उन आदेशों का पालन करने को कहा है जो तेरे अबोधगम्य निर्णय और अटल उद्देश्य के द्वारा भेजे गये हैं।

हे मेरे परमेश्वर! जब तक तेरी अनुमति न हो मैं एक शब्द भी नहीं बोल सकता और किसी भी ओर जा नहीं सकता जब तक तेरी स्वीकृति न मिले। यह तू ही है मेरे परमात्मन् जिसने अपनी सामर्थ्य की शक्ति से मुझे अस्तित्व दिया है और अपने धर्म का संदेश देने के लिये अपनी कृपा प्रदान की है। इसी कारण मुझ पर टूटी हैं विपत्तियाँ इतनी कि मेरी जिह्वा पर तेरा यशगान करने और तेरी महिमा का जयघोष करने से रोक लगा दी गई है।

समस्त स्तुति तेरी हो, हे मेरे परमेश्वर ! उन सब के लिये जिसका विधान अपने आदेश और अपनी सम्प्रभुता की शक्ति से तूने किया है, मैं तुझसे याचना करता हूँ कि तू मेरे और निज प्रेमियों के लिये अपने प्रेम को सुदृढ़ रख। तुझे तेरी सामर्थ्य की सौगंध, हे मेरे परमेश्वर! एक पर्दे के कारण तुझसे दूर होकर मैं लज्जित हूँ। मेरा गौरव तो इसी में है कि तुझे जानूं। तेरे नाम का शक्ति-कवच पहन लेता हूँ जब, तब कोई भी चोट आघात नहीं पहुँचा पाती और मेरे हृदय में जब तेरा प्रेम भरा होता है तब संसार भर की विपदाएँ भी मुझे विचलित नहीं कर पातीं। अतः, हे मेरे ईश्वर! वर दे कि तेरे सत्य का खंडन करने वालों और तेरे चिन्हों में अविश्वास करने वालों से मेरी रक्षा हो सके। तू ही, वस्तुतः, सर्वमहिमाशाली, सर्वकृपालु है।

– Bahá’u’lláh

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महिमावंत हो तेरा नाम, हे मेरे परमात्मन्! तेरे उस नाम के सहारे, जिसके द्वारा काल ठहर गया था, पुनर्जीवन सम्भव हो पाया था, और स्वर्ग तथा धरती के सभी वासी प्रकम्पित हो उठे थे, मैं याचना करता हूँ कि उन सब पर, जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं और तेरे धर्म के कार्यों में लिप्त हैं, अपनी कृपा के स्वर्ग और अपनी स्नेहिल करूणा के बादलों से वह बरसा जो उन सेवकों के हृदयों को उल्लसित कर दे। हे नाथ! अपने सेवक और सेविकाओं को तुच्छ आसक्ति और व्यर्थ कल्पनाओं की पीड़ा से बचा और अपने ज्ञान की निर्मल जलधार से एक घूंट पीने की अनुकम्पा प्रदान कर। तू, सत्य ही, सर्वशक्तिमान, परम उदात्त, सदा क्षमाशील, और परम उदार है।

– Bahá’u’lláh

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हे मेरे नाथ, मेरे लिये और उनके लिये जो तेरे भक्त हैं, उसका विधान कर, जिसे तूने अपने मातृग्रंथ के अनुसार हमारे लिये सर्वोत्तम समझा हो, क्योंकि तेरी मुट्ठी में बंद हैं सभी वस्तुओं के परिणाम। तेरे मंगलमय उपहार के रूप में अविराम बरसते हैं उन पर सब कुछ जिन्होंने तेरे प्रेम की कामना की है। तेरी स्वर्गिक कृपा के अद्भुत चिन्हों का भरपूर दान मिलता है उनको, जो तेरी दिव्य एकता को समझ पाये हैं। हमारे लिये जो कुछ भी विधान किया है तूने उसे हम तेरी सार-सम्भाल में अर्पित करते हैं और विनती करते हैं तुझसे कि प्रदान कर वह सब शुभ मंगल हमको जो तेरे ज्ञान की परिधि के अंदर आता है। हे मेरे नाथ, अपनी अन्तर्दृष्टि द्वारा हर अमंगल से मेरी रक्षा कर, क्योंकि तेरे अतिरिक्त अन्य सभी हैं शक्तिहीन और तेरे सान्निध्य के अतिरिक्त कहीं से होता नहीं विजय का उद्भव। आदेश देने का अधिकार एकमात्र तेरा है जो भी परमेश्वर ने चाहा है, वही हुआ है और जो भी नहीं चाहा है वह कदापि नहीं घटित होगा। परम उदात्त, परम सामर्थ्यवान परमेश्वर के अतिरिक्त और किसी में शक्ति और सामर्थ्य नहीं है।

– Báb

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महिमा हो तेरी, हे ईश्वर! तू वह ईश्वर है जो सभी वस्तुओं से पहले अस्तित्व में था, जो सभी वस्तुओं के पश्चात भी अस्तित्व में रहेगा तथा सभी वस्तुओं के परे कायम रहेगा। तू वह ईश्वर है जो सब कुछ जानता है तथा सभी वस्तुओं पर सर्वाच्च है। तू वह ईश्वर है जो सभी वस्तुओं से दया का व्यवहार करता है, जो सभी वस्तुओं के बीच न्याय करता है और जिसकी दिव्य-दृष्टि सभी वस्तुओं में समाये हुए है। तू ईश्वर मेरा स्वामी है, तू मेरी स्थिति से अवगत है, तू मेरे आंतरिक एवं बाह्य अस्तित्व का साक्षी है।

मुझे एवं उन अनुयायियां को, जिन्होंने तेरे आह्वान का प्रत्युत्तर दिया है, क्षमा प्रदान कर। जो कोई भी मुझे दुःख देने की इच्छा रखे अथवा मेरा बुरा चाहे उसके अनिष्ट के विरुद्ध तू मेरा पर्याप्त सहायक बन। वस्तुतः, तू समस्त सृजित वस्तुओं का स्वामी है। तू सभी के लिये पर्याप्त है, जबकि तेरे बगैर कोई भी आत्मनिर्भर नहीं।

– Báb

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ईश्वर के नाम से, जो सब को वश में करने वाली भव्यता का स्वामी है, जो सर्वसम्मोहक है! परम पावन है वह स्वामी, जिसके हाथ में साम्राज्य का उद्गम है। वह जो भी चाहता है करता है सृजन, अपने उस शब्द ”हो जा“ के आदेश से और वह हो जाता है। सत्ता की शक्ति पहले भी उसी की रही है और आगे भी उसी की रहेगी। अपने आदेश की शक्ति से वह जिसे भी चाहे विजयी बनाता है। सत्य ही वह सर्वसमर्थ और सर्वशक्तिशाली है। प्रकटीकरण और सृष्टि के साम्राज्य में, और जो भी है इनके बीच, समस्त महिमा और भव्यता उसी की है। सत्य ही, वह सर्वसमर्थ, सर्वमहिमावन्त है। सदासर्वदा वह अदम्य शक्ति का स्त्रोत रहा है और अनन्त काल तक रहेगा। स्वर्ग और धरती के सभी लोक और जो भी स्थित हैं इनके बीच वे सभी साम्राज्य परमेश्वर के हैं; सर्वव्यापी है उसकी शक्ति। धरती के सभी कोषालय और जो भी स्थित है इनके बीच, सब उसी के हैं और उसके संरक्षण की छत्रछाया सभी वस्तुओं पर है। वही स्रष्टा है स्वर्गों और धरती का और जो भी स्थित हैं इनके बीच, सत्य ही, वह सर्वोपरि साक्षी है। स्वर्ग और धरती के सभी वासियों और जो भी उनके बीच स्थित हैं, उन सबका वही निर्णायक है। सत्य ही वह परमेश्वर निर्णय लेता है तत्क्षण। वही है स्वर्ग और धरती के सभी वासियों और जो भी उनके बीच स्थित हैं, उन सबके लिये अंशों का निर्धारक। वस्तुतः, वही है सर्वोच्च संरक्षक; उसकी मुट्ठी में बंद हैं स्वर्ग और धरती और जो भी स्थित हैं उनके बीच, की कुंजी। स्वयं अपनी ही प्रसन्नता से, अपने आदेश की शक्ति के द्वारा वह देता है उपहारों का दान। वस्तुतः उसकी कृपा के घेरे में हैं सब और वह सब कुछ जानने वाला है।

कहो, परमेश्वर परिपूरक है मेरा, वही है वह जिसकी मुट्ठी में हैं बंद साम्राज्य सभी वस्तुओं का। स्वर्ग और धरती, और इसके बीच जो कुछ भी है उन सब की वह रक्षा करता है। परमेश्वर सत्य ही सभी वस्तुओं पर अपनी दृष्टि रखता है।

अपरिमेय रूप से उदात्त है तू, हे नाथ! हमारे सामने और पीछे, हमारे सिर के ऊपर, हमारे दायें और बायें, हमारे पैरों के नीचे, और हर दिशा में हम जिससे भी असुरक्षित हैं, उन सबसे हमारी रक्षा कर। वस्तुतः सभी पदार्थों पर तेरा संरक्षण अचूक है।

– Báb

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हे परमेश्वर! मेरे परमात्मन्! अहम् और वासना की आसुरी प्रवृत्तियों से अपने सत्यनिष्ठ सेवकों की रक्षा कर, अपनी स्नेहमयी दयालुता की सदा सावधान दृष्टि द्वारा हर प्रकार के विद्वेष, घृणा और ईर्ष्या से इन्हें बचा, अपनी सार-सम्भाल के अभेद्य दुर्ग में इन्हें आश्रय दे और संदेहों के बाणों से इनकी रक्षा कर, इन्हें अपने महिमामय चिन्हों के मूर्त्तरूप बना। अपनी दिव्य एकता के सूर्य से निकलने वाली दीप्तिमान किरणों से इनके मुखड़ों को आलोकित कर, अपने पावन साम्राज्य से प्रकट किये गये श्लोकों द्वारा इनके हृदयों को आनन्दित कर दे, अपने आभालोक से आने वाली सर्वसमर्थ शक्ति द्वारा इन्हें समर्थ बना।

तू सर्वप्रदाता, सर्वरक्षक, सर्वसामर्थ्यशाली और सर्वकृपालु है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8727 (bpn8727)

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संविदा में अडिगता

महिमा हो तेरी, हे प्रभु, मेरे परमेश्वर! तेरे उस नाम पर मैं तुझसे याचना करता हूँ जिसके द्वारा तूने अपने मार्गदर्शन की ध्वजाओं को ऊँचा उठाया है और अपनी स्नेहमयी कृपालुता की कीर्ति-प्रभा बिखेरी है और अपने स्वामित्व की प्रभुसत्ता को प्रकट किया है, जिसके द्वारा अपने नामों का दीपक अपने गुणों के निवास में तूने आलोकित किया है; और जिसके द्वारा वह, जो तेरी एकता का मण्डप-वितान और अनासक्ति के मूर्त्तरूप है, सामने आया है; जिसके माध्यम से तेरे मार्गदर्शन के पथों का ज्ञान हुआ है, तेरी प्रसन्नता के मार्ग रेखांकित किये गये हैं, जिसके द्वारा दोषियों की नींव हिला दी गई है और दुष्टता के चिन्ह मिटा दिये गये हैं, जिसके द्वारा प्रज्ञा के निर्झर स्रोत फूट निकले हैं और स्वर्गिक भोज की पाती भेजी गई है, जिसके द्वारा तूने अपने सेवकों को सुरक्षित रखा है और अपनी सुकोमल दया उनके प्रति प्रकट की है और अपने प्राणियों के बीच अपनी क्षमाशीलता दर्शाई है, उनके नाम पर मैं तुझसे याचना करता हूँ कि जो दृढ़ बना रहा है और जो तुझ तक लौट आया है और तेरी दया की डोर थामे हुए है और तेरे प्रेमपूर्ण मंगल-विधान के परिधान की छोर से लिपटा रहा है, उसे सुरक्षित रख और उसे तेरे द्वारा प्रदान की गई निरन्तरता से, और तेरी इस उदात्त सत्ता से प्रदत्त प्रशांतता से मंडित कर। तू निश्चय ही आरोग्यदाता, संरक्षणकर्ता, सहायक, सर्वशक्तिमान, शक्तिशाली, सर्वमहिमामय, सर्वज्ञाता है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8715 (bpn8715)

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महिमा हो तेरी, हे अनन्त सम्राट, राष्ट्रों के निर्माता और प्रत्येक जर्जर होती अस्थि के स्वरूपदाता! मैं तेरे उस नाम पर प्रार्थना करता हूँ, जिसके द्वारा तूने समस्त मानवता का अपनी भव्यता और महिमा के क्षितिज की ओर आह्वान किया है, और अपने सेवकों को अपनी गरिमा और अनुकम्पा के आंगन की राह दिखाई है, कि तू मेरी गिनती उनमें कर जिन्होंने स्वयं को तेरे सिवा अन्य सभी से मुक्त कर लिया है; और तेरी ओर बढ़ चले हैं और जिन्हें तेरे द्वारा दिये गये दुर्भाग्य भी तेरे उपहारों दिशा में मुड़ने से रोक नहीं पाये हैं। हे मेरे प्रभु! तेरी कृपा की डोर को कस कर थामे हुए मैं तेरे अनुग्रह के परिधान के आंचल की छोर से लिपटा हुआ हूँ। अतः, मेरे ऊपर अपनी उदारता के मेघों से उसकी वर्षा कर जो मुझे तेरे अतिरिक्त अन्य सभी के स्मरण से मुक्त कर दे और मुझे उसकी ओर उन्मुख होने के योग्य बना दे जो समस्त मानवजाति की आराधना का लक्ष्य है; जिसके विरूद्ध द्रोह भड़काने वालों, संविदा तोड़ने वालों और तुझ पर और तेरे चिन्हों पर अविश्वास करने वालों ने व्यूह रचना की है।

हे मेरे स्वामी, अपने दिवसों में मुझे अपने परिधान की सुरभि से वंचित मत कर और अपने मुखड़े के प्रभापुंजों के प्रकटीकरण की घड़ी में अपने धर्म प्रकाशन के उच्छ्वासों से मुझे अलग मत रख। तू जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ है। तेरी इच्छा का प्रतिरोध कोई भी नहीं कर सकता और न ही जिसे तूने अपनी शक्ति से निर्मित किया है, उसे कोई विफल कर सकता है।

तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, सर्वसमर्थ, सर्वप्रज्ञ।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8716 (bpn8716)

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वह सर्वशक्तिशाली है, है क्षमाशील, करुणामय! हे ईश्वर मेरे परमेश्वर! देखता है तू अपने इन सेवकों को जो द्रोह और भूलों की गर्त में पड़े हैं, तेरे दिव्य मार्गदर्शन की वह ज्योति कहाँ है? हे तू, विश्व की कामना! तू उनकी निस्सहायता और दुर्बलता को जानता है। तेरी शक्ति कहाँ है, जिसके अधीन स्वर्ग और धरती की समस्त शक्ति है?

तेरी स्नेहिल दया के प्रकाश के तेज के नाम पर, तेरी प्रज्ञा के महासागर की तरंगों के नाम पर, तेरी उस वाणी के नाम पर, जिससे अपने साम्राज्य के लोगों पर तूने अपना आधिपत्य स्थापित किया है, मैं याचना करता हूँ, हे मेरे नाथ! कि तू मुझको वर दे कि मैं उनमें से एक बनूं जिन्होंने तेरे ग्रंथ में विहित आदेशांं का पालन किया है। मेरे लिये उसका विधान कर, जिसका विधान तूने अपने विश्वासपात्र सेवकों के लिये किया है, जिन्होंने तेरे कृपा-पात्र से दिव्य प्रेरणा की मदिरा का पान किया है और जो तेरी प्रसन्नता के लिये, तेरी संविदा में अडिग रहे हैं और तेरे विधानों के पालन की ओर बढ़े हैं। तू जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, तू है सर्वज्ञ, सर्वप्रज्ञ।

हे नाथ अपनी कृपा के द्वारा मेरे लिये उसका आदेश दे जो इस लोक और परलोक में मुझे समृद्ध बनाये और तेरे निकट ले जाये। हे तू, जो सभी मनुष्यों का स्वामी है ! तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, एकमेव, शक्तिमान, महिमावान्।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8717 (bpn8717)

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हे मेरे प्रभु! अपनी राह में हमारे पगों को अडिग बना, हमारे हृदयों को अपने आदेश के पालन में समर्थ बना। अपनी एकता के सौन्दर्य की ओर हमें उन्मुख कर और हमारे अन्तरमन को अपनी दिव्य एकता के चिन्हों से आह्लादित कर दे। अपनी कृपा के वस्त्र से हमारी काया को सजा दे। हमारी आँखों के सामने से पाप कर्मों के पर्दे हटा दे और हमें अपनी कृपा का वह पात्र दे जिससे तेरी भव्यता की अनुभूति कर सभी तेरा गुणगान करने लगे। अपनी कृपालु वाणी और अपने रहस्यमय अस्तित्व से तब वह प्रकट कर, हे मेरे प्रभु, कि हमारी आत्माएँ प्रार्थना के अतिरेक से भर उठें और सभी पदार्थ तेरे प्रकटीकरण के प्रभापुंज के समक्ष शून्य में विलीन हो जायें; एक ऐसी प्रार्थना जो शब्दों, स्वरों और समस्त संकेतों से ऊपर, हृदय की पुकार से निकली हो। हे प्रभु, ये वे सेवक हैं जो तेरी संविदा और तेरे विधानों के अनुपालन में अडिग और अटल रहे हैं, जो तेरे धर्म के प्रति निष्ठा की डोर थामे हुए हैं और तेरे प्रताप के परिधान की छोर से लिपटे हुए हैं। इन्हें अपनी अनुकम्पा दे, इनकी सहायता कर। हे मेरे प्रभु! अपनी आज्ञा के पालन में इन्हें अडिग बना और अपनी शक्ति से इन्हें सम्पुष्ट कर। तू क्षमाशील है, करुणामय है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8718 (bpn8718)

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हे करुणामय परमेश्वर! धन्यवाद हो तेरा कि तूने मुझे जगाया, चेतना दी। देखने के लिये तूने मुझे आँखे दीं और तूने मुझे समर्थ कान दिये। तूने अपने साम्राज्य की राह दिखलाई है। तूने मुझे सच्चा पथ दिखलाया है और मुझे मुक्ति की नौका में प्रवेश दिया है। हे परमेश्वर! मुझे अडिग बनाये रख और मुझे निष्ठा में अटल बना। प्रचंड परीक्षाओं से मेरी रक्षा कर अपनी संविदा के मंदिर और विधानों के दुर्ग में मुझे संरक्षण दे। तू सब कुछ देखने वाला है, तू सब कुछ सुनने वाला है। हे तू करुणामय परमेश्वर! मुझे एक ऐसा हृदय प्रदान कर जो दर्पण की भाँति तेरे प्रेम की ज्योति से प्रकाशित हो और अपनी स्वर्गिक कृपा की वर्षा से मुझे ऐसे विचारों का दान दे, जो इस संसार को एक गुलाब वाटिका में बदल दे। तू करुणामय, कृपालु है, तू महान कल्याणकारी परमेश्वर है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8719 (bpn8719)

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हे मेरे प्रभो, मेरी आशा! तू अपने इन प्रियजनों को तेरी परम सामर्थ्यमय संविदा में अडिग रहने में, और तेरे इस प्रकटित धर्म के प्रति निष्ठावान रहने में, तेरे प्रभापुंजों के ग्रंथ में विहित आदेशों का पालन करने में सहायता कर जिससे कि ये दिव्य लोक के सहचरों के मार्गदर्शन की ध्वजा और दीपक बन सकें, तेरी अनन्त प्रभा के निर्झर स्रोत और सच्चा पथ दिखाने वाले वे तारक बन सकेंं, जो उस दिव्य गगन से जगमगाते हैं। निश्चय ही तू अजेय, सर्वसमर्थ, सर्वशक्तिमान् है।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8720 (bpn8720)

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सभाएँ

महिमावंत है तू हे मेरे नाथ, मेरे ईश्वर! तेरी कृपा के पवन झकोरों के नाम पर और उनके नाम पर जो तेरे उद्देश्य के दिवानक्षत्र और तेरी प्रेरणा के उद्गम हैं, मैं याचना करता हूँ कि मुझ पर और उन सब के ऊपर, जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, वह भेज जो तेरी उदारता और आशीषमय कृपा के समीचीन हो और तेरे वरदानों और अनुग्रह के अनुकूल हो। मैं दीन और एकाकी हूँ, हे मेरे नाथ! अपनी सम्पदा के सागर में मुझे निमग्न कर ले, पिपासु हूँ, अपनी स्नेहिल कृपा के जीवन-जल का पान करने दे।

तेरे ही नाम पर और उसके नाम पर जिसे तूने अपने अस्तित्व का मूर्त्त रूप बनाया है और स्वर्ग तथा पृथ्वी पर जो भी है उन्हें अपने दिव्य शब्द का बोध कराया है, मैं याचना करता हूँ कि अपने विधान के वृक्ष की छाया तले अपने सेवकों को एकत्र कर और तब इसके मीठे फल का स्वाद लेने, इसकी पातों के स्पंदन से उत्पन्न होने वाले सुमधुर स्वर को समझने और इसकी शाखाओं पर चहकने वाले दिव्य पक्षी के कलरव को सुनने के योग्य बना। तू सत्य ही, संकटमोचन, पहुँच से परे, सर्वशक्तिशाली और परम कृपालु है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8697 (bpn8697)

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हे तू दयालु ईश्वर! ये तेरे सेवक हैं जो इस सभा में एकत्रित हुए हैं, तेरे साम्राज्य की ओर उन्मुख हैं और तेरे उपहार तथा आशीर्वाद की कामना करते हैं। हे ईश्वर जीवन के यथार्थ में निहित एकता के अपने चिन्हों को प्रमाणित और प्रकट कर। उन गुणों को प्रकट और प्रत्यक्ष कर जो मानवीय यथार्थों में अप्रकट तथा गुप्त रखे गये हैं।

हे ईश्वर, हम पौधों की भाँति हैं और तेरी कृपा वर्षा के समान है। इन पौधों को नवस्फूर्ति प्रदान कर, इन्हें अपने आशीष से विकसित कर। हम तेरे सेवक हैं, हमें भौतिक अस्तित्व की बेड़ियों से मुक्त कर। हम अज्ञानी है, हमें ज्ञानी बना। हम मृत हैं, हमें जीवन दे। हम जड़ हैं, हमें चेतन बना। हम वंचित हैं, हमें अपने रहस्यों से अंतरंग कर। हम दीन हैं, हमें अपने असीम कोष से समृद्धि और आशीष प्रदान कर।

हे प्रभु, हमें पुनर्जीवित कर, दृष्टि तथा श्रवण शक्ति प्रदान कर, जीवन के रहस्यों से परिचित करा, ताकि अस्तित्व के हर लोक में तेरे साम्राज्य के रहस्य हम पर प्रकट हों और हम तेरी एकमेवता के साक्षी बन सकें। हर कृपा का स्रोत तू ही है। तू समर्थ है, शक्तिसम्पन्न है, तू दाता है, तू ही है सदा कृपालु।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8698 (bpn8698)

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हे तू कृपालु ईश्वर! हे तू, जो समर्थ और शक्तिशाली है। हे तू परम दयालु पिता! ये सेवक तेरी ओर उन्मुख होकर, तेरी देहरी का स्मरण करते हुए और तेरे महान आश्वासन की अनन्त कृपा की कामना करते हुए एकत्रित हुए हैं। तुम्हारी सुप्रसन्नता के अतिरिक्त इनका और कोई उद्देश्य नहीं है। मानव-सेवा के अतिरिक्त इनका और कोई ध्येय नहीं है।

हे ईश्वर! इस सभा को दीप्त कर। इनके हृदयों को दयावान बना। पावन चेतना के आशीष इन्हें प्रदान कर। स्वर्ग की शक्ति से इन्हें विभूषित कर। स्वर्ग के विवेक का आशीष दे इन्हें। इनकी निष्ठा बढ़ा ताकि पूरी विनम्रता और सम्पूर्ण समर्पण की भावना के साथ ये तेरे साम्राज्य की ओर उन्मुख हो सकें और मानव-सेवा में लगे रहें। इनमें से प्रत्येक प्रकाशित दीप बनें। इनमें से प्रत्येक जगमगाता सितारा बनें। इनमें से प्रत्येक ईश्वर के साम्राज्य के सुन्दर रंग और सुरभि के संवाहक बनें।

हे दयालु पिता! अपने आशीष भेज। हमारे दोषों को न देख। अपनी सुरक्षा में हमें आश्रय दे। हमारे पापों को याद न कर। अपनी कृपा से हमें आरोग्य प्रदान कर। हम शक्तिविहीन हैं, तू है शक्तिशाली। हम दरिद्र हैं, तू है सम्पन्न ! हम रोगग्रस्त हैं, तू है दिव्य चिकित्सक ! हम आवश्कताग्रस्त हैं, तू है परम उदार!

हे ईश्वर ! अपने मंगलविधान से हमें विभूषित कर। तू शक्तिशाली है ! तू कल्याणकारी है ! तू है दाता!

– Abdu’l-Bahá

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हे मेरे ईश्वर! हे मेरे परमेश्वर! सत्य ही, ये सेवक तेरी ओर उन्मुख हो रहे हैं, तेरी दया के साम्राज्य की याचना कर रहे हैं। सत्य ही ये तेरी पावनता के प्रति आकर्षित हुए हैं और तेरे प्रेम की ज्वाला से दीप्त हो उठे हैं, तेरे लीलामय लोक की दया की कामना कर रहे हैं और तेरे स्वर्गिक साम्राज्य में प्रवेश पाने की आशा रखते हैं। सत्य ही, ये तेरे आशीषों की वर्षा की कामना करते हैं और सत्य सूर्य से प्रकाशित होने की इच्छा रखते हैं। हे ईश्वर, इन्हें देदीप्यमान दीपक बना दे। ये तेरे काम आ सकें, तेरे प्रेम की डोर से बंध सकें और तेरी अनुकम्पा का प्रकाश पा सकें, ऐसा वर दे। हे नाथ ! इन्हें मार्गदर्शन के संकेत-चिन्ह बना, अपने शाश्वत साम्राज्य का आदर्श प्रतिरूप बना, अपने कृपासागर की उत्ताल तरंगें बना, अपनी भव्यता के प्रकाश को प्रतिबिम्बित करने वाला दर्पण बना।

सत्य ही, तू है उदार, सत्य ही, तू है दयामय, सत्य ही, तू है अनमोल, परम प्रियतम।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8700 (bpn8700)

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हे तू क्षमाशील स्वामी ! तेरे ये सेवक, तेरे साम्राज्य की ओर उन्मुख हो रहे हैं और तेरी अनुकम्पा और दया की कामना कर रहे हैं। हे ईश्वर, इनके हृदयों को निर्मल और पावन कर दे ताकि ये तेरे प्रेम के योग्य बन सकें। इनकी चेतना को शुद्ध एवं पवित्र कर दे ताकि सत्य सूर्य का प्रकाश इनमें चमक सके। इनके नेत्र इस योग्य बना दे कि ये तेरे प्रकाश का अवलोकन कर सकें, इन्हें अपने साम्राज्य की पुकार सुनने के योग्य बना दे।

हे स्वामी, यह सत्य है कि हम दीन-हीन हैं, लेकिन तू तो है सर्वसम्पन्न। हम याचक हैं, तू वह है जिसकी याचना सभी करते हैं। हे स्वामी! हम पर दया कर, हमें क्षमा कर दे, हमें ऐसी शक्ति और सामर्थ्य दे कि हम तेरी अनुकम्पाओं के योग्य बन सकें और तेरे साम्राज्य की ओर आकर्षित हो सकें, ताकि जीवन-जल का पान हम जी भरकर कर सकें, तेरे प्रेम की ज्वाला से प्रदीप्त हो उठें और इस प्रकाश से भरे युग में पावन चेतना की सांसों के सहारे पुनर्जीवित हो उठें।

हे ईश्वर, मेरे परमेश्वर! इस सभा पर अपनी प्रेम भरी कृपालुता की दृष्टि डाल। इनमें से प्रत्येक को अपना संरक्षण प्रदान कर, अपने अधीन रख। अपने स्वर्गिक आशीष इन्हें प्रदान कर। निमग्न कर दे इन्हें अपने कृपासागर में और अपनी पावन चेतना की सांसों द्वारा इन्हें नवजीवन प्रदान कर।

हे स्वामी! इस न्यायसंगत सरकार को अपनी अनुकम्पायुक्त सहायता प्रदान कर, अपने आशीषों से सम्पुष्ट कर। ये राष्ट्र तेरे संरक्षण की आश्रय दायिनी छाया तले हैं और ये लोग तेरी ही सेवा में संलग्न हैं। हे स्वामी! इन्हें अपने स्वर्गिक आशीष प्रदान कर और अपनी भरपूर अनुकम्पा से इन्हें भर दे। अपने साम्राज्य में इन्हें स्वीकारे जाने योग्य बना। तू शक्तिशाली है, है सर्वसमर्थ, दयालु है और है भरपूर अनुकम्पा का स्वामी।

– Abdu’l-Bahá

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हे दिव्य विधानदाता! यह सभा तेरे उन मित्रों की है, जो आकर्षित हुए हैं तेरे सौन्दर्य के प्रति और जिनके अंदर धधक रही है तेरे प्रेम की ज्वाला। इन आत्माओं को स्वर्गिक देवदूत बना दे, नवजीवन दे कर इन्हें अपनी पावन चेतना से प्रखर कर, इनकी वाणी को ओज प्रदान कर, इन्हें संकल्प भरे हृदय दे, इन्हें स्वर्ग की शक्ति से इस योग्य बना दे कि ये तेरी कृपा ग्रहण कर सकें, इन्हें मानवजाति की एकता का प्रवर्तक बना दे और बना दे मानव-संसार में प्रेम और मैत्री का संवाहक, ताकि सत्य के सूर्य के प्रकाश से ज्ञानशून्य पूर्वाग्रह का घातक अंधकार दूर हो सके, शोक-संतापों से भरा यह संसार ज्ञान के प्रकाश से दीप्त हो उठे और समाहित कर ले यह भौतिक जगत अपने में आध्यात्मिक लोक की किरणें, विविध रंग मिलकर एक रंग हो जायें और इनके द्वारा की गई प्रार्थना का मधुर स्वर तेरी पावनता के साम्राज्य तक पहुँच सके। सत्य ही, तू है सर्वसमर्थ और सर्वशक्तिशाली।

– Abdu’l-Bahá

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सहायता

हे तू, जिसका मुखड़ा है मेरी आराधना का केन्द्र, जिसका सौन्दर्य है मेरा अभयस्थल, जिसका आवास है मेरा लक्ष्य, जिसकी स्तुति है मेरी आशा, जिसका मंगल विधान है मेरा सहचर, जिसका प्रेम है मेरे अस्तित्व का कारण, जिसका स्मरण है मेरा भरोसा, जिसकी निकटता है मेरी कामना, जिसकी समीपता है मेरी सर्वाधिक प्रिय इच्छा और सर्वोच्च आकांक्षा। मैं प्रार्थना करता हूँ तुझसे कि मुझे उन वस्तुओं से वंचित मत कर, जिसका विधान तूने अपने चुने हुए सेवकों के लिये किया है। अतः, मुझे इहलोक और परलोक का शुभ प्रदान कर।

सत्यतः, तू ही है, समस्त मानवजाति का सम्राट। तू सदा क्षमाशील है, परम उदार, तेरे सिवा अन्य कोई ईश्वर नहीं है !

– Bahá’u’lláh

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मेरे ईश्वर, मेरे आराध्य, मेरे राजाधिराज, मेरी कामना! कौनसी वाणी तेरा धन्यवाद कर सकती है। मैं असावधान था, तूने मुझे जगाया। मैं तुझसे विमुख हो गया था, तूने अपनी ओर उन्मुख होने में मुझे सहायता दी, मैं तो मृतप्राय था, तूने मुझे जीवन के जल से चैतन्य किया। मैं मुरझा गया था, तूने उस सर्वदयामय की लेखनी से प्रवाहित अपनी वाणी की स्वर्गिक धार से फिर से जीवन का दान दिया।

हे दिव्य मंगल विधान! समस्त अस्तित्व तेरे दातारपन से उत्पन्न हुए हैं, उसे अपनी उदारता के जल से वंचित मत कर और न ही तू उसे अपनी दया के महासिंधु तक आने से रोक। मैं तुझसे याचना करता हूँ कि सभी कालों और सभी परिस्थितियों में मुझे सहारा दे, मेरी सहायता कर। मैं तेरी कृपा के स्वर्ग से तेरी उस पुरातन कृपा की कामना करता हूँ। तू सत्य ही, अक्षय सम्पदाओं का प्रभु है और चिरंतनता के साम्राज्य का सम्प्रभु स्वामी है।

– Bahá’u’lláh

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कहो, हे परमेश्वर! मेरे परमेश्वर! मेरे मस्तक को न्याय के मुकुट से और मेरे ललाट को समता के आभूषण से विभूषित कर दे। तू सत्य ही, वरदानों और अक्षय सम्पदाओं का अधीश्वर है।

– Bahá’u’lláh

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हे परमेश्वर! तेरे परम महिमाशाली नाम पर मैं तुझसे मांगता हूँ कि तू उस कार्य में मेरी सहायता कर जो तेरे सेवकों के कार्यकलापों को ऋद्धि-सिद्धि दे और तेरे नगरों को समृद्धि दे। सत्य ही, तेरी शक्ति का आधिपत्य सभी वस्तुओं पर है।

– Bahá’u’lláh

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हे मेरे ईश्वर, मेरे स्वामी और मेरे मालिक! मैंने अपने बंधु-बाँधवां से स्वयं को अनासक्त कर लिया है और तेरे माध्यम से धरती पर निवास करने वालां से स्वतंत्र होने की इच्छा की है; सदा वह प्राप्त करने के लिये तत्पर रहा हूँ जो तेरी दृष्टि में प्रशंसनीय है। मुझे वह शुभ प्रदान कर जो मुझे तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से स्वतंत्र कर दे तथा मुझे अपने अपार अनुग्रहां का प्रचुर हिस्सा प्रदान कर। वस्तुतः तू अपार कृपा का स्वामी है।

– Báb

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हे प्रभु! हम दयनीय हैं, हमें अपनी दया का दान दे। दरिद्र हैं हम, अपनी सम्पदा के महासागर से हमें एक अंश प्रदान कर; हम अभावग्रस्त हैं, हमारी आवश्यकता पूरी कर; हम पतित है, अपनी महिमा प्रदान कर। नभचर पक्षी और धरती के पशु प्रतिदिन अपना आहार तुझसे ही प्राप्त करते हैं, और सभी प्राणी तेरी सार-सम्भाल और प्रेमपूर्ण कृपालुता का भाग पाते हैं।

इस निर्बल को अपनी अलौकिक कृपा से वंचित मत कर और इस असहाय आत्मा को अपनी शक्ति के द्वारा अपनी अक्षय सम्पदाओं का दान दे।

हमें हमारा नित्य का आहार प्रदान कर और हमारे जीवन की आवश्यकताओं को अपनी ऋद्धि-सिद्धि का दान दे, जिससे हम तेरे सिवा अन्य किसी पर निर्भर न रहें, पूर्णतया तेरे ही स्मरण में लीन रहें, तेरे पथ पर चलें, और तेरे रहस्यों को उजागर करें। तू है सर्वशक्तिमान, सबको प्रेम करने वाला और मानवजाति का पालनहार।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8708 (bpn8708)

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हे तू दयालु प्रभु! हम तेरी देहरी के सेवक हैं, तेरे पावन द्वार का आश्रय लिये हुए हैं। हम इस सुदृढ़ स्तम्भ के अतिरिक्त अन्य किसी की शरण की चाह नहीं रखते, तेरी सुरक्षा भरी देखभाल को छोड़ अन्य किसी आश्रय की ओर नहीं मुड़ते। अतः हमारी रक्षा कर, हमें आशीष दे, हमें सहारा दे। हमें ऐसा बना दे कि जो तुझे प्रिय है उसके अतिरिक्त किसी अन्य से हम प्रेम न करें, केवल तेरा ही गुणगान करें, सदा सत्य के मार्ग पर चलें, हम इतने समृद्ध हो जायें कि तेरे अतिरिक्त अन्य सभी को त्याग सकें, हम तेरी कृपा के सागर से अपना उपहार पायें, हम तेरे धर्म को ऊँचा उठाने और तेरी सुमधुर सुरभि को दूर-दूर तक फैलाने के प्रयास में जुट जायें, हम अपने अहम् से अचेत हो जायें और केवल तुझमें ही रम जायें और तेरे अतिरिक्त अन्य सब को त्याग कर तुझमें ही लीन रहें।

तू है दाता, क्षमाशील! हमें अपनी अनुकम्पा और स्नेहिल कृपा प्रदान कर, अपने उपहार दे, हमारा पोषण कर, ताकि हम अपने लक्ष्य को पा सकें। तू है शक्तिसम्पन्न, सुयोग्य, ज्ञाता और दिव्य द्रष्टा। सत्य ही है तू उदार, सत्य ही है तू सर्वकृपालु और सत्य ही तू सदा क्षमाशील है। तू वह है जिसके समक्ष पश्चाताप करने वाले के घोरतम पापों को भी तू क्षमा का दान दे देता है।

– Abdu’l-Bahá

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हे नाथ! तेरे नाम पर बिछाये गये इस आनन्दमय पटल को हटा मत और उस प्रज्ज्वलित शिखा को, जो तेरी कभी न बुझने वाली अग्नि द्वारा जलाई गई है, बुझा मत। उस प्रवाहमान जीवंत जल को, जो तेरी महिमा और तेरे स्मरण की सुमधुर ध्वनि को गुंजरित करते हैं, प्रवाहित होने से मत रोक और अपने सेवकों को अपने प्रेम से सुवासित तेरी मधुर सुगंध की सुरभि से वंचित मत कर।

हे नाथ! अपने विशुद्ध जनों की कष्टदायक चिन्ताओं को दूर कर, उनकी कठिनाइयों को सुख में, उनके अपमान को महिमा में, उनके शोक को आनन्दमय उल्लास में बदल दे। हे तू, जो अपनी मुट्ठी में सम्पूर्ण मानवता की नियति की लगाम पकड़े हुए है। तू सत्य ही एकमेव, सामर्थ्यशाली, सर्वज्ञाता, सर्वप्रज्ञ है।

– Abdu’l-Bahá

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हे मेरे प्रभु, मेरे प्रियतम, मेरी आकांक्षा! मेरे अकेलेपन में मेरा सखा और मेरी निष्कासित अवस्था में मेरा संगी बन, मेरे शोक का निवारण कर। ऐसी कृपा कर कि मैं तेरी कीर्ति को समर्पित हो जाऊँ। अपने अतिरिक्त अन्य सब कुछ से मुझे विरक्त कर दे। अपनी पावनता की सुरभि द्वारा मुझे आकर्षित कर ले। ऐसी कृपा कर कि मैं तेरे लोक में उनका संगी बनूं, जो तुझे छोड़ अन्य सभी से अनासक्त हैं, जो तेरी पावन देहरी की सेवा की कामना रखते हैं, और जो तेरे धर्म का कार्य करने के लिये कटिबद्ध खड़े हैं। मुझे सामर्थ्य दे कि मैं तेरी उन सेविकाओं में एक बन जाऊँ, जिन्होंने तेरी मंगलमय प्रसन्नता प्राप्त की है। सत्य ही, तू कृपालु है, है उदार।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8711 (bpn8711)

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हे दिव्य विधानकर्ता! हम दया के पात्र हैं, हमें अपनी सहायता दे, घर विहीन बटोही हैं हम, अपनी शरण का दान दे हमें, बिखरे हुए हैं हम, तू एक कर दे हमें, भटके हुए राही हैं हम, अपनी शरण में ले ले हमें, वंचित हैं हम, अंश मात्र दे दे हमें, प्यासे हैं हम, जीवन-सरिता की राह दिखा दे हमें, दुर्बल हैं हम, सबल बना दे हमें, ताकि हम तेरे धर्म की सहायता में उठ खड़े हों और तेरे मार्गदर्शन की राह पर चलकर अपना बलिदान कर सकें।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8712 (bpn8712)

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हे प्रभो! हम निर्बल हैं, हमें सबल बना। हम अज्ञानी हैं, हमें ज्ञानवान बना। हे नाथ ! हम दरिद्र हैं, हमें सम्पन्न बना। हे परमात्मन्! हम प्राणहीन हैं, हमें चैतन्य से अनुप्राणित कर। हे स्वामिन्! हम मूर्तिमान दीनता हैं, अपने साम्राज्य में हमें महिमावन्त बना! हे प्रभो! यदि तू हमें सहायता नहीं देगा तो हम मिट्टी से भी अधम बन जायेंगे। हे नाथ! हमें शक्तिमय बना, हे परमेश्वर! हमें विजय प्रदान कर। हे ईश्वर, हमें अहम् को जीतने और वासनाआें को वश में करने में समर्थ बना। हे नाथ! इस भौतिक लोक के बंधनों से हमें मुक्त कर। हे स्वामिन्! अपनी पावन चेतना के उच्छ्वास से हममें जीवन का चैतन्य भर, जिससे हम तेरी सेवा करने को उठ खड़े हों, तेरी उपासना में संलग्न हो जायें, और अत्यधिक सत्यनिष्ठा सहित, तेरे राज्य की सेवा के प्रयासों में जुट जायें। हे प्रभो! तू शक्तिशाली है! हे परमेश्वर! तू क्षमाशील है! हे प्रभो! तू करुणामय है!

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8713 (bpn8713)

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ओ तुम, जो परमेश्वर की ओर उन्मुख हो रहे हो! अपने नेत्र अन्य सभी वस्तुओं के प्रति मूंद लो और उस सर्वमहिमामय के साम्राज्य के प्रति उन्हें खोल लो। तुम्हारी जो कुछ भी कामना हो, केवल एक उसी से मांगो, जो कुछ भी तुम पाना चाहो, केवल उसी से याचना करो। एक दृष्टि में ही वह लाखों आशाओं की पूर्ति करता है, एक नज़र से ही वह हर घाव पर शीतल मरहम डाल देता है, एक संकेत मात्र से ही वह शोक की बेड़ियों से हृदयों को सदा के लिए मुक्त कर देता है। वह जो करता है, करता है और हमारे पास कौन सा उपाय है? जो उसकी इच्छा होती है वह उसे पूरा करता है, जो उसे प्रिय होता है वह वैसा ही विधान प्रकट करता है। तब तुम्हारे लिये यही श्रेष्ठ है कि तुम अधीनता में अपना सर झुका लो और सर्वदयामय प्रभु में सम्पूर्ण भरोसा रखो।

– Abdu’l-Bahá

Prayer bpn8714 (bpn8714)

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स्तुति और कृतज्ञता

परमोच्च परमेश्वर के नाम पर! तू महिमावंत और प्रशंसित है, है परमात्मन्, सर्वशक्तिमंत। तू वह है जिसके ज्ञान के सम्मुख ज्ञानी जन भी छोटे दिखते हैं, पराजित हो जाते हैं, जिसके ज्ञान के समक्ष गुणीजन भी अपनी अज्ञानता स्वीकारते हैं, जिसकी सामर्थ्य के समक्ष सम्पन्न भी अपनी निर्धनता की साक्षी देते हैं, जिसके प्रकाश के आगे ज्ञानवान भी अंधकार में खो जाते हैं, जिसके ज्ञान के मंदिर की ओर समस्त ज्ञान और समस्त बोध का सार उन्मुख होता है और जिसकी उपस्थिति के अभयस्थल के चतुर्दिक समस्त मानवजाति की आत्माएँ परिक्रमा करती हैं। तब मैं भला कैसे तेरे उस सारतत्व की चर्चा और महिमा का गान कर सकता हूँ जिसको समझने मेंं गुणी और ज्ञानी जन भी असफल रहें हैं, क्योंकि बिना समझे कोई भी मनुष्य उसकी महिमा का गान नहीं कर सकता, न ही वह उसका वर्णन कर सकता है जहाँ तक वह पहुँच नहीं सकता, जबकि अनन्त काल से अगम्य और अगोचर रहा है। भले ही मैं तेरी महिमा के स्वर्ग और तेरे ज्ञान के साम्राज्य की ऊँचाई तक उड़ान भरने में अशक्त हूँ, लेकिन मैं तेरी उन रचनाआें का वर्णन कर सकता हूँ, जो तेरे शिल्प की कथा कहते हैं। तेरी महिमा की सौगंध! हे समस्त हृदयों के परम प्रियतम्! मात्र तू ही मेरे आकुल प्राणों की वेदना शांत कर सकता है। यदि स्वर्ग और धरती के सभी निवासी मिलकर भी तेरे चिन्हों के उस सूक्ष्मतम् अंश की महिमा का गान करने की कोशिश करें जिसके द्वारा तूने स्वयं को प्रकट किया है, तब भी वे असफल रहेंगे, फिर तेरे पावन शब्दों का कितना अधिक गुणगान होगा जो तेरे समस्त चिन्हों के जनक हैं।

समस्त स्तुति और महिमा तेरी हो ! तू, जिसकी सभी वस्तुओं ने साक्षी दी है कि तू ही है एक सत्य और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई परमेश्वर नहीं है, तू सदासर्वदा से सभी तुलनाआेंं और उपमाओं से ऊपर है। सभी सम्राट तेरे सेवक हैं और सभी गोचर और अगोचर वस्तुएँ तेरे समक्ष अकिंचन हैं। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, कृपालु, शक्तिशाली, परमोच्च !

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8693 (bpn8693)

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सर्वस्तुति हो तेरी, हे मेरे ईश्वर! तू, जो समस्त महिमा और भव्यता का, महानता और गौरव का, सम्प्रभुता और साम्राज्य का, उच्चता और कृपालुता का, विस्मय और शक्ति का उद्गम है। जिसे भी तू चाहे उसे अपने परम सनातन नाम को स्वीकारने का गौरव प्रदान करता है। स्वर्ग और धरती के समस्त वासियों में से कोई भी रोक नहीं सकता तेरी सम्प्रभु इच्छा को पूरा होने से। चिरंतन काल से तूने किया है शासन सम्पूर्ण सृष्टि पर और रहेगा तेरा ही साम्राज्य सदा समस्त सृजित वस्तुआेंं पर। तुझ सर्वसामर्थ्यवान, परम उदात्त सर्वशक्तिशाली सर्वप्रज्ञ के अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है।

अपने सेवकों के मुखड़ां को दीप्त कर दे और निर्मल कर दे उनके हृदय को कि वे तेरे स्वर्गिक अनुग्रहों की ओर उन्मुख हो सकें और पहचान सकें उसे जो तेरा और तेरे दिव्य सारतत्व का अरुणोदय है। वस्तुतः, तू ही है समस्त लोकों का स्वामी! तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, अबाधित, सर्ववशकारी।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8694 (bpn8694)

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जयघोष हो तेरे नाम का, हे नाथ, मेरे ईश्वर! तू वह है जिसकी आराधना करती हैं सभी वस्तुएँ, जो करता नहीं आराधना किसी की, जो स्वामी है सबका, जो अधीन नहीं है किसी के, जो ज्ञाता है सबका और जो ज्ञात नहीं है किसी को भी। तूने मनुष्यों के बीच अपनी पहचान चाही थी और इसलिये अपने मुख से निकले एक शब्द से अस्तित्व दिया था तूने सृष्टि को, स्वरूप दिया था ब्रह्माण्ड को। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, स्वरूपदाता, स्रष्टा, सामर्थ्यवान्, सर्वशक्तिवान्। तेरी इच्छा के क्षितिज पर प्रकाशमान इस एक शब्द के द्वारा मैं तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे उस जीवन-जल को ग्रहण करने के योग्य बना जिसके द्वारा तूने अपने प्रियजनों के हृदयों को अनुप्रणित और आत्माओं को चैतन्य किया है; ताकि मैं हर समय हर परिस्थिति में पूर्णतया तेरी ही ओर उन्मुख रहूँ। तू शक्ति का, महिमा का और कृपा का परमेश्वर है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, तू सर्वोच्च शासक, महिमाशाली, सर्वदर्शी है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8695 (bpn8695)

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महिमावंत है तू, हे नाथ, मेरे परमेश्वर! आभार प्रकट करता हूँ मैं तेरा कि तूने मुझे अपने अवतार स्वरूप को पहचानने और अपने शत्रुओं से विरत होने योग्य बनाया है; और तेरे दिनों में उनके, द्वारा किये गये दुष्कर्मों को मेरे सम्मुख खोलकर रख दिया है और उनके प्रति मुझे आसक्तियों से मुक्त किया है और पूर्णतया तेरी दया और कृपामय अनुग्रहों की ओर उन्मुख होने में समर्थ बनाया है। मैं इसके लिये भी तेरा आभार प्रकट करता हूँ कि तूने अपनी इच्छा के मेघों द्वारा मुझ तक वह भेजा है जिसने मुझे अधर्मियों के संकेतों और अविश्वासियों के भ्रांत विचारों से इतना मुक्त कर दिया है कि मैंने अपना हृदय दृढ़ता से तुझमें लगा लिया है और ऐसे लोगों से दूर भाग आया हूँ जिन्होंने तेरे मुखारबिन्द के प्रकाश को नकार दिया है। तब मैं पुनः आभार प्रकट करता हूँ तेरा कि तूने मुझे अपने प्रेम में दृढ़ रहने का, तेरी जयजयकार करने का, तेरा गुणगान करने का, और तेरे उस कृपा-पात्र से पान करने का अवसर दिया है जो सभी दृश्य और अदृश्य वस्तुओं के ऊपर है। तू सर्वशक्तिशाली, परम उदात्त, सर्वमहिमाशाली, सभी को प्रेम करने वाला है।

– Bahá’u’lláh

Prayer bpn8696 (bpn8696)

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